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मंत्रिमंडल की ओर से मंजूर प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी यानी डायरेक्ट टैक्स कोड) में कॉर्पोरेट कर यानी कंपनियों पर लगने वाले आयकर को 30% ही रखा गया है।
इससे पहले पेश किये गये मसौदे में कॉर्पोरेट कर को घटा कर 25% करने का प्रस्ताव था। हालाँकि कंपनियों को मैट (मिनिमम ऐल्टरनेट टैक्स) में कुछ राहत दी गयी है। वहीं कैपिटल गेन टैक्स के प्रावधानों में बदलाव नहीं करने का फैसला किया गया है, जिसका मतलब यह है कि लंबी अवधि (1 साल से अधिक) का कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगाया जायेगा। अगस्त में जारी पिछले मसौदे में मैट को सकल संपत्तियों (ग्रॉस एसेट्स) पर लगाने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसका उद्योग जगत ने काफी विरोध किया था। अब फैसला किया गया है कि बुक प्रॉफिट पर मैट लगाने का नियम जारी रखा जायेगा। हालाँकि मैट की दर को 18% से बढ़ा कर 20% कर दिया जायेगा। कॉर्पोरेट कर और मैट पर लागू उपकर (सेस) के बारे में अभी स्थिति साफ नहीं है, क्योंकि सरकार ने डीटीसी में प्रस्तावित दरों की औपचारिक घोषणा नहीं की है। सरचार्ज और सेस को मिला कर कॉर्पोरेट कर की मौजूदा दर 33.99% बैठती है, जबकि सेस समेत मैट की मौजूदा दर 19.93% है। अगर डीटीसी में सेस हटा लिया जाता है, तो कंपनियों को कॉर्पोरेट टैक्स में कुछ राहत मिल जायेगी, जबकि मैट की दर लगभग उतनी ही रह जायेगी। वास्तविक स्थिति सोमवार को साफ होगी, जब यह विधेयक संसद में रखा जायेगा। (शेयर मंथन, 27 अगस्त 2010) |
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Last Updated ( Friday, 27 August 2010 08:10 )
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