बजट ने रचा विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) के सहारे विकास का खाका

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 1 फरवरी को वित्त-वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किया। इस बजट में आर्थिक वृद्धि को तेज और टिकाऊ बनाने के लिए सात रणनीतिक क्षेत्रों में विनिर्माण (manufacturing) को बढ़ावा दिया गया है। विनिर्माण को प्रोत्साहन समेत कुल 6 ऐसे प्रमुख क्षेत्र चुने गये हैं, जिन पर इस बजट में विशेष ध्यान देकर देश की आर्थिक गति तेज करने का संकल्प किया गया है। 

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में बताया कि इस बार का बजट ‘तीन कर्तव्यों’ की अवधारणा पर आधारित है। पहला कर्तव्य है - आर्थिक वृद्धि को तेज और टिकाऊ बनाना। दूसरा कर्तव्य है - लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनकी क्षमता बढ़ाना। इसी तरह तीसरा कर्तव्य है - सबका साथ, सबका विकास की भावना के अनुरूप हर वर्ग, क्षेत्र और समुदाय तक अवसरों को पहुँचाना। कुल मिला कर, यह बजट निवेश, विनिर्माण, बुनियादी संरचना, मानव पूँजी और कर सुधारों के जरिए 2047 तक विकसित भारत की नींव मजबूत करने का प्रयास करता है।

बजट के प्रमुख अनुमान और राजकोषीय तस्वीर

  • वित्त-वर्ष 2026-27 के लिए कुल बजट का आकार 53.5 लाख करोड़ रुपये रखा गया है।
  • गैर-ऋण प्राप्तियाँ 36.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
  • केंद्र का शुद्ध कर संग्रह (net tax collection) 28.7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
  • सकल बाजार उधारी (gross market borrowing) 17.2 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
  • शुद्ध बाजार उधारी (net market borrowing) 11.7 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है।
  • कुल व्यय 53.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
  • पूँजीगत व्यय (capex) को 8.8% बढ़ा कर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया।
  • वित्त-वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3% रखने का लक्ष्य है।
  • वित्त-वर्ष 2025-26 में राजकोषीय घाटा 4.4% रहने का अनुमान है।
  • ऋण-जीडीपी अनुपात (debt to GDP ratio) 56.1% से घटा कर 55.6% किया गया।
  • राज्यों को 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत 1.4 लाख करोड़ रुपये के अनुदान मिलेंगे।

पहला कर्तव्य : आर्थिक वृद्धि को तेज और टिकाऊ बनाना

1. सात रणनीतिक क्षेत्रों में विनिर्माण (manufacturing) को बढ़ावा

  • बायोफार्मा शक्ति योजना की घोषणा, अगले 5 वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान।
  • भारत को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केंद्र बनाने का लक्ष्य।
  • 3 नये राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाइपर) और 7 मौजूदा संस्थानों का उन्नयन।
  • 1000 से अधिक मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल केंद्रों का नेटवर्क।
  • इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा।
  • इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना (ECMS) का आकार बढ़ा कर 40,000 करोड़ रुपये किया गया।
  • ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में समर्पित रेयर अर्थ कॉरिडोर।
  • राज्यों के सहयोग से 3 रसायन पार्क स्थापित करने की योजना।

2. पूँजीगत वस्तु और उपकरण निर्माण

  • सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा 2 हाई-टेक टूल रूम की स्थापना।
  • निर्माण एवं बुनियादी संरचना से जुड़े उपकरणों के विनिर्माण पर योजना की शुरुआत।
  • कंटेनर निर्माण योजना, 5 वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान।

3. वस्त्र क्षेत्र (Textiles Sector) के लिए एकीकृत कार्यक्रम

  • राष्ट्रीय फाइबर योजना, प्राकृतिक और मानव निर्मित फाइबर पर जोर।
  • वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना।
  • तकनीकी वस्त्रों के लिए मेगा टेक्सटाइल पार्क।
  • महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के तहत खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को मजबूती।

4. पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों का पुनरुद्धार

  • 200 पारंपरिक औद्योगिक क्लस्टरों को पुनर्जीवित करने की योजना।
  • बुनियादी संरचना और तकनीकी उन्नयन पर फोकस।

5. एसएमई और सूक्ष्म उद्यम

  • 10,000 करोड़ रुपये का एसएमई वृद्धि कोष।
  • आत्मनिर्भर भारत कोष में अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये।
  • टियर-2 और टियर-3 शहरों में ‘कॉरपोरेट मित्र’ तैयार करने की योजना।

