अमेरिका में 0% ड्यूटी से लूज डायमंड एक्सपोर्ट को राहत, किरीट भंसाली से जानें आगे क्या उम्मीद?

भारत के जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग के लिए अमेरिका से जुड़ी टैरिफ नीति में हालिया नरमी बड़ी राहत लेकर आई है। 

जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के चेयरमैन किरीट भंसाली के मुताबिक अमेरिका भारतीय जेम्स-ज्वेलरी का सबसे बड़ा बाजार है, जहां कुल निर्यात का करीब 35% हिस्सा जाता है। पिछले कुछ महीनों में 50% टैरिफ की आशंका के चलते अमेरिकी बाजार में भारी अनिश्चितता बनी रही, जिससे लूज डायमंड के निर्यात में करीब 60% और ज्वेलरी में लगभग 44% तक गिरावट देखने को मिली। इससे उद्योग पर गहरा दबाव पड़ा और कारोबारी नए बाजार तलाशने को मजबूर हुये। 

अब टैरिफ घटने की घोषणा के बाद सेक्टर में उत्साह लौटता दिख रहा है। प्राकृतिक (नेचुरल) लूज डायमंड और कलर्ड स्टोन्स पर अमेरिका में 0% ड्यूटी लागू होने से निर्यात को सीधी राहत मिलेगी, जबकि ज्वेलरी पर प्रस्तावित 18% शुल्क को लेकर अभी स्पष्टता बाकी है कि यह पुरानी 6.5% ड्यूटी के ऊपर जुड़कर लगेगा या कुल मिलाकर 18% ही होगा। उद्योग की मांग है कि ज्वेलरी पर प्रभावी टैक्स बोझ कम किया जाए, क्योंकि भारतीय मैन्युफैक्चरर्स का मार्जिन सीमित होता है और ज्यादा शुल्क सीधे कारोबार पर असर डालता है। इसी तरह लैब-ग्रोन डायमंड को भी शून्य ड्यूटी की श्रेणी में लाने के लिए सरकार और अमेरिका के साथ बातचीत चल रही है, क्योंकि यह “मेक इन इंडिया” के तहत उभरता हुआ बड़ा अवसर है।

बीते छह महीनों में टैरिफ अनिश्चितता के कारण अमेरिका में रिटेलर्स और ट्रेडर्स ने इन्वेंट्री काफी घटा दी थी। अब जैसे ही नई दरें औपचारिक रूप से लागू होंगी (संभावित रूप से मार्च के दूसरे हफ्ते तक), री-स्टॉकिंग की मांग तेज़ी से आ सकती है। इससे वित्त वर्ष 2026-27 जेम्स-ज्वेलरी सेक्टर के लिए “गोल्डन ईयर” साबित होने की उम्मीद जताई जा रही है, क्योंकि अमेरिकी बाजार में डिमांड पहले से ही मजबूत बनी हुई है और स्टॉक लेवल ऐतिहासिक रूप से नीचे हैं।

घरेलू मोर्चे पर सोना-चांदी की कीमतों में तेज़ उतार-चढ़ाव से उपभोक्ता और रिटेलर्स दोनों परेशान हैं। जियो-पॉलिटिकल घटनाओं और अमेरिका से जुड़ी नीतिगत घोषणाओं के चलते कीमती धातुओं में भारी वोलैटिलिटी देखने को मिल रही है। इससे खरीदार कन्फ्यूज रहते हैं और ज्वेलरी की रिटेल बिक्री पर असर पड़ता है। उद्योग का मानना है कि सोने-चांदी में कुछ हद तक स्थिरता आना जरूरी है, ताकि घरेलू मांग सुधरे और कारोबारियों को स्थायी रूप से काम करने का भरोसा मिले। कुल मिलाकर, टैरिफ राहत से निर्यात के मोर्चे पर तस्वीर बेहतर होती दिख रही है और आने वाले महीनों में भारतीय जेम्स-ज्वेलरी उद्योग के लिए नई रफ्तार की उम्मीद बंधी है।


(शेयर मंथन, 13 फरवरी 2026)

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