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डीएलएफ को उम्मीद है कि कारोबारी साल 2010-11 में पिछले साल के मुकाबले वह करीब 20% की बढ़त हासिल कर सकती है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी की एबिटा (EBITDA) आय भी सुधरेगी। डीएलएफ समूह के कार्यकारी निदेशक राजीव तलवार (Rajeev Talwar, Group ED, DLF) के मुताबिक व्यावसायिक (Commercial) श्रेणी में भी अब मांग सुधरने के संकेत मिल रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि मध्यम अवधि में रिटेल क्षेत्र से भी मांग सुधरेगी। पेश है रियल एस्टेट क्षेत्र की स्थिति के बारे में राजीव तलवार से शेयर मंथन की खास बातचीत का दूसरा हिस्सा।
शेयर मंथन: अगर डीएलएफ का पिछला इतिहास देखें तो व्यावसायिक श्रेणी में कंपनी की मजबूत स्थिति रही है। इस समय क्या मांग में सुधार आपको व्यावसायिक श्रेणी में दिख रही है? राजीव तलवार: मांग में अच्छा सुधार दिख रहा है। गुड़गाँव के सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट में आखिरकार 3 करोड़ वर्ग फुट का विकास होना है, जिसमें से अब तक 2 करोड़ वर्ग फुट का निर्माण हो चुका है। इसका एक बड़ा हिस्सा लीज पर दिया जा चुका है। यह कंपनी के लिए आय का का एक मजबूत और नियमित स्रोत बन गया है। साथ ही, आईटी पार्क और एसईजेड के क्षेत्र में भी हमारा अनुभव अच्छा रहा है। चेन्नई में हमने 80 लाख वर्ग फुट का विशाल निर्माण किया है। इसी तरह हैदराबाद, पुणे और कोलकाता में भी निर्माण किया गया है। लेकिन अर्थव्यवस्था में धीमापन आने के बाद हमने पाया कि मांग एकदम से खत्म हो गयी। अब यह मांग फिर से लौट रही है। आईटी क्षेत्र की गतिविधियाँ बढ़ने लगी हैं। इसीलिए पिछली तिमाही में ही हमने लगभग 10 लाख वर्ग फुट लीज पर दिया, जो एक बड़ी संख्या है। जानकारियाँ मांगने वालों की संख्या भी बढ़ रही है, जिससे लगता है कि फिर से स्थिति अच्छी हो रही है। शेयर मंथन: तो पूरे कारोबारी साल के लिए आपकी उम्मीदें क्या हैं? राजीव तलवार: हमें उम्मीद है कि 30-40 लाख वर्ग फुट जगह लीज पर दी जा सकेगी। आने वाली परियोजनाएँ का क्षेत्रफल और भी ज्यादा है। सभी श्रेणियों को मिला कर 5.5-6 करोड़ वर्ग फुट का निर्माण चल रहा है। इसमें आवासीय, व्यावसायिक, रिटेल, आई पार्क वगैरह सब कुछ शामिल है। लेकिन ध्यान रखें कि इसका चक्र ढाई-तीन साल का होता है। शेयर मंथन: व्यावसायिक श्रेणी में आप ज्यादा जोर किस पर दे रहे हैं, लीजिंग या बिक्री? राजीव तलवार: हम दोनों ही काम करते हैं। पहले ज्यादा जोर लीजिंग पर था और अब भी इस पर ध्यान रहेगा। लेकिन छोटे शहरों में या छोटी योजनाओं में बने दफ्तरों को बेचा भी जा सकता है। शेयर मंथन: हाल में कुछ ऐसी खबरें आयीं कि रियल एस्टेट क्षेत्र में कीमतें फिर से बढ़ने लगी हैं। कीमतें बढ़ी हैं तो कितनी और किन श्रेणियों में? राजीव तलवार: यह एकदम गलत है। एक-दो घटनाओं से कोई नतीजा नहीं निकाला जा सकता है। कुछ समय पहले मीडिया में खबरें आ रही थीं कि मुंबई में कीमतें 2007 या 2006 के स्तरों पर पहुँच गयी हैं। अब मीडिया में खबरें आ रही हैं कि बिक्री एकदम निचले