उपचुनाव के संदेश और शेयर बाजार की गिरावट

राजीव रंजन झा : शेयर बाजार की कहानी भी पल में तोला पल में माशा होती है। कल जहाँ बाजार परकटे पंछी की तरह गिर रहा था, वहीं आज सुबह इसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के अच्छे संकेतों के चलते फिर से हरियाली के दर्शन हो रहे हैं।

लेकिन अभी यह देखना होगा कि शुरुआती हरियाली कितनी टिकती है। यहाँ ध्यान रखना चाहिए कि सेंसेक्स 8 सितंबर को बने अपने उच्चतम स्तर 27,355 से कल की तलहटी 26,464 तक लगभग 900 अंक गिर चुका है। ऐसे में थोड़ा-बहुत सँभलने की कोशिश अच्छे वैश्विक संकेतों के बिना भी हो सकती थी। तकनीकी लिहाज से अगर हम 8 अगस्त की तलहटी 25,233 से 27,355 तक की उछाल की वापसी के स्तरों को देखें, तो 38.2% वापसी के स्तर 26,544 को कल तोड़ने के बाद आज सुबह यह इसके ऊपर लौटा है। यहाँ नजर रखनी होगी कि सेंसेक्स इस स्तर के ऊपर टिका रह पाता है या नहीं। अगर यह इसके ऊपर टिका भी रहा, तो 20 दिनों के सिंपल मूविंग एवरेज (एसएमए) के स्तर (कल 26,787) पर इसके लिए बाधा होगी।

इस हफ्ते की शुरुआत में मैंने आशंका जतायी थी कि क्या वाकई सेंसेक्स 26,000 की ओर फिसल जायेगा। बाजार में आयी ताजा फिसलन के लिए बाजार को कई बहाने मिल गये। पहले तो औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) के कमजोर आँकड़ों ने सोमवार को कमजोरी के लिए रास्ता साफ किया। साथ में अमेरिकी बाजारों की कमजोरी भी थी। अमेरिकी बाजारों की कमजोरी ने कल मंगलवार को भी सुस्त शुरुआत दी और दोपहर में यूरोपीय बाजारों ने भी कोई राहत नहीं दी। वे भी गिरावट के साथ खुल कर कमजोर ही चलते रहे। जो रही-सही कसर थी, वह संसद और विधानसभाओं के उपचुनावों के नतीजों ने पूरी कर दी। उपचुनावों में अक्सर रुझान पिछले चुनाव से अलग हो जाते हैं, पर शायद ही किसी ने सोचा होगा कि लोकसभा चुनावों में तूफानी कामयाबी के बाद इन उपचुनावों में भाजपा इतना कमजोर प्रदर्शन करेगी। 

हालाँकि मुझे नहीं लगता कि ये उपचुनाव मोदी लहर के खात्मे की घोषणा करते हैं। इन उपचुनावों में मोदी कोई मुद्दा ही नहीं थे। यहाँ तक इन चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोई सहभागिता भी नहीं थी। उन्होंने कोई सार्वजनिक सभा वगैरह तो नहीं ही की, और पार्टी संगठन के स्तर पर भी रणनीति बनाने या अभियान की निगरानी वगैरह में शायद ही उनकी कोई भूमिका रही हो। मुझे तो सुनने-पढ़ने को नहीं मिला कि मोदी ने उपचुनावों की तैयारी के सिलसिले में पार्टी में अंदुरूनी स्तर पर भी एक बैठक तक की हो। 

एक और पहलू है, जिसकी चर्चा मीडिया में नहीं है। इन उपचुनावों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का संगठन तंत्र भी सक्रिय नहीं हुआ। एक तरह से यह चुनाव भाजपा के स्थानीय नेताओं के भरोसे छोड़ दिया गया। नरेंद्र मोदी और संघ का इन उपचुनावों से दूर रहना रणनीतिक भी हो सकता है। लेकिन शायद भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर भी इन्हें बड़े हल्के में लिया। हो सकता है कि लोकसभा में मिली सफलता के बाद भाजपा नेताओं को यह गुमान रहा हो कि सफलता अपने-आप चरण चूमेगी। अब गुमान टूटा होगा, और यह भविष्य में उन्हें सचेत करेगा।

उत्तर प्रदेश और राजस्थान ये दोनों ऐसे प्रदेश रहे हैं, जहाँ लोकसभा चुनाव में भाजपा को आशातीत सफलता मिली थी, उसकी अपनी उम्मीदों से भी ज्यादा। लेकिन इन दोनों राज्यों में भाजपा उपचुनावों में फिसड्डी बन गयी। जहाँ राजस्थान के नतीजे वसुंधरा राजे सरकार के अब तक के कामकाज की समीक्षा की जरूरत दर्शाते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के बारे में भाजपा को अपनी पूरी रणनीति पर दोबारा विचार करना होगा। 

जहाँ तक शेयर बाजार में इन उपचुनावों के नतीजों के चलते घबराहट की बात है, वह एक-दो दिनों से ज्यादा नहीं चलेगी। पर हाँ, लंबे समय से प्रतीक्षित नरमी के लिए बाजार ने इसे एक बहाना जरूर बना लिया है। जब एक बार यह नरमी शुरू हो गयी है तो कहाँ तक जा सकती है, इस पर निगाह डालते हैं। 

इस सोमवार के लेख में मैंने जिक्र किया था कि “एक बड़ा सहारा होगा सोमवार 1 सितंबर 2014 को बने ऊपरी अंतराल (गैप) के दायरे पर। यह दायरा सेंसेक्स के लिए 26,674-26,732 का और निफ्टी के लिए 7,968-7,984 का है। जब तक सेंसेक्स-निफ्टी इन स्तरों के नीचे न फिसलें, तब तक बहुत ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए। लेकिन इनके भी नीचे चले जाने पर तो यह आशंका मजबूत हो जायेगी कि क्या वे फिर से इस पट्टी की निचली रेखा को छूने की ओर बढ़ रहे हैं?”

कल सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने अपने ये सहारे बड़े अंतर से तोड़ दिये हैं। इसलिए अब यह स्वाभाविक लगता है कि ये अपनी पट्टी की निचली रेखा को छूने की ओर बढ़ें। सेंसेक्स की पट्टी में यह निचली रेखा आने वाले दिनों में लगभग 26,000 के पास होगी। साथ ही ध्यान दें कि सेंसेक्स ने अपने 10 और 20 दिनों के सिंपल मूविंग एवरेज (एसएमए) को तोड़ दिया है। ऐसे में 50 एसएमए की ओर बढ़ना स्वाभाविक हो सकता है, जो अभी 26,160 पर है और हर दिन थोड़ा ऊपर जा रहा है। इस तरह सेंसेक्स अगले कुछ दिनों में मोटे तौर पर 26,000-26,200 के दायरे को छू ले तो इसमें आश्चर्य नहीं होगा। 

सेंसेक्स के ताजा शिखर 27,355 से कल की तलहटी 26,464 तक की गिरावट की वापसी की संरचना के आधार पर भी नीचे की ओर 50% वापसी के स्तर 26,294 और फिर 61.8% वापसी के स्तर 26,044 को अगले पड़ावों के तौर पर देखा जा सकता है। कुल मिला कर कहानी यही है कि 26,000 की ओर फिसलने की संभावना ज्यादा दिख रही है। Rajeev Ranjan Jha

(शेयर मंथन, 17 सितंबर 2014)

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