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बजाज फाइनेंस में 962 रुपये पर खरीदारी, क्या 5 साल के नजरिए से निवेशक बने रहें?

बजाज फाइनेंस के शेयर में 962 रुपये के आसपास खरीदारी करने वाले निवेशक के लिए सवाल है कि मौजूदा स्तर पर क्या करना चाहिए।

लंबी अवधि यानी करीब 5 साल के नजरिए से बाजार विशेषज्ञ ने फिलहाल जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय शेयर को होल्ड करने और कंपनी की ग्रोथ को समझने पर जोर दिया। बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि बजाज फाइनेंस एक प्रमुख NBFC है और इसे दूसरे NBFC के मुकाबले प्रीमियम वैल्यूएशन मिलना स्वाभाविक है। हालांकि ज्यादा प्रीमियम पर खरीदारी करने से निवेशक को आगे चलकर रिलेटिव माइलेज सीमित मिल सकता है।

बजाज फाइनेंस की मौजूदा वैल्यूएशन को समझने के लिए Price to Book यानी P/B रेश्यो पर नजर रखना जरूरी है। उनके अनुसार सामान्य NBFC कंपनियों को करीब 3 गुना Price to Book पर वैल्यूएशन मिल सकता है, जबकि Bajaj Finance जैसी अग्रणी NBFC को करीब 5 गुना तक प्रीमियम मिलना संभव है। इसी गणना के आधार पर उन्होंने करीब 850–900 रुपये के स्तर को एक संभावित बेस जोन के तौर पर बताया। वहीं 1000–1100 रुपये के आसपास शेयर के अटकने की संभावना की बात कही गई। हालांकि बाजार की स्थिति और सेंटीमेंट के हिसाब से यह वैल्यूएशन बदल सकता है।

5 साल का समय होने पर विशेषज्ञ ने निवेशक को केवल शेयर की मौजूदा कीमत देखकर घबराने से बचने की बात कही। उन्होंने एक उदाहरण के जरिए समझाया कि अगर अगले 5 साल में कंपनी की बुक वैल्यू दोगुनी हो जाती है तो मौजूदा 6 गुना Price to Book अपने आप करीब 3 गुना हो जाएगा। ऐसे में अगर भविष्य में शेयर को दोबारा करीब 5 गुना Price to Book का वैल्यूएशन मिलता है तो मौजूदा स्तर से अच्छी बढ़त की गुंजाइश बन सकती है। उन्होंने इसे कोई निश्चित प्रोजेक्शन नहीं बताया, बल्कि निवेशक को खुद संभावित रिटर्न का बैक-ऑफ-द-एनवेलप कैलकुलेशन करने का तरीका बताया।

विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि 5 साल का निवेश नजरिया सिर्फ इस वजह से नहीं होना चाहिए कि निवेशक किसी शेयर में फंस गया है। अगर कंपनी लंबे समय तक करीब 15% की दर से ग्रोथ करती है तो 5 साल के नजरिए से तस्वीर अलग हो सकती है। उन्होंने यह भी उदाहरण दिया कि 5 साल में 50% का रिटर्न भी मिलने पर करीब 1500 रुपये के स्तर की संभावना बन सकती है, हालांकि यह किसी निश्चित लक्ष्य का अनुमान नहीं है। उनका जोर इस बात पर था कि निवेशकों को कंपनी की बुक ग्रोथ, बिजनेस ग्रोथ और वैल्यूएशन को जोड़कर अपना आकलन करना चाहिए।

बजाज फाइनेंस को लेकर Jio Finance से बढ़ती प्रतिस्पर्धा की चर्चा पर विशेषज्ञ ने कहा कि भारत में घरेलू क्रेडिट की जरूरत अभी काफी बड़ी है। उनका मानना है कि जैसे-जैसे भारतीय अर्थव्यवस्था और लोगों की आय बढ़ेगी, क्रेडिट का पूरा बाजार भी बड़ा होगा। इसलिए भविष्य में केवल कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने के बजाय यह देखना जरूरी होगा कि पूरा बाजार कितना विस्तार करता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को केवल सर्विस सेक्टर पर निर्भर रहने के बजाय व्यापक आधार पर बनाए रखना जरूरी है।


(शेयर मंथन, 21 सितंबर 2026)

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