आईटी नतीजे आए, लेकिन जोश गायब, निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

आईटी सेक्टर के ताज़ा तिमाही नतीजों पर शुरुआती बाजार प्रतिक्रिया काफी सीमित रही है। टीसीएस, एचसीएल टेक और इंफोसिस जैसे दिग्गजों के नतीजे आ जाने के बावजूद निफ्टी आईटी इंडेक्स पिछले कुछ दिनों से एक सीमित दायरे में ही घूमता नजर आ रहा है।

जिस तरह निफ्टी 50 में कंसोलिडेशन दिख रहा है, वैसा ही रुख आईटी शेयरों में भी देखने को मिल रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि इन कंपनियों के नतीजे बड़े पैमाने पर बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहे हैं न तो कोई बड़ा सरप्राइज़ और न ही कोई बड़ा झटका। कुल मिलाकर आईटी कंपनियों के नतीजों में “एक्सपेक्टेशन मीट” का ट्रेंड साफ दिखाई देता है। कहीं रेवेन्यू थोड़ा बेहतर रहा तो कहीं मुनाफा अनुमानों से थोड़ा कम, लेकिन अंततः ये दोनों फैक्टर एक-दूसरे को संतुलित कर देते हैं। इस तिमाही में लगभग सभी कंपनियों ने कर्मचारियों से जुड़े खर्चों, जैसे ग्रेच्युटी और अन्य बेनिफिट्स के लिए अतिरिक्त प्रोविजनिंग की है, जिसे श्रम कानूनों में बदलाव के बाद एक “वन-टाइम इंपैक्ट” के तौर पर देखा जा रहा है। इस कारण मुनाफे पर दबाव जरूर दिखा, लेकिन इसे स्थायी कमजोरी नहीं माना जा रहा। 

आईटी कंपनियां अपने बिजनेस को भविष्य के लिए तैयार करने की कोशिश जरूर कर रही हैं। नतीजों के साथ-साथ कंपनियों की ओर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश और री-स्ट्रक्चरिंग की बात लगातार सामने आ रही है। लगभग सभी बड़ी आईटी कंपनियों में कर्मचारियों को एआई स्किल्स की ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह संकेत देता है कि सेक्टर खुद को टेक्नोलॉजी के अगले चरण के लिए रीइमेजिन कर रहा है, हालांकि फिलहाल यह बदलाव नतीजों या वैल्यूएशन को पूरी तरह जस्टिफाई करता नहीं दिखता। 

आईटी सेक्टर में कर्मचारियों की संख्या को लेकर भी दिलचस्प विरोधाभास देखने को मिला है। एक तरफ टीसीएस ने इस साल बड़ी संख्या में कर्मचारियों की कटौती की है, जबकि दूसरी ओर इंफोसिस ने इसी अवधि में हजारों नए कर्मचारियों को जोड़ा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, टीसीएस में कोविड के दौरान हुई ओवरस्टाफिंग और बेंच स्ट्रेंथ का बढ़ना इस कटौती की बड़ी वजह है। वहीं, इंफोसिस जैसी कंपनियां नई स्किल्स, खासतौर पर एआई से जुड़े रोल्स के लिए चयनात्मक भर्ती कर रही हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि सेक्टर में कुल मिलाकर सिर्फ छंटनी हो रही है, बल्कि स्किल-आधारित री-एलाइनमेंट चल रहा है। 

एआई को लेकर आईटी इंडस्ट्री के सामने समय की कमी को लेकर भी चेतावनी दी जा रही है। इंफोसिस के पूर्व सीईओ विशाल सिक्का ने हाल ही में कहा है कि आईटी प्रोफेशनल्स के पास अब बहुत छोटा समय है, जिसमें उन्हें अपनी एआई स्किल्स मजबूत करनी होंगी, वरना एआई उन्हें रिप्लेस कर देगा। उनका तर्क है कि लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स कोडिंग जैसे कामों में “अनरीज़नेबली एफिशिएंट” हो चुके हैं, यानी वे इंसानों की तुलना में कहीं ज्यादा तेज और कम गलती करने वाले बनते जा रहे हैं।

आईटी सेक्टर इस समय न तो बड़े संकट में है और न ही किसी बड़े बूम के दौर में। नतीजे स्थिर हैं, ग्रोथ सीमित है और वैल्यूएशन ऊंचे बने हुए हैं। एआई भविष्य की दिशा जरूर दिखा रहा है, लेकिन फिलहाल उसके फायदे ज्यादा “ऑप्टिक्स” में नजर आते हैं, न कि कमाई में। निवेशकों के लिए यह सेक्टर फिलहाल धैर्य और चयनात्मक नजरिए की मांग करता है, जहां उत्साह से ज्यादा समझदारी जरूरी है।


(शेयर मंथन, 15 जनवरी 2026)

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