राजीव रंजन झा
आज सुबह भारतीय शेयर बाजार को दोहरी चुनौती झेलनी होगी – एक तो अंतरराष्ट्रीय संकेत अच्छे नहीं हैं और दूसरे यह कि बाजार का दिग्गज शेयर रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) कमजोरी गहराने के संकेत दे रहा है।
लेकिन इसी चुनौती के बीच बाजार के दमखम की परीक्षा भी हो जायेगी। अगर निफ्टी (Nifty) शुरुआती कारोबार में कुछ कमजोरी दिखाने के बाद वापस सँभल कर 5400 के ऊपर लौटने की कोशिश करे, तो इसका मतलब होगा कि अभी शायद बड़ी गिरावट नहीं आयेगी। लेकिन अगर यह 5350 के नीचे फिसलने की ओर बढ़ जाये तो इसका मतलब है कि अब सामान्य से ज्यादा सावधानी बरतने का समय आ गया है। और इस समय बाजार की अगली दिशा के बारे में ज्यादा सावधान करने वाली बात है रिलायंस की कमजोरी। जरा नीचे के इस चार्ट को देखें।
इसमें साफ है कि रिलायंस का शेयर एक गिरती पट्टी में फंस गया है। साथ ही इसकी लाल रंग की रेखा को देखें। यह जुलाई 2009, नवंबर 2009 और मई 2010 की तलहटियों को छूती रुझान रेखा है। इसी रेखा के कटने के पर मैंने 11 अगस्त को लिखा था कि यह खतरे के निशान के नीचे आ गया है। (देखें http://www.sharemanthan.in/index.php/rag-bazaari/8453-indian-stock-market-column-rajeev-ranjan-jha-11th-aug-2010) मतलब यह था कि इसके तेजी से फिसलने का खतरा बढ़ गया है। अब इस शेयर का गिरती पट्टी के अंदर फंसना कमजोरी बढ़ने का ही संकेत है। इस पट्टी की ऊपरी रेखा अभी 975 के आसपास और निचली रेखा 920 के आसपास है। लेकिन 1 महीने बाद 30 सितंबर तक इसकी ऊपरी रेखा करीब 890 और निचली रेखा 830 पर होगी। जब तक रिलायंस इस पट्टी से बाहर नहीं निकलता, तब तक इसमें मजबूती की उम्मीद नहीं बन सकती। मैंने 11 अगस्त को लिखा था कि रिलायंस को पिछले साल डेढ़ साल में कई बार 1000 और 900 के बीच सहारा मिला है और इस दायरे में सहारा पाने के बाद यह बड़ी तेजी से वापस सँभला है। अभी रिलायंस इस दायरे के लगभग बीच में है। इसलिए यह संभावना जरूर है कि रिलायंस 900 रुपये के ऊपर के किसी भी स्तर से सहारा लेकर तेजी से वापस ऊपर पलटे। लेकिन वैसी कोई संभावना बनने के लिए जरूरी होगा कि यह अपनी गिरती पट्टी से बाहर निकले। (शेयर मंथन, 31 अगस्त 2010) |
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Last Updated ( Tuesday, 07 September 2010 08:51 )
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