निफ्टी 24,000 से 24,500 पर मजबूत सपोर्ट, क्या यहीं बनेगा अगला बेस

बजट के बाद बाजार में जो तेज़ उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, वह असामान्य नहीं है। ऐसे कई मौके पहले भी आए हैं जब बजट के आसपास 5-6% तक की मूवमेंट देखने को मिली है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि इस बार भी बजट से अस्थायी उम्मीदें बनी थीं, लेकिन बाजार ने यूफोरिया दिखाने के बजाय करेक्शन के जरिए वैल्यूएशन को ठंडा किया है। अब फोकस दोबारा अर्निंग्स पर शिफ्ट होता दिख रहा है। रिजल्ट सीजन बहुत ज़्यादा एक्साइटिंग भले न हो, लेकिन नेगेटिव भी नहीं है। आगे कमाई में सुधार, क्रेडिट ग्रोथ और करीब 7% रियल जीडीपी तथा 10% नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ की उम्मीद बाजार को सपोर्ट दे सकती है।

निफ्टी के लिए 24,000 से 24,500 का ज़ोन एक अहम सपोर्ट एरिया माना जा रहा है। हालिया लो भी इसी दायरे के आसपास बना है और टेक्निकल तौर पर 38.2% रिट्रेसमेंट पूरा हो चुका है। अगर हल्की और गिरावट आती भी है तो 24,000 के आसपास वैल्यूएशन सपोर्ट मिल सकता है। इस दायरे में बाजार के बहुत नीचे जाने की संभावना कम मानी जा रही है। यहां से बाजार कुछ समय कंसोलिडेशन में रह सकता है और उसके बाद अर्निंग्स के आधार पर अगली दिशा तय होगी। निवेशकों के लिए यह समय इंडेक्स लेवल पर दांव लगाने से ज्यादा स्टॉक-स्पेसिफिक अप्रोच अपनाने का है।

अब 2020 से 2024 तक काम करने वाला “टॉप-डाउन” तरीका उतना असरदार नहीं रहेगा, जिसमें पूरा सेक्टर खरीद लेने से पैसा बन जाता था। आगे का दौर “बॉटम-अप” का है, जहां सेक्टर चुनने के बाद उसी सेक्टर के भीतर सही स्टॉक्स की पहचान करनी होगी। हर सेक्टर में सभी शेयर एक साथ नहीं चलेंगे। इसलिए माइक्रोस्कोपिक लेंस से बिजनेस क्वालिटी, वैल्यूएशन और अर्निंग्स विज़िबिलिटी देखना जरूरी होगा।


(शेयर मंथन, 02 फरवरी 2026)

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