भारतीय आईटी सेक्टर पिछले कुछ समय से निवेशकों की निराशा का कारण बना हुआ है। वैश्विक आर्थिक सुस्ती, अमेरिकी बाजारों की अनिश्चितता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव ने इस सेक्टर के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि तकनीकी चार्ट्स पर कुछ ऐसे संकेत दिखाई दे रहे हैं जो बताते हैं कि आईटी सेक्टर शायद अपने सबसे खराब दौर से निकलने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल न तो अत्यधिक आशावादी होने की जरूरत है और न ही पूरी तरह निराश होने की।
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार आईटी इंडेक्स में हाल की गिरावट के बावजूद स्थिति उतनी कमजोर नहीं दिख रही जितनी पहली नजर में लगती है। यदि यह गिरावट ऊंचे स्तरों से शुरू हुई होती तो डबल टॉप जैसे नकारात्मक पैटर्न की आशंका बढ़ सकती थी, लेकिन मौजूदा संरचना अलग कहानी कहती है। 28,500 का स्तर इस समय बेहद महत्वपूर्ण है। जब तक आईटी इंडेक्स इस स्तर के नीचे लगातार बंद नहीं होता, तब तक सेक्टर में सुधार की संभावनाएं बनी रहेंगी। यदि यह स्तर टूटता है तो दबाव बढ़ सकता है, लेकिन फिलहाल चार्ट पर स्थिति संतुलित दिखाई दे रही है।
आईटी सेक्टर में एक दिलचस्प तकनीकी पैटर्न बन रहा है, जिसे कुछ निवेशक "कटोरी" या बेस फॉर्मेशन के रूप में देख रहे हैं। ऐसे पैटर्न अक्सर लंबे करेक्शन के बाद बनते हैं और भविष्य में बड़े रिवर्सल का आधार तैयार कर सकते हैं। हालांकि यह प्रक्रिया समय लेती है और इसमें कई बार एक ही स्तर के आसपास बार-बार बॉटम बनते हैं। इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी में किसी बड़े निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय धैर्य रखने की सलाह दी जा रही है।
आईटी सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती फिलहाल उसका फंडामेंटल वातावरण है। वैश्विक स्तर पर कंपनियां खर्चों में कटौती कर रही हैं और नई परियोजनाओं को लेकर सतर्क हैं। दूसरी ओर, AI तकनीक ने पारंपरिक आईटी सेवाओं के बिजनेस मॉडल पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कई कंपनियां AI आधारित सेवाओं से होने वाली आय का जिक्र कर रही हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल AI शब्द जोड़ देने से कारोबार की वास्तविक तस्वीर नहीं बदल जाती। निवेशकों को यह समझना होगा कि AI से जुड़ी आय वास्तव में कितनी नई है और कितनी पहले से मौजूद सेवाओं का नया नामकरण भर है।
आईटी कंपनियां काफी समय से AI आधारित समाधान विकसित कर रही थीं, लेकिन उन्हें पारंपरिक सेवाओं की श्रेणी में दिखाया जा रहा था। अब बाजार के दबाव और निवेशकों की मांग के कारण कंपनियां AI रेवेन्यू को अलग से रिपोर्ट करना शुरू कर रही हैं। इससे AI कारोबार का आकार पहले की तुलना में बड़ा दिखाई दे सकता है, लेकिन इससे सेक्टर की मूल चुनौतियां पूरी तरह समाप्त नहीं हो जातीं।
सबसे बड़ा सवाल भविष्य के बिजनेस मॉडल को लेकर है। यदि AI स्वयं दूसरे AI सिस्टम को विकसित और संचालित करने में सक्षम हो जाता है, तो पारंपरिक आईटी सेवा प्रदाताओं की भूमिका क्या होगी? यही वह प्रश्न है जिसका स्पष्ट उत्तर अभी किसी के पास नहीं है। यही वजह है कि निवेशक और विश्लेषक दोनों ही आईटी सेक्टर को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
फिलहाल तकनीकी संकेत कुछ राहत की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन मजबूत तेजी की पुष्टि के लिए आईटी इंडेक्स को 31,300 और फिर 32,000 के स्तरों के ऊपर टिकना होगा। तब जाकर यह कहा जा सकेगा कि सेक्टर में वास्तविक बदलाव शुरू हो गया है। तब तक आईटी सेक्टर में "वेट एंड वॉच" की रणनीति सबसे उपयुक्त मानी जा रही है, जहां उम्मीदें तो हैं, लेकिन उनके साथ अनिश्चितता भी उतनी ही बड़ी है।
(शेयर मंथन, 10 जून 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)