सुस्त रहा शेयर बाजार, फिर भी 2025-26 में बना आईपीओ का रिकॉर्ड

वित्त वर्ष 2025-26 में शेयर बाजार भले ही आखिरी महीनों में ठंडा पड़ गया हो, लेकिन प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम या इनिशियल पब्लिक ऑफर (आईपीओ) के मोर्चे पर एक नया इतिहास बन गया।

प्राइमडेटाबेस के आँकड़ों के अनुसार, पूरे वित्त वर्ष के दौरान 112 भारतीय कंपनियों ने मुख्य एक्सचेंजों (मेन बोर्ड) पर आईपीओ लाकर कुल 1,78,963 करोड़ रुपये जुटाये। यह अब तक किसी भी वित्त वर्ष के दौरान आईपीओ से पैसे जुटाने का सबसे बड़ा आँकड़ा है। यह पिछले वित्त वर्ष के दौरान आईपीओ से जुटाये गये कुल 1,62,387 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 10% अधिक है।

प्राइम डेटाबेस समूह के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया के मुताबिक, साल के अंत में भले ही रफ्तार धीमी रही और आखिरी 3 महीनों में केवल 18,772 करोड़ रुपये ही जुटाये गये, फिर भी यह लगातार दूसरा वित्त वर्ष साबित हुआ, जब आईपीओ के जरिये रिकॉर्ड फंड जुटाया गया। आम तौर पर पहले ऐसा देखा जाता रहा है कि एक मजबूत साल के बाद आईपीओ बाजार में 2-3 साल की सुस्ती आ जाती है, लेकिन इस बार यह परिपाटी टूटी है।

हालाँकि, कुल इक्विटी फंड जुटाने के आँकड़े थोड़े कमजोर रहे। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 3.05 लाख करोड़ रुपये जुटाये गये, जो पिछले साल के 3.71 लाख करोड़ रुपये से 18% कम है। इसकी बड़ी वजह अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम या फॉलोऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) और पात्र संस्थागत प्लेसमेंट (क्यूआईपी) के जरिये कम फंड जुटना रहा।

अगर बड़े आईपीओ की बात करें, तो इस साल सबसे बड़ा निर्गम टाटा कैपिटल का रहा, जिसने 15,512 करोड़ रुपये जुटाये। इसके बाद एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज (12,500 करोड़ रुपये) और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स (11,605 करोड़ रुपये) का स्थान रहा। वहीं सबसे छोटा आईपीओ श्रीराम ट्विस्टेक्स का था, जिसने 110 करोड़ रुपये जुटाये। वित्त वर्ष के दौरान आये सभी आईपीओ का औसत आकार 1,598 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल से 23% कम है।

नयी तकनीक आधारित कंपनियों की भागीदारी भी बनी रही। इस साल 9 नये जमाने की (न्यू एज) टेक कंपनियों ने आईपीओ पेश करके कुल 32,509 करोड़ रुपये जुटाये। यह पिछले साल के मुकाबले अधिक है, लेकिन निवेशकों का उत्साह कुछ कम जरूर दिखा।

निवेशकों की प्रतिक्रिया की बात करें, तो 108 आईपीओ में से 56% को ही 10 गुना से ज्यादा आवेदन (सब्सक्रिप्शन) मिले, जबकि पिछले साल यह आँकड़ा 72% था। खुदरा निवेशकों की भागीदारी भी कम हुई। औसतन खुदरा निवेशकों के आवेदन 21.31 लाख से कम होकर 12.87 लाख रह गये। भारत कोकिंग कोल (बीसीसीएल) के आईपीओ में सबसे ज्यादा 68.95 लाख आवेदन आये। इसके बाद एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स और मीशो का स्थान रहा।

सूचीबद्धता (लिस्टिंग) के बाद मिलने वाले लाभ में भी गिरावट आयी। इस साल आईपीओ के सूचीबद्ध होने के दिन बंद भाव के आधार पर औसत लाभ (एवरेज लिस्टिंग गेन) 8% रहा, जो पिछले साल 30% था। केवल 34 आईपीओ (यानी 31% आईपीओ) ही 10% से ज्यादा प्रतिफल (रिटर्न) दे पाये। हालाँकि, भारत कोकिंग कोल (77%), हाईवे इन्फ्रास्ट्रक्चर (75%) और अर्बन कंपनी (62%) जैसे कुछ आईपीओ ने शानदार प्रदर्शन किया।

सबसे अहम बात यह रही कि बाजार में व्यापक गिरावट के कारण 27 मार्च 2026 तक 108 में से केवल 37 आईपीओ ही अपने इश्यू भाव से ऊपर चल रहे थे। कुल मिला कर इन आईपीओ का औसत प्रतिफल शून्य से 7% नीचे गिर गया, जिससे पिछले कई सालों से चला आ रहा सकारात्मक प्रतिफल का सिलसिला टूट गया। स्पष्ट है कि रिकॉर्ड स्तर पर फंड जुटाने के बावजूद निवेशकों का उत्साह ठंडा पड़ा और बाजार का प्रदर्शन भी अपेक्षा से कमजोर रहा। (शेयर मंथन, 31 मार्च 2026)