सोने और चाँदी की हालिया चाल ने निवेशकों के बीच नई उलझन पैदा कर दी है। चाँदी की चाल को लेकर भी बहुत ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया गया।
पूरी दुनिया इस समय इस सवाल से जूझ रही है कि आने वाले समय में वैश्विक ग्रोथ कितनी मजबूत रहेगी। अगर ग्लोबल जीडीपी ग्रोथ 3% के आसपास कमजोर रहती है, तो निवेश और रिजर्व मैनेजमेंट दोनों पर असर पड़ेगा। ऐसे माहौल में सेंट्रल बैंक और बड़े निवेशक अतिरिक्त पैसा अर्थव्यवस्था में लगाएं या सोने में, इसे लेकर असमंजस में हैं। यही वजह है कि सोना फिलहाल निर्णायक तेजी नहीं दिखा पा रहा।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि चाँदी की चाल को लेकर भी बहुत ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया गया। विश्लेषकों के अनुसार चांदी भी फिलहाल एक शॉर्ट टर्म टॉप के आसपास दिखाई दे रही है। 83 डॉलर के स्तर को बेहद अहम माना गया है और कहा गया कि फिलहाल इसी स्तर पर नजर बनाए रखने की जरूरत है। उनका मानना है कि चांदी में भी तेजी थोड़ी थकी हुई दिखाई दे रही है। निवेश रणनीति पर विशेषज्ञों ने सलाह दी कि जिन निवेशकों ने हाल की गिरावट के बाद सोना-चांदी में खरीदारी की थी और अब मुनाफे में हैं, उन्हें थोड़ा सतर्क हो जाना चाहिए। उनका सुझाव था कि कुल पोर्टफोलियो में गोल्ड और सिल्वर का आवंटन 7-10% के आसपास ही रखना बेहतर रहेगा। अगर किसी ने अवसरवादी तरीके से ज्यादा निवेश किया है, तो कुछ मुनाफावसूली करके पोर्टफोलियो को हल्का करना समझदारी हो सकती है।
बाजार विश्लेषक ने यह कोई सीधी खरीद-बिक्री की सलाह नहीं है। इस तरह की चर्चाओं का उद्देश्य निवेशकों को सोचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु देना है, ताकि वे अपनी समझ, जोखिम क्षमता और निवेश रणनीति के हिसाब से अंतिम फैसला ले सकें।
(शेयर मंथन, 29 अप्रैल 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)