कैलिबर माइनिंग एंड लॉजिस्टिक्स का आईपीओ निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
कंपनी मुख्य रूप से कोल माइनिंग और कोल लॉजिस्टिक्स के कारोबार में सक्रिय है और कोल इंडिया तथा उसकी विभिन्न सहायक कंपनियों के लिए माइनिंग सेवाएं उपलब्ध कराती है। कंपनी के सीएमडी मोहित चड्ढा के अनुसार, कैलिबर की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी, जबकि परिवार का लॉजिस्टिक्स कारोबार 1989 से चल रहा है। शुरुआती वर्षों में कंपनी सीमेंट और फ्लाई ऐश लॉजिस्टिक्स पर केंद्रित थी, लेकिन 2021 में कोल माइनिंग के क्षेत्र में बैकवर्ड इंटीग्रेशन के साथ प्रवेश किया। आज कंपनी माइन में पहली ब्लास्टिंग से लेकर कोयले को रेलवे तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में सेवाएं देती है, जिससे यह एंड-टू-एंड कोल माइनिंग और लॉजिस्टिक्स समाधान देने वाली चुनिंदा कंपनियों में शामिल हो गई है।
पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने तेज़ी से कारोबार का विस्तार किया है। जहां वित्त वर्ष 2019-20 में कंपनी का राजस्व करीब 227 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 1,677 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी के कुल राजस्व का लगभग 86% हिस्सा कोल माइनिंग और करीब 14% हिस्सा कोल लॉजिस्टिक्स से आता है। वर्तमान में कंपनी सात अलग-अलग खनन परियोजनाओं पर काम कर रही है और उसके पास लगभग 9,500 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक है, जिसे अगले ढाई से तीन वर्षों में पूरा किया जाना है। इसके अलावा कंपनी को महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में एक क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक भी मिला है, जो भविष्य में कारोबार के विविधीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आईपीओ के जरिए जुटाई जा रही करीब 400 करोड़ रुपये की नई पूंजी का उपयोग कंपनी तीन प्रमुख उद्देश्यों के लिए करेगी। पहला, उपकरणों पर लिए गए कर्ज को कम किया जाएगा, जिससे ब्याज लागत घटेगी। दूसरा, नए उपकरणों की खरीद के जरिए परिचालन क्षमता बढ़ाई जाएगी। तीसरा, कंपनी अपने वर्किंग कैपिटल और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों को मजबूत करेगी। प्रबंधन का मानना है कि इससे नकदी प्रवाह बेहतर होगा और भविष्य में नए प्रोजेक्ट हासिल करने की क्षमता भी बढ़ेगी।
भविष्य की रणनीति पर कंपनी का फोकस केवल मौजूदा ऑर्डर पूरे करने तक सीमित नहीं है। प्रबंधन ने संकेत दिया है कि वह ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों में भी विस्तार की योजना बना रही है, जहां महानदी कोलफील्ड्स और सेंट्रल कोलफील्ड्स जैसी कंपनियों के साथ नए अवसर तलाशे जाएंगे। साथ ही, कंपनी किसी भी ऐसे क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए तैयार है जहां माइनिंग या लॉजिस्टिक्स से जुड़ी संभावनाएं हों। वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने पिछले दो वर्षों में लगभग 32.67% की राजस्व CAGR दर्ज की है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में 431 करोड़ रुपये का EBITDA और 157 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। प्रबंधन का कहना है कि मजबूत टीम, आधुनिक उपकरण और बढ़ती ऑर्डर बुक के दम पर कंपनी आने वाले वर्षों में भी इसी गति से विकास जारी रखने का लक्ष्य रखती है।
का आईपीओ निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कंपनी मुख्य रूप से कोल माइनिंग और कोल लॉजिस्टिक्स के कारोबार में सक्रिय है और कोल इंडिया तथा उसकी विभिन्न सहायक कंपनियों के लिए माइनिंग सेवाएं उपलब्ध कराती है। कंपनी के सीएमडी मोहित चड्ढा के अनुसार, Caliber की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी, जबकि परिवार का लॉजिस्टिक्स कारोबार 1989 से चल रहा है। शुरुआती वर्षों में कंपनी सीमेंट और फ्लाई ऐश लॉजिस्टिक्स पर केंद्रित थी, लेकिन 2021 में कोल माइनिंग के क्षेत्र में बैकवर्ड इंटीग्रेशन के साथ प्रवेश किया। आज कंपनी माइन में पहली ब्लास्टिंग से लेकर कोयले को रेलवे तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में सेवाएं देती है, जिससे यह एंड-टू-एंड कोल माइनिंग और लॉजिस्टिक्स समाधान देने वाली चुनिंदा कंपनियों में शामिल हो गई है।
पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने तेज़ी से कारोबार का विस्तार किया है। जहां वित्त वर्ष 2019-20 में कंपनी का राजस्व करीब 227 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 1,677 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी के कुल राजस्व का लगभग 86% हिस्सा कोल माइनिंग और करीब 14% हिस्सा कोल लॉजिस्टिक्स से आता है। वर्तमान में कंपनी सात अलग-अलग खनन परियोजनाओं पर काम कर रही है और उसके पास लगभग 9,500 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक है, जिसे अगले ढाई से तीन वर्षों में पूरा किया जाना है। इसके अलावा कंपनी को महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में एक क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक भी मिला है, जो भविष्य में कारोबार के विविधीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आईपीओ के जरिए जुटाई जा रही करीब 400 करोड़ रुपये की नई पूंजी का उपयोग कंपनी तीन प्रमुख उद्देश्यों के लिए करेगी। पहला, उपकरणों पर लिए गए कर्ज को कम किया जाएगा, जिससे ब्याज लागत घटेगी। दूसरा, नए उपकरणों की खरीद के जरिए परिचालन क्षमता बढ़ाई जाएगी। तीसरा, कंपनी अपने वर्किंग कैपिटल और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों को मजबूत करेगी। प्रबंधन का मानना है कि इससे नकदी प्रवाह बेहतर होगा और भविष्य में नए प्रोजेक्ट हासिल करने की क्षमता भी बढ़ेगी।
