Home राग बाजारी यह निवेशकों का आरटीआई है मीडिया पर
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यह निवेशकों का आरटीआई है मीडिया पर Print E-mail

राजीव रंजन झा

मीडिया को उस समय बड़ा गुस्सा आता है, जब विभिन्न सरकारी विभाग सूचना के अधिकार (RTI) के तहत लोगों को या मीडिया को कोई जानकारी देने से बचने की कोशिश करते हैं, लेकिन क्या कभी मीडिया ने सोचा है कि उसके पाठक, दर्शक और श्रोता भी आरटीआई रखते हैं मीडिया पर?

सेबी (SEBI) का एक नया दिशानिर्देश निवेशकों के इस आरटीआई को लागू करने का एक सटीक प्रयास है। और अच्छी बात यह है कि भारतीय प्रेष परिषद (Press Council of India) ने भी सेबी की इस पहल को तुरंत स्वीकार कर लिया है।
अखबार या टीवी में कोई खबर देख कर लोग यही सोचते हैं कि वह खबर निष्पक्ष भाव से दी गयी है। लोगों का यही मानना होता है कि इस खबर को छापने या दिखाने में इस अखबार या टीवी चैनल का अपना कोई हित नहीं जुड़ा है। लेकिन अगर जिस कंपनी के बारे में खबर दी गयी है, उसके साथ उस मीडिया कंपनी के व्यावसायिक हित जुड़े हों, तब क्या उस खबर को निष्पक्ष माना जा सकता है? क्या यह नहीं माना जायेगा कि अपनी एक सहयोगी कंपनी को फायदा दिलाने के मकसद से वह खबर दी जा रही है?
जिस कंपनी के बारे में खबर दी गयी है वह अगर शेयर बाजार में सूचीबद्ध (listed)  है, तो उस खबर का असर बाजार में शेयर भावों पर हो सकता है। ऐसे में अगर उस कंपनी में खुद उस मीडिया कंपनी की हिस्सेदारी हो, तो क्या इसका यह मतलब नहीं निकलेगा कि वह मीडिया कंपनी अपनी हिस्सेदारी वाली एक कंपनी का शेयर चढ़ाने की कोशिश कर रही है?
सेबी और प्रेष परिषद, दोनों की ओर निर्धारित नये नियमों के तहत यह जरूरी होगा कि अगर किसी ऐसी कंपनी के बारे में खबर या लेख छपे, जिसमें उस मीडिया समूह की हिस्सेदारी है, तब इस हिस्सेदारी के बारे में उस खबर में लिखना होगा। मीडिया समूहों को अब अपनी वेबसाइट पर निजी समझौतों के तहत ली गयी हिस्सेदारी को सार्वजनिक करना होगा। अगर मीडिया समूह की ओर से नामांकित कोई व्यक्ति ऐसी कंपनी के निदेशक बोर्ड या प्रबंधन में शामिल हो, तो यह भी बताना होगा।
यह बात ठीक है कि हिस्सेदारी होने भर से यह जरूरी नहीं हो जाता कि ऐसी सारी खबरें वास्तव में खबर के रूप में विज्ञापन हों या उनका मकसद शेयर भाव को उछालना ही हो। और फिर केवल इन खुलासों से यह सब पूरी तरह रुक ही जायेगा, यह भी जरूरी नहीं है। लेकिन अभी तो यही देखना होगा कि सेबी और प्रेष परिषद के इन नियमों को मीडिया समूह कितनी तवज्जो देते हैं। पेड न्यूज (पैसा लेकर खबर छापने) के सवाल पर हाल में जितना हंगामा मचा और जो नतीजा निकला, वह ज्यादा उम्मीदें नहीं जगाता। (शेयर मंथन, 30 अगस्त 2010)

Last Updated ( Monday, 30 August 2010 09:30 )
 

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