ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम 85–87 डॉलर प्रति बैरल के बीच बने रहने से भारतीय बाजार में चिंता बढ़ी हुई है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि अभी शेयर बाजार ने तेल की इस तेजी को पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया है, बल्कि उसका असर धीरे-धीरे दिख सकता है। खासकर मुद्रा बाजार में इसकी प्रतिक्रिया अधिक स्पष्ट है, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। यदि कच्चा तेल 80 डॉलर से ऊपर लंबे समय तक बना रहता है, तो महंगाई, चालू खाते के घाटे और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, मजबूत क्रेडिट ग्रोथ और शुरुआती तिमाही नतीजों ने फिलहाल बाजार को कुछ सहारा दिया है।
(शेयर मंथन, 20 जुलाई 2026)
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