भारतीय शेयर बाजार भले ही ऊँचे स्तरों के आसपास बना हुआ हो, लेकिन आगे की दिशा केवल सूचकांकों की चाल से नहीं, बल्कि बाजार की चौड़ाई से तय होगी।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज में प्राइम रिसर्च प्रमुख देवर्श वकील का मानना है कि आने वाले समय में कमाई में सुधार और घरेलू निवेश प्रवाह की निरंतरता बाजार को अधिक व्यापक आधार दे सकती है। उनके अनुसार, यही कारक 2026 में बाजार की अगली चाल को मजबूती प्रदान करेंगे।
देवर्श वकील के अनुमान |
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सेंसेक्स लक्ष्य (जून 2026) |
89,000 |
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निफ्टी लक्ष्य (जून 2026) |
27,500 |
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सेंसेक्स लक्ष्य (दिसंबर 2026) |
95,000 |
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निफ्टी लक्ष्य (दिसंबर 2026) |
28,720 |
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2025-26 में निफ्टी ईपीएस (रु.) |
1,100 |
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2026-27 में निफ्टी ईपीएस (रु.) |
1,280 |
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2025-26 की दूसरी छमाही में कॉर्पोरेट आय वृद्धि |
0-10% |
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2025-26 में जीडीपी वृद्धि |
7.5% |
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2026-27 में जीडीपी वृद्धि |
7% |
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अगले 6 माह में डॉलर-रुपया विनिमय दर |
88-91 |
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अमेरिका से ट्रेड डील कब तक |
मार्च 2026 |
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सेंसेक्स 1 लाख पर किस वर्ष तक पहुँचेगा |
2027 |
देवर्श वकील को लगता है कि अभी अपेक्षित कमाई वृद्धि और घरेलू निवेश प्रवाह की निरंतरता बाजार के लिए सबसे सकारात्मक कारक हैं। उनके अनुसार, सुव्यवस्थित निवेश योजनाओं और खुदरा निवेशकों की भागीदारी बाजार को स्थिरता प्रदान कर रही है। इसके उलट, ऊँचे मूल्यांकन और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली फिलहाल बाजार के लिए प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं। उनका मानना है कि अगले 12 महीनों में भारतीय बाजार वैश्विक बाजारों से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
आने वाले छह महीनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में वे अमेरिकी शुल्क, भारत की जीडीपी वृद्धि और तिमाही नतीजों को मानते हैं। शुल्कों का असर वे भारतीय बाजार पर हल्का नकारात्मक मानते हैं और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मार्च 2026 तक अंतिम रूप लेने की संभावना जताते हैं।
आगामी आम बजट 2026-27 से देवर्श वकील की प्रमुख अपेक्षा विदेशी निवेशकों के लिए कर राहत की है। उनके अनुसार बजट का समग्र असर बाजार के लिए हल्का सकारात्मक रह सकता है।
ब्याज दरों को लेकर उनका मानना है कि 2026 की पहली छमाही में अमेरिकी फेडरल रिजर्व एक बार दरों में कटौती कर सकता है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक फिलहाल दरों को स्थिर रख सकता है। वर्ष की दूसरी छमाही में फेड के रुख में नरमी देखने को मिल सकती है।
वैश्विक स्तर पर कृत्रिम मेधा में निवेश, डॉलर सूचकांक की चाल और मुद्रा बाजार की दिशा आने वाले महीनों में भारतीय बाजारों को प्रभावित कर सकती है। विदेशी निवेश प्रवाह को लेकर उनका आकलन है कि एफपीआई और एफडीआई, दोनों में सुधार देखने को मिल सकता है और प्रवाह सकारात्मक रुख अपना सकता है।
अगले 1 साल में पसंदीदा क्षेत्र/शेयर
तेजी वाले क्षेत्र : धातु
कमजोर क्षेत्र : अस्पताल
5 पसंदीदा शेयर : एमक्योर फार्मा, आईजीएल, किर्लोस्कर ब्रदर्स, ग्रासिम, जिंदल स्टील, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, नॉर्दर्न आर्क, एससीआई, एसबीआई और सूर्या रोशनी
(शेयर मंथन, 27 जनवरी 2026)