Home विशेष बातचीत पिरामल हेल्थकेयर (Piramal Healthcare) बायबैक: फैसला अच्छा, लेकिन आर्बिट्राज आकर्षण नहीं (वीडियो)
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पिरामल हेल्थकेयर (Piramal Healthcare) बायबैक: फैसला अच्छा, लेकिन आर्बिट्राज आकर्षण नहीं (वीडियो) Print E-mail

पिरामल हेल्थकेयर (Piramal Healthcare) ने आनुपातिक रूप से 20% शेयरों को वापस खरीदने (बायबैक) का फैसला किया है। इस फैसले के बाद से ही यह शेयर कुछ दबाव में दिख रहा है। शेयर मंथन ने इस वापस खरीद (बायबैक) के मसले को समझने के लिए बातचीत की एसएमसी ग्लोबल (SMC Global) के रिसर्च प्रमुख जगन्नादम तुनुगुंतला (Jagannadham Thunuguntla) से। 

 

शेयर मंथनः पिरामल हेल्थकेयर ने लाभांश (dividend) देने के बजाय शेयर वापस खरीदने (बायबैक) का प्रस्ताव दिया है। इस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

जगन्नादम तुनुगुंतलाः यह एक सही सोच है क्योंकि डिविडेंड देने पर डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स देना पड़ता। इससे कंपनी, प्रमोटर और निवेशक में से किसी का फायदा नहीं होता। बायबैक (buyback) के प्रस्ताव में जो निवेशक अभी बेचना चाहें वे बेच सकते हैं और जो रखना चाहें वे रख सकते हैं। जो कंपनी में निहित मूल्यांकन को देख कर लंबे समय तक यह शेयर रखना चाहें उनको भी फायदा है और जो तुरंत बेच कर नकदी पाना चाहते हैं उनको भी फायदा है। बायबैक में कर का बोझ भी नहीं है। यह काफी सोच-समझ कर निवेशकों के हित में किया गया फैसला है।
शेयर मंथनः लेकिन जो निवेशक अपने शेयर बायबैक में नहीं देना चाहते हों, उन्हें तो कोई फायदा नहीं मिलेगा?

जगन्नादम तुनुगुंतलाः उन्हें फायदा नहीं मिलेगा। लेकिन अगर वे लंबी अवधि तक इस शेयर में रुकना चाहते हैं तो इसका मतलब यह है कि वे कंपनी में निहित मूल्य (value) देख रहे हैं। अगर कोई निवेशक कंपनी से नहीं निकलना चाहता तो यह उसका फैसला है। लेकिन यह कदम निवेशक-विरोधी नहीं है।
शेयर मंथनः लेकिन अगर कंपनी डिविडेंड देती तो सभी निवेशकों को इसका फायदा मिलता, फिर चाहे वह छोटी अवधि का निवेशक हो या लंबी अवधि का ?

जगन्नादम तुनुगुंतलाः इसमें दो पहलू है। इस बायबैक में निवेशक अपने केवल 20% शेयर दे सकते हैं। अगर आपके पास 100 शेयर हैं, तो आप केवल 20% शेयर बायबैक में दे सकते हैं, बाकी 80% शेयर आपके पास रहेंगे। ये 80% शेयर आप लंबी अवधि के लिए अपने पास रख सकते हैं। अगर आपको तुरंत पैसा चाहिए तो आप बायबैक में भी बेच सकते हैं और बाजार में भी बेच सकते हैं। डिविडेंड देने पर कुछ पैसा सिस्टम से बाहर निकल जाता, सरकार के पास चला जाता जिसमें किसी को फायदा नहीं मिलता। इसलिए बायबैक का फैसला सही है।
शेयर मंथनः कंपनी ने बायबैक में 20% की सीमा रखी है, लेकिन हर निवेशक तो इसमें भाग नहीं लेगा? इसलिए क्या इससे प्रमोटर हिस्सेदारी घट सकती है?
जगन्नादम तुनुगुंतलाः पहली बात तो यह है कि निवेशक बायबैक में हिस्सा लेते हैं या नहीं, यह उनका अपना फैसला है। प्रमोटर हिस्सेदारी इस बात पर निर्भर करेगी कि बायबैक कितना होता है। ऐसा लगता है कि कंपनी ने दूसरे निवेशकों को फायदा देने के लिए यह प्रस्ताव रखा है। कुछ निवेशकों का नजरिया है कि 600 रुपये के भाव ज्यादा आकर्षक नहीं है। दरअसल 600 रुपये प्रति शेयर के भाव पर कंपनी का मूल्यांकन 12,000 करोड़ रुपये होता है, क्योंकि कंपनी के लगभग 20 करोड़ शेयर हैं। वहीं कंपनी ने हाल ही में अपने कारोबार का एक हिस्सा 16,000 करोड़ रुपये में बेचा है। इसलिए एक नजरिया यह है कि 12,000 करोड़ रुपये का मूल्यांकन रख कर 600 रुपये प्रति शेयर का जो भाव रखा गया है, वह आकर्षक नहीं है। इसलिए कुछ निवेशक इस बायबैक में हिस्सेदारी नहीं करेंगे।
शेयर मंथनः  कंपनी के प्रमोटर क्या अपनी हिस्सेदारी के 20% शेयर इस बायबैक में देने वाले हैं, आपको क्या लगता है?

