विशेषज्ञ से जानें बालाजी एमिनेस के शेयरों में निवेशकों को क्या करना चाहिए?

राजीव प्रजापति जानना चाहते हैं कि उन्हें बालाजी एमिनेस (BALAMINES) के शेयर में आगे क्या करना चाहिए? आइए, बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से जानते हैं कि शेयरों में आगे क्या होने की संभावना है?

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि फिलहाल केमिकल सेक्टर में वैल्यूएशन का जो करेक्शन होना था, वह काफी हद तक हो चुका है। पोस्ट-कोविड जो पेंट-अप डिमांड थी, वह निकल चुकी है और जिन कंपनियों ने बड़े पैमाने पर कैपेक्स किया था, उन्हें उम्मीद के मुताबिक बिजनेस नहीं मिला। इसका असर यह हुआ कि कंपनियों के मार्जिन और रिटर्न रेशियो तो अच्छे दिख रहे हैं, लेकिन सेल्स ग्रोथ कमजोर बनी हुई है। केमिकल सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती ओवरकैपेसिटी है।

भारत ही नहीं, चीन में भी भारी कैपेसिटी खड़ी हो चुकी है। जब डिमांड सीमित हो और सप्लाई ज्यादा हो, तो प्राइसिंग पावर और मार्जिन पर दबाव आना तय है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि केमिकल बिजनेस तो चलता रहेगा, लेकिन निवेश के नजरिये से यह सेक्टर आने वाले समय में बहुत बड़ा वैल्यू क्रिएशन करेगा, इस पर संदेह बना रहता है। खासकर जनरल केमिकल कंपनियों में, न कि बहुत टारगेटेड या डिफरेंशिएटेड केमिकल्स में।

बालाजी अमीन्स की बात करें तो मौजूदा वैल्यूएशन के हिसाब से इसमें बहुत ज्यादा डाउनसाइड की संभावना नहीं दिखती। करीब 27 के पीई पर यह शेयर है, और सेक्टर की स्थिति को देखते हुए माना जा सकता है कि 1000 रुपये के नीचे जाना मुश्किल होगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या इसमें बहुत बड़ा अपसाइड दिखता है? फिलहाल ऐसा कोई मजबूत कारण नजर नहीं आता। यह शेयर ज्यादा तर एक रेंज में ट्रेड करने वाला स्टॉक बन चुका है, जिसकी ब्रॉड रेंज लगभग 1000 से 2000 रुपये की मानी जा सकती है। 

हाल में इस शेयर में जो तेजी देखने को मिली, उसकी वजह महाराष्ट्र सरकार से मिलने वाला 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का इंसेंटिव है, जो कंपनी की एक यूनिट के विस्तार से जुड़ा है। कुल मिलाकर इससे कंपनी को लगभग 250 करोड़ रुपये तक का फायदा हो सकता है। यह खबर शॉर्ट टर्म में पॉजिटिव जरूर है और इसी कारण शेयर 50-डे मूविंग एवरेज के ऊपर निकलता दिखा। लेकिन यह समझना जरूरी है कि यह एक वन-टाइम ट्रिगर है। अगर आने वाले क्वार्टर के नतीजों में डिमांड और ग्रोथ नहीं दिखती, तो यह पॉजिटिव असर भी खत्म हो सकता है।

लंबी अवधि की सोच से देखा जाए तो बेहतर रणनीति यही होगी कि निवेशक ऐसे सेक्टर तलाशें जहां आने वाले वर्षों में ग्रोथ और वैल्यू क्रिएशन की संभावना ज्यादा हो। “चाइना प्लस वन” की कहानी अब उतनी मजबूत नहीं रही, क्योंकि चीन ने खुद प्राइस वॉर और स्केल के दम पर प्रतिस्पर्धा और तेज कर दी है। ऐसे में केमिकल सेक्टर में फंसे रहने के बजाय मजबूत सेक्टर और बेहतर बिजनेस मॉडल वाली कंपनियों पर फोकस करना ज्यादा समझदारी भरा कदम माना जा सकता है।


(शेयर मंथन, 10 जनवरी 2026)

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