भारत-अमेरिका ट्रेड डील के नए फ्रेमवर्क और बजट के बाद बने माहौल को समझने के लिए अहम है। हाल में ट्रंप द्वारा टैरिफ को लेकर की गई घोषणा से बाजार में शुरुआती उत्साह दिखा।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार इस सवाल के जवाब में कहते हैं कि उनके बयानों की अनिश्चितता के कारण वह तेजी टिक नहीं पायी। अब जब ट्वीट से आगे बढ़कर एक फ्रेमवर्क सामने आया है, तो यह संकेत मिलता है कि बातचीत ज्यादा ठोस दिशा में बढ़ रही है। राजनीतिक स्तर पर इसे लेकर अलग–अलग दावे होंगे, कोई इसे बड़ी कूटनीतिक जीत बताएगा तो कोई देशहित से समझौता कहेगा, लेकिन निवेशकों के लिए अहम यह है कि इस फ्रेमवर्क से बाजार और अर्थव्यवस्था को क्या संकेत मिलते हैं।
भारत के लिए मैक्रोइकॉनॉमिक और फंडामेंटल फैक्टर्स अब काफी हद तक अनुकूल स्थिति में आ चुके हैं। इससे एक नए बुल रन की नींव तैयार होती दिख रही है। बाजार एकतरफा नहीं चलता, बीच-बीच में गिरावट आएगी, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए डरने की बजाय पोजीशन साइजिंग और गिरावट पर खरीदारी की रणनीति ज्यादा व्यावहारिक लगती है। वैश्विक अनिश्चितताओं और जियोपॉलिटिकल तनाव पूरी तरह खत्म नहीं होंगे, फिर भी मौजूदा ढांचा बाजार के लिए सकारात्मक संकेत देता है।
ट्रेड डील के स्वरूप को देखें तो भारत कुछ अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर टैरिफ घटाने को तैयार है। इसमें वाइन, स्पिरिट्स, सोयाबीन ऑयल और प्रीमियम फूड आइटम्स जैसे उत्पाद शामिल हैं। सरकार यह तर्क दे सकती है कि बेसिक डेयरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े कृषि उत्पादों को अब भी संरक्षण दिया गया है। हर डील में गिव एंड टेक होता है, 100% फायदा किसी एक पक्ष को नहीं मिलता। बड़े हितों को ध्यान में रखकर कुछ समझौते किए जाते हैं, ताकि बदले में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, निवेश और निर्यात के नए मौके खुल सकें। बंद अर्थव्यवस्था में रहने से विकास के अवसर सीमित हो जाते हैं, इसलिए नियंत्रित तरीके से बाजार खोलना जरूरी माना जा रहा है।
बाजार के नजरिए से देखा जाए तो आने वाले समय में वोलैटिलिटी ऊंची रह सकती है। ग्लोबल टैरिफ टेंशन के बाद बाजार एक नए संतुलन की ओर बढ़ रहा है। भारत के लिए वैल्यूएशन प्रीमियम और बढ़ सकता है, क्योंकि ग्रोथ के नए रास्ते खुल रहे हैं। हालांकि प्रीमियम से सुपर प्रीमियम की ओर बढ़ते बाजार में छोटी सी नकारात्मक खबर भी तेज गिरावट ला सकती है। टेक्निकल रूप से निफ्टी में 26,000 के ऊपर मजबूती से क्लोज मिलने पर तेजी को नई ताकत मिल सकती है, जबकि 25,500 के आसपास का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है। कुल मिलाकर, मौजूदा हालात में बाजार के लिए आधार तैयार होता दिख रहा है और लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गिरावट पर सोच-समझकर निवेश करने की रणनीति ज्यादा उपयुक्त लगती है।
(शेयर मंथन, 07 फरवरी 2026)
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