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जीटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (GTL Infrastructure Ltd) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications) के टावर कारोबार को अपने में मिलाने के समझौते को रद्द कर दिया।
कंपनी के निदेशक मंडल की 06 सितंबर 2010 को बैठक हुई। इसमें कंपनी की ओर से कहा गया कि रिलायंस इन्फ्राटेल (Reliance Infratel) के टावर कारोबार को कंपनी के साथ विलय करने से संबंधित पूर्व में किए गये करार को संबंधित औपचारिकताओं के पूरा न किए जाने की वजह से निर्धारत कार्यक्रम के अनुसार पूरा नहीं किया जा सकेगा। कंपनी की रिलायंस कम्युनिकेशंस की 95% हिस्सेदारी वाली कंपनी रिलायंस इन्फ्राटेल के 50,000 टावर विलय करने की योजना थी। 27 जून 2010 को रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस इन्फ्राटेल और जीटीएल इन्फ्रा के निदेशक मंडलों ने इस समझौते को स्वीकार कर लिया था। समझौते के बाद जारी एक बयान में रिलायंस कम्युनिकेशंस ने कहा था कि नकदी की मात्रा और शेयरों की अदला-बदली का अनुपात (शेयर-स्वैप रेश्यो) का निर्धारण स्वतंत्र सलाहकारों की मदद से किया जायेगा। दावा किया जा रहा है कि प्रस्तावित विलय के बाद 50,000 करोड़ रुपये के मूल्यांकन वाली कंपनी अस्तित्व में आयेगी, जिसके पास कुल 80,000 टावर होंगे। इन टावरों से न केवल रिलायंस कम्युनिकेशंस, बल्कि एयरसेल, एसटेल, वोडाफोन, टीटीएसएल, यूनिनॉर, एमटीएस, वीडियोकॉन और एतिसलात के ग्राहकों को सेवाएँ दी जायेंगी। गौरतलब है कि मनोज तिरोडकर के ग्लोबल ग्रुप की कंपनी जीटीएल इन्फ्रा के पास पहले से 30,000 टावर हैं। भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध एकमात्र टावर कंपनी जीटीइन्फ्रा ने इसी साल जनवरी में एयरसेल से 17,000 टावर खरीदे थे। शेयर बाजार में आज के कारोबार में जीटीएल इन्फ्रा के शेयर में कमजोरी का रुख है। इस खबर के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में कंपनी का शेयर 42.35 रुपये तक नीचे चला गया। हालाँकि अब इसकी गिरावट में कमी आयी है और बीएसई में सुबह 10:45 बजे यह 3.21% की कमजोरी के साथ 43.75 रुपये पर है। (शेयर मंथन, 06 सितंबर 2010) |
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Last Updated ( Monday, 06 September 2010 11:06 )
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