स्तरों पर है। मेरे ख्याल से सच्चाई कहीं बीच में है। यह बात सही है कि 2008 और 2009 में कीमतें घट गयी थीं। सभी जगहों पर कीमतें 35-40% तक घटी थीं। व्यावसायिक श्रेणी में स्थिति और भी बुरी थी। रिटेल में तो कीमतें 50% तक घट गयी थीं। अब मांग सुधरने से कीमतें बढ़नी शुरू ही हुई हैं। लोगों की आमदनी स्थिर हो रही है, नौकरियाँ पहले से ज्यादा सुरक्षित लग रही हैं, विकास दर फिर से बढ़ने लगी है, कंपनियाँ फिर से विस्तार की योजनाएँ बनाने लगी हैं। इसलिए स्थिति सुधरती दिख रही है। आवासीय क्षेत्र में यह बात ज्यादा स्पष्ट ढंग से दिख रही है, लेकिन व्यावसायिक श्रेणी में भी सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। लेकिन अभी स्थिति 2006-07 के आसपास बिल्कुल नहीं है। और उस समय वैसी तेजी केवल विकास के चलते नहीं आयी थी, बल्कि मांग की तुलना में आपूर्ति (सप्लाई) पूरी नहीं थी। मुझे लगता है कि भारत सबक नहीं सीखता है। आप अगले 2-3 सालों में फिर से वैसी ही स्थिति बनती देख सकते हैं। शेयर मंथन: अगर आप 2007 के शिखर या फिर 2009 की तलहटी से देखें तो कीमतें अभी कहाँ हैं? राजीव तलवार: मैं समझता हूँ कि 2007 के शिखर से कीमतें अभी करीब 25% नीचे होंगी। लेकिन अगर 2009 की तलहटी से देखें तो कीमतें करीब 10-15% चढ़ी हैं। इस समय ने सिखाया है कि हमें अपने-आप को चुस्त रखना होगा, लागत कम रखनी होगी, और काफी नियंत्रित ब्याज दरों पर पूँजी उठानी होगी। ग्राहकों को निचली ब्याज दरों पर कर्ज उपलब्ध होना चाहिए और साथ ही उद्योग जगत को निचले ब्याज पर कामकाजी पूँजी मिलनी चाहिए, जिससे कीमतें ऊँची न हो जायें। शेयर मंथन: क्या रियल एस्टेट कंपनियों में अभी यह डर है कि कीमतें बढ़ने पर मांग फिर से सुस्त पड़ जायेगी? राजीव तलवार: रियल एस्टेट कंपनियों को यह देखना होगा कि समाज में वेतन-भत्तों के मौजूदा स्तर क्या हैं। साथ ही उन्हें इस बात पर नजर रखनी होगी कि किस चीज की आपूर्ति कब होने वाली है। कीमतें इन बातों पर निर्भर करती हैं। यह समझना होगा कि घर खरीदने वाले ग्राहकों से कब आपके पास नकदी आ सकेगी।
शेयर मंथन: अभी आपके कामकाज में दिल्ली-एनसीआर और देश के बाकी हिस्सों का अनुपात क्या है? राजीव तलवार: दिल्ली-एनसीआर हमारी मुख्य ताकत है और हमारा मुख्य कामकाज यहीं है। अभी लगभग 55-60% कामकाज दिल्ली-एनसीआर में है, जिसमें मुख्य हिस्सा गुड़गाँव का है। अब इसमें नोएडा भी जुड़ रहा है। अगर 2-3 सालों के बाद की स्थिति देखें तो एनसीआर और सुपर-मेट्रो कहे जाने वाले महानगरों का योगदान लगभग 60-65% रहेगा और बाकी शहरों की हिस्सेदारी करीब 35% होगी। शेयर मंथन: आपने कर्ज का बोझ घटाने के कई उपाय किये हैं। अभी कर्ज की मौजूदा स्थिति क्या है और क्या आप इसे और घटाने की कोशिश कर रहे हैं? राजीव तलवार: हमारी कोशिश यही है कि अगले 3-5 सालों में कर्ज का बोझ घटाया जाये। इसमें कितनी कमी आती है, यह इस बात पर निर्भर होगा कि हम अपनी अतिरिक्त (नॉन-कोर) परिसंपत्तियों को कितनी जल्दी बेच पाते हैं। साथ ही, यह इस पर निर्भर होगा कि नयी योजनाओं, पहले से चल रहे निर्माण, व्यावसायिक मांग के सुधरने और