कच्चे तेल में भारी उतार-चढ़ाव, अनुज गुप्ता से जानें युद्ध तनाव से बाजार में आगे क्या होगा?

वैश्विक कमोडिटी बाजार इस समय भारी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें अचानक उछलकर करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, लेकिन बाद में यह फिर गिरकर 91-92 डॉलर के आसपास आ गईं। बाजार विशेषज्ञ अनुज गुप्ता का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और बयानों के कारण बाजार में अचानक ‘रिलीफ रैली’ देखने को मिली। एक बयान से ही इक्विटी, मेटल्स, गोल्ड-सिल्वर और डॉलर इंडेक्स जैसे कई बाजारों की दिशा बदलती नजर आई। हालांकि उनका मानना है कि केवल बयानों के आधार पर स्थायी शांति की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि अगर किसी भी पक्ष से बड़ा हमला होता है तो तनाव फिर तेजी से बढ़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों को फिलहाल सबसे बड़ा सपोर्ट सप्लाई की कमी से मिल रहा है। मध्य-पूर्व में कई तेल उत्पादन क्षेत्रों में गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, जिससे सप्लाई चेन बाधित हो गई है। अगर किसी कारण से तेल पंपिंग स्टेशन बंद हो जाते हैं, तो उन्हें दोबारा शुरू करने में लगभग एक सप्ताह का समय लगता है और उत्पादन सामान्य स्तर पर आने में करीब एक महीना लग सकता है। यही वजह है कि भले ही कुछ सकारात्मक बयान सामने आए हों, लेकिन कच्चे तेल के बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। इस बीच G7 देशों द्वारा अपने रणनीतिक भंडार से तेल उपलब्ध कराने के संकेत से भी बाजार को कुछ राहत मिली है।

ट्रेडिंग के नजरिए से देखें तो मौजूदा माहौल में जोखिम काफी ज्यादा है। एक दिन तेजी के बाद अगले दिन तेज गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे ट्रेडर्स के लिए सही दिशा पकड़ना मुश्किल हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल दो देशों का संघर्ष नहीं है, बल्कि इसमें कई बड़े देश प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं, इसलिए स्थिति को सामान्य होने में समय लग सकता है। ऐसे माहौल में कमोडिटी बाजार खासकर ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।

अनुज गुप्ता के अनुसार अनिश्चितता के दौर में ही बाजार में अवसर भी पैदा होते हैं। कच्चे तेल में सप्लाई टाइट रहने की वजह से निचले स्तरों पर खरीदारी का रुझान देखने को मिल सकता है, जबकि सोना-चांदी में फिलहाल मिश्रित रुख बना रह सकता है। अगर डॉलर इंडेक्स में कमजोरी आती है तो कीमती धातुओं को सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि निवेशकों के लिए सलाह यही है कि वे जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचें और बाजार में गिरावट आने का इंतजार करें, क्योंकि फिलहाल बाजार में साइडवेज और अस्थिर कारोबार देखने को मिल सकता है।


(शेयर मंथन, 13 मार्च 2026)

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