अमेरिकी शुल्क और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इस साल सेंसेक्स 88,000 कर सकता है पार : जयंत रंगनाथन

आईआईएफएल कैपिटल के वरिष्ठ निदेशक जयंत रंगनाथन भारतीय शेयर बाजार को लेकर इस समय सबसे अधिक सतर्क और नकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले विशेषज्ञों में शामिल हैं।

उनके अनुसार, मौजूदा परिदृश्य में बाजार के लिए कोई स्पष्ट सकारात्मक ट्रिगर नजर नहीं आता, जबकि अमेरिकी शुल्क, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक आर्थिक हालात जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक बने हुए हैं। उनका अनुमान है कि जून 2026 के अंत तक सेंसेक्स 85,000 और निफ्टी 26,000 के स्तर तक फिसल सकता है। हालाँकि, दिसंबर 2026 तक वे सेंसेक्स को 88,000 और निफ्टी को 26,500 के स्तर पर देखते हैं। 

जयंत रंगनाथन के अनुमान

सेंसेक्स लक्ष्य (जून 2026)

85,000

निफ्टी लक्ष्य (जून 2026)

26,000

सेंसेक्स लक्ष्य (दिसंबर 2026)

88,000

निफ्टी लक्ष्य (दिसंबर 2026)

26,500

2025-26 में निफ्टी ईपीएस (रु.)

1200

2026-27 में निफ्टी ईपीएस (रु.)

1250

2025-26 की दूसरी छमाही में कॉर्पोरेट आय वृद्धि

 

2025-26 में जीडीपी वृद्धि

7.2%

2026-27 में जीडीपी वृद्धि

7.3%

अगले 6 माह में डॉलर-रुपया विनिमय दर

91-95

अमेरिका से ट्रेड डील कब तक

मार्च 2026

सेंसेक्स 1 लाख पर किस वर्ष तक पहुँचेगा

2027

जयंत रंगनाथन के अनुसार अभी बाजार के लिए किसी ठोस सकारात्मक कारक को स्पष्ट रूप से उभरता हुआ नहीं देखते। नकारात्मक पक्ष पर अमेरिकी शुल्क को वे सबसे बड़ा जोखिम मानते हैं, जिसका असर न केवल वैश्विक व्यापार पर, बल्कि भारतीय शेयर बाजार पर भी गहराई से पड़ सकता है। वैश्विक बाजारों की तुलना में अगले 12 महीनों में वे भारतीय बाजार को कमजोर प्रदर्शन करने वाला आंकते हैं। उनके अनुसार, आने वाले छह महीनों में अमेरिकी शुल्क, कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने वाले सबसे अहम कारक होंगे।

अमेरिकी शुल्कों का असर वे भारतीय बाजारों पर स्पष्ट रूप से बड़ा नकारात्मक मानते हैं। साथ ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मार्च 2026 तक पूरा होने की उम्मीद भी जताते हैं। आगामी आम बजट 2026-27 को लेकर उनका मानना है कि बाजार पर बहुत अधिक असर नहीं पड़ेगा।

जयंत रंगनाथन के अनुसार ब्याज दरों के संदर्भ में वे आगे नरमी की संभावना जरूर देखते हैं, लेकिन निजी पूँजीगत व्यय और विदेशी निवेश प्रवाह को लेकर स्पष्ट सुधार के संकेत उन्हें फिलहाल नजर नहीं आते। वैश्विक स्तर पर ट्रंप की नीतियाँ और बयानबाजी भारतीय बाजारों के लिए एक अहम जोखिम कारक बने रह सकते हैं।

अगले 1 साल में पसंदीदा क्षेत्र/शेयर

तेजी वाले क्षेत्र : ऊर्जा
कमजोर क्षेत्र : सूचना प्रौद्योगिकी

(शेयर मंथन, 14 जनवरी 2026)