एसएमसी कैपिटल्स लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक डॉ. डीके अग्रवाल का है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सशक्त आधार, सुधारों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और भारत को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास भारतीय शेयर बाजार को आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला बाजार बना सकते हैं।
डॉ. अग्रवाल मौजूदा समय में भारतीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ा सकारात्मक कारक मजबूत आर्थिक बुनियाद, सुधारों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और विकसित भारत के लक्ष्य को मानते हैं। वहीं, अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में संभावित देरी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली को वे प्रमुख नकारात्मक जोखिम के रूप में देखते हैं। उनका मानना है कि अगले 12 महीनों के दौरान भारतीय बाजार वैश्विक बाजारों को स्पष्ट रूप से मात देने वाला है।
डॉ. डीके अग्रवाल के अनुमान |
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सेंसेक्स लक्ष्य (जून 2026) |
94,000 |
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निफ्टी लक्ष्य (जून 2026) |
29,000 |
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सेंसेक्स लक्ष्य (दिसंबर 2026) |
1,00,000 |
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निफ्टी लक्ष्य (दिसंबर 2026) |
31,000 |
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2025-26 में निफ्टी ईपीएस (रु.) |
1105 |
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2026-27 में निफ्टी ईपीएस (रु.) |
1275 |
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2025-26 की दूसरी छमाही में कॉर्पोरेट आय वृद्धि |
10-20% |
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2025-26 में जीडीपी वृद्धि |
7.3% |
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2026-27 में जीडीपी वृद्धि |
7.6% |
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अगले 6 माह में डॉलर-रुपया विनिमय दर |
88-91 |
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अमेरिका से ट्रेड डील कब तक |
मार्च 2026 |
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सेंसेक्स 1 लाख पर किस वर्ष तक पहुँचेगा |
2026 |
आने वाले छह महीनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में वे अमेरिकी शुल्क, तिमाही नतीजे, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और आम बजट 2026-27 को मानते हैं। अमेरिका द्वारा लगाये गये शुल्कों का असर वे भारत और भारतीय शेयर बाजार के लिए बड़ा नकारात्मक मानते हैं। हालाँकि उन्हें भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मार्च 2026 तक पूरा होने की संभावना है।
आगामी आम बजट 2026-27 से डॉ. डीके अग्रवाल की प्रमुख अपेक्षाओं में उच्च पूँजीगत व्यय, विनिर्माण को बढ़ावा, पीएलआई योजनाओं का बेहतर परिष्करण एवंविस्तार, उपभोग को बढ़ावा देने के लिए कर एवं सरचार्ज में कटौती तथा तय मार्ग के अनुसार राजकोषीय अनुशासन बनाये रखना शामिल है। उनके अनुसार बजट का असर बाजार पर हल्का सकारात्मक रहेगा।
ब्याज दरों को लेकर उनका मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व करीब 75 आधार अंकों की कटौती दो चरणों में कर सकता है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक लगभग 25 आधार अंकों की एक कटौती कर सकता है। निजी पूंजीगत व्यय को लेकर वे मानते हैं कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही तक इसमें उल्लेखनीय तेजी देखने को मिल सकती है।
वैश्विक स्तर पर आने वाले महीनों में भारत और चीन पर लगाये जाने वाले शुल्क तथा भू-राजनीतिक तनाव भारतीय बाजारों को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले कारक हो सकते हैं।
विदेशी निवेश प्रवाह को लेकर उनकी अपेक्षा है कि अगले छह महीनों में एफपीआई और एफडीआई दोनों में सुधार देखने को मिल सकता है।
अगले 1 साल में पसंदीदा क्षेत्र/शेयर
तेजी वाले क्षेत्र : बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं, रक्षा, ऐच्छिक उपभोग, कृत्रिम मेधा, स्वचालन एवं क्लाउड पर केंद्रित आईटी कंपनियाँ, हरित ऊर्जा, विद्युत पारेषण व भंडारण, पूँजीगत वस्तुएँ, कम कर्ज वाली अवसंरचना कंपनियाँ और विशेष रूप से दोपहिया वाहन क्षेत्र
कमजोर क्षेत्र : अत्यधिक कर्ज वाली लग्जरी रियल एस्टेट कंपनियाँ, निर्यात पर अधिक निर्भर वस्त्र, चमड़ा, कालीन तथा रत्न एवं आभूषण
(शेयर मंथन, 21 जनवरी 2026)