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शेयर बाजार में सुरक्षित और दमदार रिटर्न की तलाश, कौन से सेक्टर बनेंगे स्टार?

बाजार में बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि ऐसा निवेश कहां किया जाये जहाँ सुरक्षित रिटर्न भी मिले और लंबी अवधि में अच्छी ग्रोथ भी देखने को मिले।

बाजार विशेषज्ञ मयूरेश जोशी का मानना है कि मौजूदा समय में केवल तेज ग्रोथ वाले शेयरों के पीछे भागना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निवेशकों को ऐसे सेक्टर्स पर ध्यान देना चाहिए जहाँ कम उतार-चढ़ाव, मजबूत बैलेंस शीट और टिकाऊ बिजनेस मॉडल मौजूद हों। उनके अनुसार बाजार में कुछ ऐसे सेक्टर्स उभर रहे हैं जो आने वाले वर्षों में स्थिरता के साथ बेहतर रिटर्न दे सकते हैं। मयूरेश जोशी के मुताबिक सबसे मजबूत थीम फिलहाल फार्मा सेक्टर में दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया संकट या कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर फार्मा कंपनियों पर अपेक्षाकृत कम पड़ता है। इसके अलावा बेहतर प्रोडक्ट लॉन्च, मजबूत ऑपरेटिंग एफिशिएंसी और हाई मार्जिन दवाओं के चलते फार्मा कंपनियों की कमाई आने वाले समय में और बेहतर हो सकती है। इसी वजह से फार्मा सेक्टर बाजार में “रिलेटिव स्ट्रेंथ” दिखा रहा है और निवेशकों के लिए डिफेंसिव लेकिन ग्रोथ आधारित विकल्प बनकर उभर रहा है।

दूसरी बड़ी थीम मेटल्स और माइनिंग सेक्टर को लेकर दिखाई दे रही है। उनका मानना है कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी कैपेक्स पर लगातार जोर बना हुआ है, जिसका सीधा फायदा घरेलू मेटल और माइनिंग कंपनियों को मिलेगा। कई कंपनियां बैकवर्ड इंटीग्रेशन, कैप्टिव पावर और मजबूत ऑपरेटिंग एफिशिएंसी के कारण अपने मार्जिन बेहतर करने की स्थिति में हैं। यदि वॉल्यूम ग्रोथ बनी रहती है तो चुनिंदा कंपनियां अगले कुछ वर्षों में 20 से 25 प्रतिशत तक की अर्निंग ग्रोथ देने में सक्षम हो सकती हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग कंपनियों को भी भविष्य की मजबूत थीम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जिन कंपनियों का बिजनेस घरेलू मांग के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कंसल्टेंसी और सर्विस बिजनेस से जुड़ा है, वे डबल डिजिट रेवेन्यू और अर्निंग ग्रोथ जारी रख सकती हैं। इन कंपनियों की खासियत यह है कि इनके बिजनेस में सर्विस कंपोनेंट अधिक होता है, जहां मार्जिन काफी ऊंचे रहते हैं और कर्ज का दबाव अपेक्षाकृत कम होता है। इसी वजह से यह सेक्टर स्थिर रिटर्न देने की क्षमता रखता है।

स्पेशलिटी केमिकल सेक्टर को भी आने वाले समय का “डार्क हॉर्स” बताया जा रहा है। एसआरएफ और नवीन फ्लोरीन इंटरनेशनल जैसी कंपनियों के बेहतर नतीजों ने इस थीम को मजबूती दी है। “चाइना प्लस वन” रणनीति का फायदा भारतीय कंपनियों को लगातार मिलता रहेगा। कई भारतीय केमिकल कंपनियां सही क्षेत्रों में कैपेसिटी एक्सपेंशन कर रही हैं, जिससे आने वाले वर्षों में उनकी कमाई और मार्जिन दोनों मजबूत हो सकते हैं।

(शेयर मंथन, 09 मई 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

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