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यूरोपीय बैंकों के स्ट्रेस टेस्ट (दबाव परीक्षा यानी दबाव झेलने की क्षमता की जाँच) के नतीजे अनुमानों से बेहतर रहे हैं, लेकिन खुद इस जाँच की पद्धति पर सवाल खड़े हो गये हैं।
कमेटी ऑफ यूरोपियन बैंकिंग सुपरवाइजर्स ने शुक्रवार को यूरोपीय बैंकों की दबाव परीक्षण (स्ट्रेस टेस्ट) के नतीजे सामने रखे, जिनके मुताबिक 91 बैंकों में से केवल 7 बैंक ही इस परीक्षा में असफल रहे। इससे पहले गोल्डमैन सैक्स की ओर से एक सर्वेक्षण के मुताबिक 10 बैंकों के असफल होने का अनुमान लगाया जा रहा था। जो 7 यूरोपीय बैंक इस परीक्षण में असफल रहे, उनके बारे में कहा गया है कि फिर से मंदी की स्थिति आने पर न्यूनतम 6% टियर-1 पूँजी के पैमाने पर इन बैंकों की पूँजी कुल 3.5 अरब यूरो (4.5 अरब डॉलर) कम पड़ जायेगी। जो 7 बैंक इस परीक्षण में असफल रहे, उनमें से 5 बैंक स्पेन के, 1 बैंक ग्रीस का और 1 बैंक जर्मनी का है। यूरोप की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से ब्रिटेन और फ्रांस के सभी बैंक इसमें सफल रहे। जर्मनी में भी हाइपो रियल एस्टेट होल्डिंग को छोड़ कर बाकी 13 बैंक इसमें सफल रहे। इस दबाव परीक्षण में यूरोपीय बैंकिंग नियामकों (रेगुलेटरों) ने यह जाँचा कि विभिन्न तरह की विपरीत स्थितियाँ आने पर ये बैंक न्यूनतम आवश्यक पूँजी (मिनिमम कैपिटल रिक्वायरमेंट) के मामले में कितने पीछे रह जायेंगे। यह परीक्षण इस बात को देखने के लिए किया गया कि अगर फिर से आर्थिक संकट गहराता है तो ये बैंक उस स्थिति को झेलने में कितने सक्षम रहेंगे। लेकिन इस परीक्षण की पद्धति को लेकर विशेषज्ञ कुछ सवाल भी उठा रहे हैं। इस परीक्षण में केवल ऐसे सरकारी कर्जों में घाटे की संभावना को ही देखा गया, जिन्हें बैंकों ने अपने ट्रेडिंग बुक में रखा हो। बैंकों ने जिन सरकारी बांडों को उनकी पूरी अवधि तक के लिए अपने पास निवेश के रूप में रखा हो, उनमें रकम डूबने (डिफॉल्ट) की संभावना को इस परीक्षण से बाहर रखा गया। इसके चलते बाजार में यह धारणा बन रही है कि बैंकों के पास मौजूद ज्यादातर सरकारी बांडों को इस परीक्षण के दायरे से बाहर रख कर परीक्षण को बेहद हल्का बना दिया गया। (शेयर मंथन, 24 जुलाई 2010) |