मध्यम अवधि में रिटेल मांग के सुधरने के चलते आने वाली नकदी कितनी बढ़ पाती है। शेयर मंथन: किन व्यवसायों या परिसंपत्तियों को आप मुख्य व्यवसाय से अलग मान रहे हैं? राजीव तलवार: होटल इसी तरह का व्यवसाय है, क्योंकि इसमें हम केवल रियल एस्टेट परिसंपत्ति का निर्माण कर रहे थे और प्रबंधन हमेशा पेशेवर कंपनियों के हाथ में दिया जा रहा था। ये पेशेवर कंपनियाँ होटल क्षेत्र में सबसे अच्छी अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ थीं। इसी तरह से वित्तीय कंपनियों, जैसे बीमा में निवेश को भी गिना जा सकता है। पहले हमने सोचा था कि गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों को भी इस सूची में रखा जाये, लेकिन इनमें कर संबंधी फायदे इतने अधिक हैं कि हमने इसे एक उचित वित्तीय निवेश की तरह देखना ठीक समझा। हमारा मुख्य व्यवसाय तो आवासीय, व्यावसायिक और रिटेल रियल एस्टेट ही है। बाकी चीजों को अतिरिक्त गतिविधियों के रूप में देखा जा सकता है। शेयर मंथन: इन अतिरिक्त व्यवसायों को बेचने का मुख्य उद्देश्य क्या है – कर्ज घटाने के लिए पैसा जुटाना या अपने मुख्य व्यवसाय पर ज्यादा ध्यान देना? राजीव तलवार: एक यह कारण तो है ही कि हम अपने मुख्य व्यवसाय पर ज्यादा जोर दे सकें। अपने मुख्य व्यवसाय में हमने विशेषज्ञता हासिल की है। हमारे पास बड़ी संख्या में तकनीकी कुशलता वाले लोग हैं जो हमारे मुख्य व्यवसाय को शानदार ढंग से चला रहे हैं। लेकिन इन अतिरिक्त व्यवसायों में आपको ज्यादा जोर लगाने की जरूरत पड़ती है, खास कर मानव संसाधन (एचआर) के क्षेत्र में। इसीलिए हमारा सोचना है कि अगर हम अपने मुख्य व्यवसाय पर ज्यादा ध्यान दें तो भविष्य में इसका ज्यादा फायदा मिल सकेगा। शेयर मंथन: आप अगला कौन-सा अतिरिक्त व्यवसाय बेचने जा रहे हैं? राजीव तलवार: हमने अपने होटल व्यवसाय को बेचने के लिए सामने रखा था। हम बीमा व्यवसाय भी बेचने की सोच रहे हैं। ऐसे व्यवसायों की एक सूची है जिस पर हम काम करते रहते हैं। इन सब पर बातचीत चलती रहती है और हम सबसे बातचीत के लिए तैयार हैं। एक व्यावसायिक घराने के रूप में हम बंद दिमाग से काम नहीं कर सकते। यह सही है कि आपको अपनी प्राथमिकताएँ तय करनी होती हैं। मिसाल के तौर पर हम अक्षय (रीन्यूएबल) ऊर्जा स्रोतों के व्यवसाय के लिए बातचीत कर रहे थे। लोग यह सोच कर हमसे बात कर रहे थे कि यह आसान खरीदारी कर लेने का समय है। लेकिन जिस तरह के कर संबंधी फायदे इस व्यवसाय में मिल रहे हैं, उन्हें देख कर हम इस बातचीत से हट गये। यह एक गतिशील प्रक्रिया है जो हर समय चलती रहती है। शेयर मंथन: अमन रिजॉर्ट्स की क्या स्थिति है? राजीव तलवार: हम अभी बातचीत कर रहे हैं। बाजार में काफी ज्यादा अटकलें लगायी जा रही हैं। मीडिया बार-बार हमसे पूछता रहता है कि हमने फलां कंपनी के बारे में सुना है, अब इस दूसरी कंपनी के बारे में सुना है, वगैरह। हम बातचीत के लिए हमेशा खुले हैं, लेकिन हम अटकलों को बढ़ावा नहीं देते। शेयर मंथन: इस कारोबारी साल की पहली तिमाही में आपने अतिरिक्त संपत्तियों के विनिवेश से 294 करोड़ रुपये जुटाये। क्या आपने पूरे कारोबारी