6. बुनियादी संरचना पर सरकार का फोकस

  • सार्वजनिक पूँजीगत व्यय (govt. capex) 12.2 लाख करोड़ रुपये।
  • अवसंरचना जोखिम गारंटी कोष (IRGF) की स्थापना।
  • सार्वजनिक उपक्रमों की संपत्तियों के लिए रीट (REIT)।
  • दानकुनी से सूरत तक नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर।
  • 5 वर्षों में 20 नये राष्ट्रीय जलमार्ग।
  • वाराणसी और पटना में अंतर्देशीय जहाज मरम्मत केंद्र।
  • तटीय माल परिवहन प्रोत्साहन योजना।
  • सीप्लेन विनिर्माण और संचालन के लिए प्रोत्साहन।

7. ऊर्जा सुरक्षा और शहर आधारित विकास

  • कार्बन कैप्चर तकनीक के लिए 20,000 करोड़ रुपये।
  • सिटी इकोनॉमिक रीजन के लिए 5,000 करोड़ रुपये प्रति क्षेत्र।
  • 7 उच्च गति रेल कॉरिडोर की घोषणा।

दूसरा कर्तव्य : लोगों की आकांक्षाएँ और क्षमता निर्माण

1. शिक्षा और रोजगार

  • शिक्षा से रोजगार और उद्यम समिति का गठन।
  • 5 विश्वविद्यालय टाउनशिप।
  • हर जिले में बालिका छात्रावास।

2. स्वास्थ्य और आयुष

  • 5 क्षेत्रीय मेडिकल हब।
  • 3 नये अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान।
  • 1 लाख संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवर तैयार करने का लक्ष्य।

3. पर्यटन, संस्कृति और खेल

  • राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान की स्थापना।
  • 10,000 टूर गाइड का कौशल विकास।
  • 15 पुरातात्विक स्थलों का विकास।
  • खेलो इंडिया मिशन की शुरुआत।

तीसरा कर्तव्य : समावेशी विकास

1. किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

  • 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों का विकास।
  • नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी उच्च मूल्य फसलों को बढ़ावा।
  • भारत-विस्तार एआई आधारित कृषि मंच।

2. दिव्यांगजन और मानसिक स्वास्थ्य

  • दिव्यांगजन कौशल योजना।
  • उत्तर भारत में निमहांस-2 की स्थापना।

3. पूर्वोदय और पूर्वोत्तर

  • ईस्ट कोस्ट औद्योगिक कॉरिडोर।
  • 5 पर्यटन स्थल और 4000 ई-बसें।
  • बौद्ध सर्किट विकास योजना।

आयकर दरों में बदलाव नहीं

बजट में करों के मामले में बड़े बदलाव नहीं हुए। इसकी उम्मीद भी नहीं थी, क्योंकि पिछले बजट में सरकार ने व्यक्तिगत आयकर पर काफी बड़ी राहत दे दी थी। उसके बाद अक्टूबर महीने में अप्रत्यक्ष कर के मोर्चे पर जीएसटी में बड़ी राहत दी गयी। फिर भी बजट में खास तौर से कर अनुपालन को सुगम बनाने से जुड़े कुछ प्रस्ताव किये गये, जो इस प्रकार हैं :

1. प्रत्यक्ष कर

  • नया आयकर अधिनियम, 2025 एक अप्रैल 2026 से लागू।
  • आयकर दरों में कोई बदलाव नहीं।
  • छोटे करदाताओं के लिए सरल अनुपालन।

2. टीडीएस और टीसीएस में राहत

  • विदेशी पर्यटन पैकेज पर टीसीएस 2%।
  • विदेश में शिक्षा और चिकित्सा पर टीसीएस 2%।

3. पूँजी बाजार

  • वायदा पर एसटीटी 0.05%।
  • विकल्प पर एसटीटी 0.15%।

4. अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क

  • व्यक्तिगत उपयोग के आयात पर शुल्क 20% से घटाकर 10%।
  • 17 दवाओं पर सीमा शुल्क छूट।
  • ऊर्जा, रक्षा, विमानन और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को राहत।

यह बजट कई मायनों में ऐतिहासिक है। यह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का 9वाँ बजट है और मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा पूरा बजट भी। खास बात यह है कि यह निर्मला सीतारमण का लगातार 8वाँ पूर्ण बजट है और वे लगातार 9 बजट पेश करने वाली देश की पहली वित्त मंत्री बन गयी हैं।

सीतारमण ने पहली बार वर्ष 2019 में बजट पेश किया था और अब वे पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुँच गयी हैं। मोरारजी देसाई के नाम अलग-अलग अवधियों में कुल 10 बजट पेश करने का रिकॉर्ड है। (शेयर मंथन, 1 फरवरी 2026)