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लोगों को आयकर (इन्कम टैक्स) में बड़ी राहत देने और आयकर कानूनों में बुनियादी बदलाव लाने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी यानी डायरेक्ट टैक्स कोड) को मंजूरी दे दी है।
नये आयकर कानून के तहत 2 लाख रुपये तक की आमदनी को करमुक्त करने का प्रस्ताव है। वहीं 10% आयकर अब 2 लाख से 5 लाख रुपये तक की आमदनी पर लागू होगा। इसके बाद 5 लाख से 10 लाख रुपये तक की आमदनी पर 20% और इससे अधिक आमदनी पर 30% आयकर लगाया जायेगा। महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए करमुक्त आमदनी की सीमा अब 2.5 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। नये आयकर कानून के सबसे पहले मसौदे (ड्राफ्ट) में 1.6 लाख रुपये तक की आय को करमुक्त रखने, 1.6 लाख से 10 लाख रुपये तक की आय पर 10%, 10 लाख से 25 लाख रुपये तक की आय पर 20% और इससे अधिक आय पर 30% आयकर लगाने का प्रस्ताव रखा गया था। डीटीसी के पहले मसौदे (ड्राफ्ट) में शामिल ऐसे कई प्रस्तावों को बदल दिया गया है, जिन पर लोगों ने काफी आपत्तियाँ जतायी थीं। मसलन, सरकारी प्रॉविडेंट फंड (जीपीएफ), पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) और मान्यताप्राप्त प्रॉविडेंट फंड (आरपीएफ) को एक्जेंप्ट-एक्जेंप्ट-एक्जेंप्ट (ईईई) श्रेणी में ही रखा जायेगा। इसका मतलब यह है कि इनमें जमा होने वाले पैसे पर तो कर माफ रहेगा ही, अंतिम भुगतान के समय भी यह ब्याज समेत करमुक्त रहेगा। डीटीसी के दूसरे मसौदे में यह साफ कर दिया गया था कि घर कर्ज (हाउसिंग लोन) के 1.5 लाख रुपये तक के सालाना ब्याज भुगतान पर मिलने वाली आयकर छूट जारी रहेगी। इस नये कानून को मंजूरी देने का फैसला केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार 26 अगस्त की शाम को किया। इसे सोमवार को राज्य-सभा में पेश किया जायेगा। इस विधेयक पर संसद की मंजूरी मिलने के बाद 1861 में बने मौजूदा आयकर कानून को रद्द कर इस नये कानून को लागू किया जायेगा। (शेयर मंथन, 27 अगस्त 2010) |