भविष्य की रणनीति पर कंपनी का फोकस केवल मौजूदा ऑर्डर पूरे करने तक सीमित नहीं है। प्रबंधन ने संकेत दिया है कि वह ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों में भी विस्तार की योजना बना रही है, जहां महानदी कोलफील्ड्स और सेंट्रल कोलफील्ड्स जैसी कंपनियों के साथ नए अवसर तलाशे जाएंगे। साथ ही, कंपनी किसी भी ऐसे क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए तैयार है जहां माइनिंग या लॉजिस्टिक्स से जुड़ी संभावनाएं हों। वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने पिछले दो वर्षों में लगभग 32.67% की राजस्व CAGR दर्ज की है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में 431 करोड़ रुपये का EBITDA और 157 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। प्रबंधन का कहना है कि मजबूत टीम, आधुनिक उपकरण और बढ़ती ऑर्डर बुक के दम पर कंपनी आने वाले वर्षों में भी इसी गति से विकास जारी रखने का लक्ष्य रखती है।
का आईपीओ निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कंपनी मुख्य रूप से कोल माइनिंग और कोल लॉजिस्टिक्स के कारोबार में सक्रिय है और कोल इंडिया तथा उसकी विभिन्न सहायक कंपनियों के लिए माइनिंग सेवाएं उपलब्ध कराती है। कंपनी के सीएमडी मोहित चड्ढा के अनुसार, Caliber की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई थी, जबकि परिवार का लॉजिस्टिक्स कारोबार 1989 से चल रहा है। शुरुआती वर्षों में कंपनी सीमेंट और फ्लाई ऐश लॉजिस्टिक्स पर केंद्रित थी, लेकिन 2021 में कोल माइनिंग के क्षेत्र में बैकवर्ड इंटीग्रेशन के साथ प्रवेश किया। आज कंपनी माइन में पहली ब्लास्टिंग से लेकर कोयले को रेलवे तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया में सेवाएं देती है, जिससे यह एंड-टू-एंड कोल माइनिंग और लॉजिस्टिक्स समाधान देने वाली चुनिंदा कंपनियों में शामिल हो गई है।
पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने तेजी से कारोबार का विस्तार किया है। जहां वित्त वर्ष 2019-20 में कंपनी का राजस्व करीब 227 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर लगभग 1,677 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी के कुल राजस्व का लगभग 86% हिस्सा कोल माइनिंग और करीब 14% हिस्सा कोल लॉजिस्टिक्स से आता है। वर्तमान में कंपनी सात अलग-अलग खनन परियोजनाओं पर काम कर रही है और उसके पास लगभग 9,500 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक है, जिसे अगले ढाई से तीन वर्षों में पूरा किया जाना है। इसके अलावा कंपनी को महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में एक क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक भी मिला है, जो भविष्य में कारोबार के विविधीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आईपीओ के जरिए जुटाई जा रही करीब 400 करोड़ रुपये की नई पूंजी का उपयोग कंपनी तीन प्रमुख उद्देश्यों के लिए करेगी। पहला, उपकरणों पर लिए गए कर्ज को कम किया जाएगा, जिससे ब्याज लागत घटेगी। दूसरा, नए उपकरणों की खरीद के जरिए परिचालन क्षमता बढ़ाई जाएगी। तीसरा, कंपनी अपने वर्किंग कैपिटल और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों को मजबूत करेगी। प्रबंधन का मानना है कि इससे नकदी प्रवाह बेहतर होगा और भविष्य में नए प्रोजेक्ट हासिल करने की क्षमता भी बढ़ेगी।
भविष्य की रणनीति पर कंपनी का फोकस केवल मौजूदा ऑर्डर पूरे करने तक सीमित नहीं है। प्रबंधन ने संकेत दिया है कि वह ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों में भी विस्तार की योजना बना रही है, जहां महानदी कोलफील्ड्स और सेंट्रल कोलफील्ड्स जैसी कंपनियों के साथ नए अवसर तलाशे जाएंगे। साथ ही, कंपनी किसी भी ऐसे क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए तैयार है जहां माइनिंग या लॉजिस्टिक्स से जुड़ी संभावनाएं हों। वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने पिछले दो वर्षों में लगभग 32.67% की राजस्व CAGR दर्ज की है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में 431 करोड़ रुपये का EBITDA और 157 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया। प्रबंधन का कहना है कि मजबूत टीम, आधुनिक उपकरण और बढ़ती ऑर्डर बुक के दम पर कंपनी आने वाले वर्षों में भी इसी गति से विकास जारी रखने का लक्ष्य रखती है।
(शेयर मंथन, 17 जुलाई 2026)
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