एक्सपर्ट से जानें चाँदी में इतनी तेजी क्यों आई है, निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?

चाँदी को लेकर वैश्विक स्तर पर जिस तरह की चर्चाएँ चल रही हैं, उसमें चीन की भूमिका सबसे अहम बनकर सामने आ रही है।

चीन न केवल चाँदी का बड़ा उपभोक्ता है बल्कि एक प्रमुख उत्पादक और रिफाइनर भी है। हाल के दिनों में चीन द्वारा चाँदी के निर्यात पर पाबंदियों की अटकलें जरूर रहीं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि 2025 में चीन ने बड़े पैमाने पर सिल्वर का एक्सपोर्ट किया है। मौजूद डेटा बताता है कि चीन सालों से लगातार ऊंचे स्तर पर चाँदी का निर्यात करता रहा है और करीब 60% सिल्वर का रिफाइनिंग वहीं होती है। फिलहाल चीन ने 44 एजेंसियों को एक्सपोर्ट की अनुमति दी हुई है, जिनमें से ज्यादातर अभी सक्रिय हैं। इसलिए यह कहना गलत होगा कि पूरी तरह से निर्यात बंद है, हालांकि प्रीमियम के स्तर पर फर्क जरूर दिख रहा है। 

2025 में चाँदी के बाजार में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिला है। डेरिवेटिव मार्केट, जो अब तक फिजिकल मार्केट से संकेत लेकर कीमतें तय करता था, उसका प्राइस डिस्कवरी सेंटर अब अमेरिका और यूरोप से शिफ्ट होकर एशिया की ओर आ गया है। पूरे 2025 में एशिया में फिजिकल सिल्वर पर प्रीमियम बना रहा और 2026 की शुरुआत में भी यह प्रीमियम खत्म नहीं हुआ है। चीन, भारत, दुबई और हांगकांग जैसे बाजारों में चांदी पर लगातार ऊँचा प्रीमियम देखा जा रहा है, जबकि अमेरिका में ऐसा नहीं है। इसकी बड़ी वजह यह है कि अमेरिका पेपर ट्रेड पर ज्यादा निर्भर है, जबकि चीन और भारत जैसी अर्थव्यवस्थाएं मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल डिमांड के कारण फिजिकल सिल्वर की वास्तविक जरूरत रखती हैं, खासकर सोलर, ईवी और अन्य इंडस्ट्रियल सेक्टर में।

अगर स्पेकुलेशन और रियल डिमांड को अलग किया जाए, तो अनुमान यही है कि मौजूदा तेजी में करीब 60-70% हिस्सा वास्तविक मांग का है और केवल 20-30% ही सट्टा गतिविधियों से जुड़ा है। इसी वजह से चाँदी में बड़े करेक्शन की आशंका फिलहाल कम नजर आती है। 1980 या 2011 जैसे 70-90% के करेक्शन वाले उदाहरणों की तुलना मौजूदा हालात से करना सही नहीं होगा। टेक्निकल पोजिशनिंग देखें तो मौजूदा स्तर से अधिकतम 3% से 11% तक का ही करेक्शन संभावित माना जा रहा है।

चाँदी की तेजी का आधार मजबूत है और यह सिर्फ अफवाहों या सट्टेबाजी पर टिकी नहीं है। फिजिकल डिमांड, खासकर एशिया से, बाजार को सपोर्ट दे रही है। हालांकि, मौजूदा ऊँचे स्तरों पर अनुशासन, चरणबद्ध प्रॉफिट बुकिंग और सख्त रिस्क मैनेजमेंट ही निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए सबसे जरूरी मंत्र बने रहेंगे।


(शेयर मंथन, 24 जनवरी 2026)

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