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Written by शेयर मंथन
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Wednesday, 03 February 2010 16:45 |
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किरीट पारिख समिति ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की सिफारिश की है।
समिति ने रसोई गैस (एलपीजी) के सिलिंडर की कीमत 100 रुपये बढ़ाने की सलाह दी है। साथ ही, इसने जन-वितरण प्रणाली (पीडीएस) के लिए केरोसिन की कीमत 6 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने की सिफारिश की है। इस समय तेल मार्केटिंग कंपनियों को खुदरा बिक्री में पेट्रोल पर 3 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है। आज इस समिति के अध्यक्ष किरीट पारिख ने पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा को अपनी रिपोर्ट सौंपी। माना जा रहा था कि समिति पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रण से मुक्त करने की सिफारिश करेगी। लेकिन इससे एक कदम आगे जा कर इस समिति ने डीजल की कीमतों को भी नियंत्रण-मुक्त करने सिफारिश की है। पेट्रोल की कीमत को रिफाइनरी और खुदरा बिक्री, दोनों स्तरों पर नियंत्रण-मुक्त करने की सलाह दी गयी है। डीजल की केवल खुदरा बिक्री को नियंत्रण-मुक्त करने के लिए कहा गया है। पेट्रोल की कीमत पर अपनी सलाह देते समय समिति ने तर्क दिया है कि पेट्रोल की खपत करने वाले वर्ग में सबसे कमजोर तबका मोटरसाइकिल चलाने वालों का माना जा सकता है, लेकिन उस वर्ग पर भी कीमतें नियंत्रण मुक्त करने से होने वाला असर उसकी जेब पर ज्यादा भारी नहीं होगा। वहीं डीजल की कीमतों को नियंत्रण मुक्त करने की सिफारिश देते हुए समिति ने कहा है कि किसानों पर अगर डीजल की कीमतें बढ़ने से बोझ पड़ेगा, तो साथ ही सरकार की ओर से तय होने वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) भी बढ़ेगा, क्योंकि एमएसपी तय करते समय डीजल की लागत देखी जाती है। समिति का कहना है कि डीजल की कीमतें बढ़ने से अर्थव्यवस्था पर बोझ तो पड़ेगा, लेकिन दूसरी ओर कीमत नहीं बढ़ाने पर भी अर्थव्यवस्था पर कई बुरे असर होंगे। इससे सरकारी खजाने का घाटा तो बढ़ेगा ही, साथ ही अंतरराष्ट्रीय ऋण बाजार में भारत की रेटिंग पर असर पड़ सकता है, जिससे भारत के लिए कर्ज जुटाना महँगा हो जायेगा। इस तरह अर्थव्यवस्था को इसका बोझ किसी-न-किसी रूप में उठाना ही होगा। लेकिन साथ ही समिति ने यह भी कहा है कि डीजल की कीमतों को प्रति व्यक्ति आय से जोड़ना चाहिए। केरोसिन कीमत बढ़ाने की सलाह के साथ-साथ समिति का कहना है कि इसकी कीमत को ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति आय से जोड़ना चाहिए। साथ ही यह सुझाव है कि केरोसिन पर सब्सिडी को स्मार्ट कार्ड या यूआईडी के माध्यम से दिया जाये, जिससे यह केवल जरूरतमंदों को मिले। समिति ने कहा है कि पीडीएस में दिया जाने वाले 35% केरोसिन का इस्तेमाल वास्तव में डीजल में मिलावट के लिए होता है। रसोई गैस (एलपीजी) के बारे में समिति का मानना है कि इस पर सरकारी सहायता (सब्सिडी) काफी ऊँची है। रसोई गैस सिलिंडर के वितरण की व्यवस्था सुधारने का भी सुझाव दिया गया है। (शेयर मंथन, 03 फरवरी 2010) |
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Last Updated ( Wednesday, 03 February 2010 16:47 )
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