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पद्म सम्मानों की फेहरिश्त में अपना नाम न देख कर हैरान होने वाले लोगों की सूची में उद्योगपति और सांसद राजीव चंद्रशेखर भी हैं।
उन्हें जितनी हैरानी अपना नाम मंजूर नहीं होने पर है, उतनी ही हैरानी इस सूची में शामिल एक और उद्योगपति के नाम पर भी है। राजीव चंद्रशेखर ने एक सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर गयी निजी टिप्पणियों में खुलासा किया है कि टेलीकॉम क्षेत्र में किये गये योगदान के लिए कर्णाटक सरकार ने उनका नाम पद्मभूषण सम्मान के लिए प्रस्तावित किया था। राजीव का मानना है कि प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने सांसद होने के कारण उनके नाम को मंजूरी नहीं दी। लेकिन इस पर राजीव व्यंग्य में कहते हैं कि मेरा देश मुझे मान्यता दे, इसके लिए शायद मुझे एक सांसद के रूप में सार्वजनिक सेवा को चुनने के बदले न्यूयॉर्क में रेस्टोरेंट चलाना चाहिए था। उनकी यह चुटकी सीधे तौर पर अनिवासी भारतीय (एनआरआई) उद्योगपति संत सिंह चटवाल की ओर इशारा करती है। सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर राजीव चंद्रशेखर की इस टिप्पणी पर उन्हें अपने मित्रों की ओर से कई चटख जवाब भी मिले हैं। उनके एक मित्र तो सुझाव देते हैं कि अगर उन पर "एक-दो सीबीआई मामले और बैंकों के साथ धोखाधड़ी के आरोप" भी रहे होते तो शायद उनके लिए पद्म सम्मान पाना आसान हो जाता। हालाँकि इस पर राजीव चंद्रशेखर की जवाबी चुटकी यही रही कि पद्म सम्मान पाने के लिए इतना सारा बखेरा कुछ ज्यादा होता! हालाँकि राजीव चंद्रशेखर का कहना है कि अब उनके लिए यह अपने नाम का मसला नहीं रह गया है। अब उनकी कोशिश यह होगी कि पद्म सम्मान अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा करें - विशिष्ट सेवाओं और उपलब्धियों को मान्यता देने का काम करें, न कि इस बात से तय हों कि कौन किसका दोस्त है। लेकिन इस सोशल नेटवर्किंग साइट पर राजीव चंद्रशेखर के कुछ मित्रों ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या यह मान्यता ही योगदान का पुरस्कार है? क्या (अपने योगदान से मिलने वाली) संतुष्टि काफी नहीं है? उनके एक अन्य मित्र की टिप्पणी है कि प्रशासन की सबसे शीर्ष संस्था (संसद) और उसके सदस्यों (सांसदों) से संभवतः यह उम्मीद रहती है कि वे दूसरे हर किसी को देश के विकास में योगदान के लिए प्रोत्साहित-प्रेरित करेंगे और उन्हें मान्यता देंगे। लेकिन राजीव चंद्रशेखर इस बात से सहमत नहीं हैं कि सांसद होना पद्म सम्मान पाने के लिए किसी को अयोग्य बनाता है। वे खास तौर पर इस बात का हवाला देते हैं कि प्रधानमंत्री अपने भाषणों में बार-बार अच्छे लोगों को राजनीति में लाने की बात करते हैं। राजीव चंद्रशेखर और उनके मित्रों के बीच चले इस पूरे संवाद में भविष्य की महत्वाकांक्षाओं की एक झलक भी मिलती है। उनके एक मित्र की टिप्पणी है, "हमने जो काम शुरू किया है उसे अगर पूरा कर सकें, तो कौन जाने, आप ही (राजीव चंद्रशेखर) एक दिन पद्म सम्मान देंगे।" इस पर एक और मित्र का जवाब है, "मुझे इसमें ध्वनित बात पसंद है: आरसी पीएम पद के लिए।" इनमें से पहले मित्र की टिप्पणी पर राजीव का जवाब है, "हमें वही करना चाहिए जो हम कर रहे हैं। सही काम करने की प्रेरणा इस बात से नहीं है कि मान्यता मिलेगी या नहीं।" और दूसरे मित्र को उनका जवाब है, "यह अचंभित करने वाली और बहुत बहुत दूर की बात है।" तो क्या राजीव चंद्रशेखर की बहुत दूर की योजनाओं में यह बात भी शामिल है! राजीव जी, उससे पहले अगर कोई राजनीतिक दल शुरू करने की योजना हो तो उसका ऐलान किसी रैली में करेंगे या सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर? (शेयर मंथन, 31 जनवरी 2010) |