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एनटीपीसी (NTPC) के सीएमडी (CMD) अरूप रॉय चौधरी (Arup Roy Choudhury) ने शेयर मंथन से एक खास बातचीत में बताया है कि उनकी कंपनी अब भविष्य में केवल सुपर क्रिटिकल तकनीक के आधार पर अपनी परियोजनाओं के ठेके देगी।
उन्होंने जानकारी दी कि कंपनी जल्दी ही 11 नयी परियोजनाओं के ठेके देने जा रही है। इसके बाद 8 और परियोजनाओं के ठेके जारी होंगे। ये सभी 19 परियोजनाएँ सुपर-क्रिटिकल तकनीक पर आधारित होंगी। हाल में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षख (सीएजी) ने अपनी रिपोर्ट में इस बात की आलोचना की थी कि कंपनी ने अपनी 18 परियोजनाओं में से केवल 3 परियोजनाओं में सुपर-क्रिटिकल तकनीक का इस्तेमाल किया। सुपर-क्रिटिकल तकनीक ज्यादा सक्षम है, जिससे बिजली उत्पादन की लागत घटती है और यह पर्यावरण के लिए भी ज्यादा अनुकूल है। लेकिन रॉय चौधरी ने सफाई दी कि जब कंपनी ने ये ठेके दिये, उस समय यह तकनीक उपलब्ध ही नहीं थी। उनके मुताबिक बीएचईएल और एलएंडटी जैसी कंपनियाँ अभी इस तकनीक को सीखने के दौर में ही हैं। रॉय चौधरी के मुताबिक सीएजी रिपोर्ट में इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया कि भारत में एनटीपीसी की सीपत परियोजना में ही पहली बार इस तकनीक का प्रयोग हो रहा है। उन्होंने बताया कि पहले से इस तकनीक पर आधारित 3 परियोजनाओं के अलावा 19 नयी परियोजनाएँ इसी तकनीक पर होंगी, जिससे कंपनी की ऐसी परियोजनाओं की कुल संख्या 22 हो जायेगी। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि एनटीपीसी को अपनी परियोजनाओं में देरी की वजह से 40,000 करोड़ रुपये का अनुमानित (नोशनल) घाटा हुआ। लेकिन रॉय चौधरी ने इस बात से पूरी तरह इन्कार किया। उन्होंने कहा कि “मैं इस अनुमान से पूरी तरह असहमत हूँ। मुझे यह देखना होगा कि सीएजी ने यह आकलन किस तरह किया है।" (शेयर मंथन, 13 दिसंबर 2010) |
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Last Updated ( Monday, 13 December 2010 15:30 )
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