साल के लिए कोई लक्ष्य रखा है? राजीव तलवार: हाँ, एक लक्ष्य रखा गया है। हमारे सीएफओ ने हाल ही में ऐलान किया है कि वे कर्ज के स्तर को करीब 25% घटा कर 15,000-16,000 करोड़ रुपये के स्तर पर लाने की योजना बना रहे हैं। लेकिन यह योजना अगले 2-3 सालों की है और अगले 3-4 सालों में हम कर्ज को बिल्कुल निचले स्तरों पर ले आना चाहते हैं। शेयर मंथन: महँगाई दर फिर से बढ़ने लगी है और ब्याज दरों का चक्र फिर से ऊपर की ओर की है। क्या आपको लगता है कि इन वजहों से आवासीय और व्यावसायिक श्रेणियों में मांग पर बुरा असर होगा? राजीव तलवार: बिल्कुल, दोनों ही कारणों से होगा। ऊँची महँगाई दर मुख्य रूप से खाने-पीने की चीजों की वजह से है। लेकिन अगर भारत को चीन की तरह लंबी अवधि के विकास-चक्र (ग्रोथ साइकल) से गुजरना है तो ब्याज दरों को नीचे रखना जरूरी होगा। शेयर मंथन: क्या इन दोनों बातों का मांग पर असर दिखने लगा है, या अभी केवल इसकी आशंका है? राजीव तलवार: अभी तो इसकी आशंका ही है। आखिरकार बैंकों ने अब तक ब्याज दरों को कम ही रखा है और कहा है कि वे अभी ब्याज दरें ऊँची नहीं करेंगे। शेयर मंथन: ऊँची महँगाई और ऊँची ब्याज दरों का असर किस श्रेणी में ज्यादा होगा – आवासीय या व्यावसायिक? राजीव तलवार: पहले तो इसका असर आवासीय श्रेणी के ग्राहकों पर ही दिखता है, क्योंकि उनकी मासिक किश्तें (ईएमआई) बढ़ जाती हैं। हमारे एक पूर्व प्रधानमंत्री ने एक बड़ी सरल कसौटी सामने रखी थी कि जब तक किसी संपत्ति को खरीदने पर ईएमआई उसी संपत्ति के किराये से कम या उसके बराबर रहती है, तब तक उस संपत्ति को इस्तेमाल करने वाला उसे तुरंत खरीद लेना चाहेगा। इसलिए ब्याज दरें नीचे रहने से भारत में ज्यादा ग्राहकों पर काफी असर होगा। ब्याज दरें नीचे रहने का फायदा केवल व्यावसायिक पूँजी को लेकर नहीं मिलेगा, बल्कि अंतिम रूप से उस घर को खरीद कर रहने वाले के लिए यह बेहतर होगा। शेयर मंथन: डीएलएफ की एबिटा आय पहली तिमाही में 3% घट कर 1112 करोड़ रुपये रही थी। क्या आप आने वाली तिमाहियों में एबिटा में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं? राजीव तलवार: निश्चित रूप से। हम इस समय नयी परियोजनाएँ शुरू कर रहे हैं, नये उत्साह के साथ बिक्री पर जोर दिया जा रहा है और अनबिके मकानों की संख्या (स्टॉक इन्वेंटरी) घटने की उम्मीद है। इसलिए एबिटा में बढ़ोतरी जरूर होगी। शेयर मंथन: क्या आप कोई अनुमान सामने रखना चाहेंगे? राजीव तलवार: नहीं, हम अटकलें नहीं लगाते। शेयर मंथन: लेकिन पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 2010-11 कितना बेहतर होगा? राजीव तलवार: निश्चित रूप से यह बेहतर होगा। आप करीब 20% बढ़ोतरी की उम्मीद कर सकते हैं। शेयर मंथन: और क्या यह मानें कि 2011-12 भी 2010-11 से बेहतर होगा? राजीव तलवार: इस बात की भी पूरी उम्मीद रहेगी। यह कई बातों पर निर्भर करेगा, लेकिन देश की प्रगति जिस तरह से हो रही है, उससे हर किसी को यही उम्मीद है कि भारत की विकास दर इस साल 8% या 8.5%, अगले साल 9% और उसके अगले साल 9.5% रह सकती है। इसका फायदा हमें भी मिलेगा। (शेयर मंथन, 11 सितंबर 2010) |