भारतीय बाजारों पर अजय बग्गा बुलिश, सेंसेक्स 98,000 और निफ्टी 30,000 तक जा सकता है

शेयर बाजार को लेकर बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा का आकलन आने वाले एक साल के लिए आशावादी नजर आता है। उनका मानना है कि कमाई में सुधार, कर सुधारों की निरंतरता और बहु-वर्षीय बुनियादी ढाचा खर्च के चलते भारतीय शेयर बाजार 2025 की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है और वैश्विक बाजारों से आगे निकल सकता है।

अजय बग्गा के अनुसार, जून 2026 के अंत तक सेंसेक्स 92,000 और निफ्टी 28,000 के स्तर तक पहुँच सकता है। अगले 12 महीनों के लिए उनका अनुमान और मजबूत है। दिसंबर 2026 तक वे सेंसेक्स को 98,000 और निफ्टी को 30,000 के स्तर पर देखते हैं।

अजय बग्गा के अनुमान

सेंसेक्स लक्ष्य (जून 2026)

92,000

निफ्टी लक्ष्य (जून 2026)

28,000

सेंसेक्स लक्ष्य (दिसंबर 2026)

98,000

निफ्टी लक्ष्य (दिसंबर 2026)

30,000

2025-26 में निफ्टी ईपीएस (रु.)

1200

2026-27 में निफ्टी ईपीएस (रु.)

1390

2025-26 की दूसरी छमाही में कॉर्पोरेट आय वृद्धि

0-10%

2025-26 में जीडीपी वृद्धि

7.2%

2026-27 में जीडीपी वृद्धि

7%

अगले 6 माह में डॉलर-रुपया विनिमय दर

91-95

अमेरिका से ट्रेड डील कब तक

जून 2026

सेंसेक्स 1 लाख पर किस वर्ष तक पहुँचेगा

2027

मौजूदा समय में भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़े सकारात्मक कारकों में अजय बग्गा कमाई में संभावित उछाल, जीएसटी एवं आयकर में कटौती, तथा बुनियादी ढाँचे पर बहु-वर्षीय सरकारी खर्च को गिनाते हैं। वहीं दूसरी ओर, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का बाहर जाना, बड़े सुधारों की कमी, भ्रष्टाचार और के-आकार की अर्थव्यवस्था को वे नकारात्मक जोखिम के रूप में देखते हैं।

वैश्विक बाजारों की तुलना में वे अगले 12 महीनों में भारतीय बाजार को बेहतर प्रदर्शन करने वाला मानते हैं। उनके अनुसार, आने वाले छह महीनों में बाजार की दिशा तय करने में तिमाही नतीजे सबसे अहम भूमिका निभायेंगे। अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्कों का असर वे भारतीय बाजारों पर हल्का नकारात्मक मानते हैं और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के जून 2026 तक पूरा होने की उम्मीद जताते हैं। आगामी आम बजट 2026-27 से उनकी अपेक्षाएँ निरंतरता, राजकोषीय संतुलन में ढील और रेलवे एवंरक्षा सहित बुनियादी ढाँचे पर खर्च बढ़ाने की हैं। उनका मानना है कि बजट का असर बाजार पर हल्का सकारात्मक रहेगा।

ब्याज दरों को लेकर अजय बग्गा का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व और भारतीय रिजर्व बैंक दोनों ही आगे चलकर दो-दो बार दरों में कटौती कर सकते हैं। निजी पूँजीगत व्यय की बहाली को वे अभी करीब एक साल दूर मानते हैं। वैश्विक स्तर पर आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय बाजारों को सबसे अधिक प्रभावित करने वाला कारक हो सकता है। विदेशी निवेश प्रवाह को लेकर उनकी अपेक्षा सपाट बनी हुई है। डॉलर-रुपया विनिमय दर के बारे में उनका अनुमान है कि अगले छह महीनों में डॉलर 91 से 95 रुपये के दायरे में रह सकता है।

अगले 1 साल में पसंदीदा क्षेत्र/शेयर

तेजी वाले क्षेत्र : वित्तीय सेवाएँ, दूरसंचार, वाहन और औद्योगिक क्षेत्र 

कमजोर क्षेत्र : एफएमसीजी

(शेयर मंथन, 21 जनवरी 2026)