जगन्नादम तुनुगुंतलाः नहीं, इसकी संभावना काफी कम है क्योंकि प्रमोटरों के पास कंपनी की केवल 52% हिस्सेदारी है। अमूमन भारतीय प्रमोटर कंपनी में अपनी हिस्सेदारी 50% से कम नहीं होने देना चाहते। इसलिए प्रमोटरों का रुख काफी हद तक बाकी निवेशकों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। वैसे कंपनी ने अपने कारोबार का एक हिस्सा बेचते समय भी कहा था कि उनका इस कारोबार से या इस कंपनी से बाहर निकलने का कोई इरादा नहीं है। चूँकि उन्हें उस कारोबार के लिए अच्छी कीमत मिल रही थी इसलिए वह कारोबार बेचने का फैसला किया गया था। शायद पिरामल परिवार की हिस्सेदारी 50% से ऊपर ही बनाये रखने की वे कोशिश करेंगे।
शेयर मंथनः  अगर प्रमोटर इस बायबैक में अपने शेयर नहीं देते और दूसरे निवेशकों के लिए 20% सीमा रहेगी, तो क्या यह मानें कि पूरा बायबैक नहीं होगा?
जगन्नादम तुनुगुंतलाः कंपनी ने बायबैक का आकार करीब 2500 करोड़ रुपये रखा है। अगर इसमें प्रमोटर परिवार बिल्कुल हिस्सेदारी नहीं करे, तो शायद केवल 1200-1300 करोड़ रुपये के शेयर ही वापस खरीदे जा सकेंगे। इसलिए तब वे फैसला करेंगे कि बाकी का क्या करना है।
इस मामले में एक और दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें टेंडर का रास्ता चुना गया। आम तौर पर आज कर खुले बाजार से शेयर वापस खरीदने का रास्ता चुना जा रहा है। इसमें कंपनी जब भी चाहे और जितना चाहे उतना खुले बाजार से खरीद सकती है। लेकिन इस मामले में 20% आनुपातिक (प्रोपोर्शनेट) टेंडर का रास्ता रूट चुना गया। ये एक नयी धारणा है। जो व्यक्ति अपने पूरे शेयर बेचना चाहता हो, और जो व्यक्ति बिल्कुल ही नहीं बेचना चाहता हो, दोनों ही टेंडर के इस रास्ते में नाखुश रहेंगे। खुले बाजार वाले तरीके में आप तुरंत बेच कर पैसे निकाल सकते हैं। लेकिन खुले बाजार वाले तरीके में 1 साल लग जाता है, जबकि टेंडर में 3 महीने में बायबैक पूरा हो जायेगा। शायद इसीलिए टेंडर का रास्ता चुना गया होगा।
शेयर मंथनः  आपकी सलाह क्या है, पिरामल हेल्थ के शेयरधारक इस बायबैक में अपने शेयर दें या रखे रहें?
जगन्नादम तुनुगुंतलाः आर्बिट्राज के हिसाब से देखें तो अब उतना आर्बिट्राज बचा नहीं है। आज की तारीख में अगर करीब 50,000 रुपये का निवेश करके आप इसके 100 शेयर खरीदते हैं, तो आप उसमें से केवल 20 शेयर बायबैक में टेंडर कर सकते हैं। मतलब इस बायबैक से आपको 20 शेयर पर 600 रुपये के हिसाब से 12,000 रुपये मिलेंगे। लेकिन बाकी 38,000 रुपये आपको बचे हुए 80 शेयरों से निकालने पड़ेंगे। इसका औसत बनता है 480-490 रुपये के आसपास का। इसलिए अब आर्बिट्राज के लिए उतना आकर्षक अवसर अब बाकी नहीं बचा है। इसीलिए जब यह घोषणा हुई तो यह शेयर 5% गिर गया। (शेयर मंथन, 25 अक्टूबर 2010)

Last Updated ( Monday, 25 October 2010 15:50 )
 

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