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क्या NSE IPO की 1,785 रुपये की कीमत निवेशकों के लिए आकर्षक हो सकती है?

एनएसई का IPO बाजार में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि मौजूदा शेयरधारकों की ओर से करीब 6.2% हिस्सेदारी ऑफर करने का अनुमान था, लेकिन निवेशकों और मर्चेंट बैंकरों से चर्चा के बाद IPO का आकार घटाकर करीब 5.1% कर दिया गया। उन्होंने बताया कि 1,700-1,785 रुपये की रेंज ऐसी मानी गई, जिससे नए निवेशकों के लिए भी कुछ मूल्य उपलब्ध रहे और मौजूदा शेयरधारकों को भी बेहतर कीमत मिल सके।

NSE IPO की कीमत को लेकर बाजार में पहले 2,200-2,300 रुपये के आसपास के अनुमान लगाए जाने की चर्चा थी। इसके मुकाबले 1,785 रुपये की कीमत को लेकर विश्लेषक सोमेश कुमार ने इसे अपेक्षाकृत प्रतिस्पर्धी प्राइसिंग के तौर पर देखा। उन्होंने कहा कि NSE के मूल्यांकन की तुलना भारतीय बाजार में BSE जैसे समान कारोबार वाले एक्सचेंज से करना अधिक प्रासंगिक हो सकता है, जबकि दूसरे देशों के एक्सचेंजों से तुलना करते समय अलग-अलग बाजारों की परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए।

NSE का यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS है। बातचीत में बताया गया कि कंपनी को नई पूंजी की तत्काल जरूरत नहीं होने के कारण IPO में नए शेयर जारी करने के बजाय मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी की पेशकश की जा रही है। आशीष चौहान ने यह भी कहा कि IPO खुलने के बाद निवेशकों की मांग से यह पता चलेगा कि बाजार इस कीमत को किस तरह देखता है।

वैल्यूएशन को लेकर अलग-अलग तुलना सामने आ रही है। एक तरफ भारतीय एक्सचेंजों की तुलना में NSE की कीमत को लेकर सकारात्मक राय है, वहीं वैश्विक एक्सचेंजों के मुकाबले अलग तस्वीर हो सकती है। ऐसे में NSE IPO के मूल्यांकन को समझने के लिए केवल एक बाजार से तुलना करने के बजाय कंपनी के बिजनेस मॉडल, रेवेन्यू, ग्रोथ और भारतीय बाजार के विकास को भी देखना जरूरी होगा। ट्रांसक्रिप्ट में भी अंतिम मूल्यांकन के लिए IPO खुलने के बाद बाजार की प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण बताया गया है।


(शेयर मंथन, 24 सितंबर 2026)

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