भारतीय शेयर बाजार इस समय बेहद अस्थिर दौर से गुजर रहा है। कभी बाजार में जोरदार तेजी दिखती है तो अगले ही दिन भारी गिरावट आ जाती है।
बाजार विशेषज्ञ सुनील सुब्रमण्यम का कहना है कि इस उतार-चढ़ाव के पीछे सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों (FII), घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और रिटेल निवेशकों की बदलती रणनीति है। हाल के हफ्तों में एफआईआई की बिकवाली धीरे-धीरे कम हो रही थी और बाजार में यह संकेत मिल रहा था कि भारत के वैल्यूएशन आकर्षक स्तरों पर पहुंच रहे हैं। लेकिन अचानक जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतें 95 डॉलर से बढ़कर 105-110 डॉलर तक पहुंचने से एफआईआई फिर से घबरा गए और उन्होंने भारी बिकवाली शुरू कर दी।
विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल दो दिनों में विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये की बिकवाली कर दी, जिसका असर पूरे बाजार पर देखने को मिला। जैसे ही एफआईआई सतर्क हुए, रिटेल निवेशकों और हाई नेटवर्थ निवेशकों (HNI) ने भी मुनाफावसूली शुरू कर दी। इसका असर एडवांस-डिक्लाइन रेशियो में साफ दिखा, जहां हफ्ते की शुरुआत में तेजी वाले शेयरों की संख्या ज्यादा थी, लेकिन अंत तक गिरावट वाले शेयर हावी हो गए। यह संकेत देता है कि बाजार में डर और अनिश्चितता काफी बढ़ चुकी है।
दूसरी ओर, डीआईआई यानी घरेलू संस्थागत निवेशकों की रणनीति थोड़ी अलग रही। उन्होंने शुरुआती दौर में बड़ी खरीदारी की, लेकिन बाद में प्रॉफिट बुकिंग करके कैश बढ़ाने पर जोर दिया। इसका कारण आने वाला अर्निंग सीजन है। फंड हाउस और म्यूचुअल फंड फिलहाल नकदी बचाकर रखना चाहते हैं ताकि अच्छे नतीजे देने वाली कंपनियों में निवेश का मौका मिलते ही तेजी से खरीदारी की जा सके। बाजार में “गोला-बारूद” यानी निवेश के लिए पैसा अभी भी मौजूद है, लेकिन निवेशक सही मौके का इंतजार कर रहे हैं।
इस समय बाजार की सबसे बड़ी समस्या यह है कि निवेशकों का मूड बेहद “नर्वस” हो चुका है। किसी बड़ी कंपनी का अच्छा या खराब रिजल्ट पूरे सेक्टर को प्रभावित कर रहा है। उदाहरण के तौर पर, नेस्ले इंडिया के अच्छे नतीजों ने पूरे FMCG सेक्टर में तेजी ला दी, जबकि Infosys के कमजोर संकेतों ने पूरे आईटी सेक्टर को दबाव में ला दिया। इसका मतलब है कि बाजार फिलहाल डर और लालच के बीच तेजी से झूल रहा है।
आगे की दिशा काफी हद तक दो चीजों पर निर्भर करेगी। जियोपॉलिटिकल स्थिति और कंपनियों के नतीजे। अगर वैश्विक तनाव कम होता है और कच्चे तेल की कीमतें नीचे आती हैं, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। वहीं अर्निंग सीजन से यह स्पष्ट होगा कि कंपनियों की भविष्य की ग्रोथ कैसी रहने वाली है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी से बचना चाहिए और हर सेक्टर की कमाई व गाइडेंस को ध्यान से देखकर ही निवेश का फैसला करना चाहिए।
(शेयर मंथन, 01 मई 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)