कृषि कमोडिटी

भारत के एकमात्र निर्यातक होने के कारण बढ़ सकती है जीरे की निर्यात माँग - एसएमसी

पहली तिमाही में फसल कटाई, जो फरवरी-मार्च में शुरू होती है, के बाद भारी आवक के दबाव के कारण जीरे की कीमतें औंधेमुंह लुढ़क गयी।

अगस्त तक दबाव में रहेंगी हल्दी की कीमतें - एसएमसी

पिछले वर्ष हल्दी की कीमतों में 21% की गिरावट हुई और मसालों में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली कमोडिटी रही।

1,100-2,200 रुपये के दायरे में रह सकती हैं इलायची की कीमतें - एसएमसी

इलायची की कीमतों ने 1,100 के स्तर के नजदीक से वर्ष की शुरूआत की और जनवरी में अच्छी-खासी बढ़त दर्ज की।

सरसों को पाम तेल से मिलेगी कड़ी टक्कर - एसएमसी

सामान्य से कम मॉनसून के कारण प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों की मिट्टी में पर्याप्त नमी के अभाव की वजह से फसल वर्ष 2017-18 के दौरान उत्पादन में कमी से सरसों वायदा की कीमतों में 3,727 के निचले स्तर से 4,262 रुपये तक की 14% की अच्छी-खासी बढ़त दर्ज की गयी।

कॉटन में तेजी का रुझान, ग्वारसीड में हो सकती है गिरावट - एसएमसी

एमसीएक्स में कॉटन वायदा (जनवरी) की कीमतों में 20,700 रुपये के स्तर पर सहारे के साथ तेजी का रुझान रहने की संभावना है।

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