वैश्विक परिस्थितियों के बीच सोना और चाँदी की चाल इस बार पारंपरिक ट्रेंड से अलग नजर आ रही है। आमतौर पर जब भी युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो सोना-चांदी जैसे सेफ हेवन एसेट्स में तेजी देखने को मिलती है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते हैं कि लेकिन मौजूदा समय में तस्वीर उलट दिखाई दे रही है, जहाँ एक ओर युद्ध लंबा खिंच रहा है और कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर सोना और चाँदी में कमजोरी देखने को मिल रही है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि वैश्विक स्तर पर देश अपने फॉरेक्स रिजर्व का बड़ा हिस्सा तेल खरीदने में खर्च कर रहे हैं, जिससे सोने की मांग पर दबाव पड़ रहा है। साथ ही, अन्य एसेट क्लास में हुए नुकसान की भरपाई के लिए निवेशक सोने में मुनाफावसूली भी कर रहे हैं।
इस स्थिति को “ऑयल-ड्रिवन वॉर” के रूप में देखा जा सकता है, जहां ट्रेड वॉर या टैरिफ वॉर के बजाय तेल की अहमियत ज्यादा हो गई है। यही वजह है कि सोना-चांदी फिलहाल दबाव में हैं और इनमें तुरंत बड़ी तेजी की उम्मीद कम नजर आती है। हालांकि, सोने में कुछ स्तरों पर मजबूत सपोर्ट बन सकता है, खासकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4200-4300 डॉलर के दायरे के आसपास। इन स्तरों पर निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी शुरू कर सकते हैं, खासकर वे लोग जो अपने पोर्टफोलियो में स्थिरता चाहते हैं।
जहाँ तक चाँदी का सवाल है, वहां स्थिति थोड़ी अधिक कमजोर दिखाई देती है। हाल की तेज गिरावट यह संकेत देती है कि इसमें अभी और उतार-चढ़ाव संभव है और निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर है। अनुमान है कि चांदी को स्थिर और अपेक्षाकृत सुरक्षित स्तर पर आने के लिए और नीचे जाना पड़ सकता है। ऐसे में चांदी में निवेश को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है और जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। निवेश रणनीति के लिहाज से यह पूरी तरह निवेशक के रिस्क प्रोफाइल पर निर्भर करता है। यदि कोई निवेशक आक्रामक (हाई रिस्क) प्रोफाइल का है, तो उसके लिए लंबी अवधि में इक्विटी जैसे रिस्क एसेट्स ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकते हैं। वहीं, कंजर्वेटिव निवेशकों के लिए सोने में थोड़ा ज्यादा एलोकेशन रखना समझदारी हो सकती है, लेकिन वह भी चरणबद्ध तरीके से। चांदी के मुकाबले सोना अधिक विश्वसनीय विकल्प माना जा रहा है क्योंकि सेंट्रल बैंकों की मांग इसमें लगातार बनी रहती है।
आने वाले समय को लेकर यह भी माना जा रहा है कि यदि युद्ध या वैश्विक तनाव कम होता है, तो सबसे पहले तेजी इक्विटी बाजार में देखने को मिल सकती है, जो अगले 2 से 3 साल तक जारी रह सकती है। इसके बाद ही सोना-चांदी जैसे सेफ हेवन एसेट्स में बड़ा मूवमेंट देखने को मिल सकता है। इसलिए वर्ष 2026 को एक वोलाटाइल और पोर्टफोलियो बनाने का समय माना जा रहा है, जबकि 2027–2029 के बीच इक्विटी में बेहतर अवसर उभर सकते हैं।
(शेयर मंथन, 23 मार्च 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)