डिवीज लैब शेयरों में निवेशकों को कब एंट्री लेनी चाहिए?

अर्जुन मीह जानना चाहते हैं कि उन्हें डिवीज लैब (Divis Labs) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? सवाल यह है कि क्या मौजूदा स्तरों पर री-एंट्री सही रहेगी या अभी और इंतजार करना चाहिए। आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि डिवीज लैब के फंडामेंटल्स पर बात करें तो कंपनी के पास लॉन्ग टर्म में ग्रोथ का स्कोप काफी मजबूत है। हालांकि, सबसे बड़ा जोखिम इसकी प्रीमियम वैल्यूएशन से जुड़ा है। स्टॉक करीब 65 गुना पीई मल्टीपल पर ट्रेड कर रहा है, जो इसे बेहद महंगा बनाता है। ऐसे हाई वैल्यूएशन में सबसे बड़ा खतरा ऑपरेटिंग मार्जिन से जुड़ा होता है। डिवीज़ लैब लगातार 30–33% के ऊंचे मार्जिन बनाए हुए है और पहले यह 40% से ऊपर भी रहा है। लेकिन अगर इन मार्जिन में सिर्फ 1% की भी गिरावट आती है, तो बाजार इस प्रीमियम वैल्यूएशन को आसानी से स्वीकार नहीं करेगा और स्टॉक पर दबाव बढ़ सकता है।

इसके बावजूद, फंडामेंटल तौर पर डिवीज़ लैब एक ऐसा स्टॉक माना जाता है, जिसे एसआईपी स्टाइल में होल्ड किया जा सकता है। रणनीति के तौर पर इसमें एकमुश्त निवेश करने की बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी ज्यादा उपयुक्त मानी जाती है। हर 5% की गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा निवेश करना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है। इस तरह की ‘डोज़-बेस्ड’ रणनीति से लंबे समय में यह स्टॉक निवेशकों को अच्छा रिटर्न देने की क्षमता रखता है, बशर्ते धैर्य रखा जाए। 

निवेशक के लिए यह भी एक सकारात्मक पहलू है कि उन्होंने 6831 रुपये के स्तर पर समय रहते शेयर से बाहर निकलकर अच्छा फैसला लिया, जिससे मौजूदा गिरावट में उनका नुकसान बच गया। अब दोबारा एंट्री के लिए यह जरूरी नहीं है कि स्टॉक 20% और नीचे ही जाए। इसलिए रणनीति यह होनी चाहिए कि गिरावट के दौरान धीरे-धीरे खरीदारी शुरू की जाए, न कि एकदम नीचे का इंतजार किया जाए।

वन-टाइम इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग पोजिशन की बात करें तो स्पष्ट संकेत मिलने तक सावधानी बरतना बेहतर होगा। टेक्निकल रूप से अगर स्टॉक 6500 रुपये के ऊपर मजबूत क्लोजिंग देता है, तो यह संकेत हो सकता है कि नीचे का स्तर बन चुका है। उस स्थिति में लॉन्ग पोजिशन बनाई जा सकती है, जिसमें स्टॉप लॉस हाल के लो के आसपास रखा जाए। तब तक इसे वन-टाइम बाय का कैंडिडेट नहीं माना जा सकता।

डिवीज लैब में दोबारा निवेश की रणनीति धैर्य और अनुशासन पर आधारित होनी चाहिए। चरणबद्ध खरीदारी, एसआईपी अप्रोच और वैल्यूएशन रिस्क को समझते हुए आगे बढ़ना ही इस स्टॉक में सफल निवेश की कुंजी मानी जा सकती है।


(शेयर मंथन, 24 जनवरी 2026)

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