भारतीय शेयर बाजार इस समय ऐसे चरण में है, जहाँ तकनीकी स्तर और बुनियादी कारक एक-दूसरे के पूरक बनते दिख रहे हैं।
चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक सुमीत बगड़िया का मानना है कि अगले कुछ महीनों में बाजार की दिशा किसी एकतरफा उछाल की बजाय संतुलित और चयनात्मक तेजी की ओर रहेगी। उनके अनुसार कमाई में सुधार, घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिरता और तकनीकी स्तरों पर मजबूत आधार बाजार को सहारा दे रहे हैं। हालाँकि वैश्विक कारक समय-समय पर उतार-चढ़ाव बढ़ा सकते हैं।
सुमीत बगड़िया के मुताबिक, जून 2026 तक सेंसेक्स के लिए 81,700 और 78,400 के स्तर मजबूत सहारा बने हुए हैं। इन स्तरों के ऊपर टिके रहने की स्थिति में सेंसेक्स 90,000 से 92,000 के दायरे की ओर बढ़ सकता है। उनका मानना है कि 90,000 के ऊपर टिकाऊ ब्रेकआउट आने पर संस्थागत निवेश और इंडेक्स री-बैलेंसिंग से जुड़ी खरीदारी तेजी को और मजबूती दे सकती है।
निफ्टी के संदर्भ में सुमीत बगड़िया का आकलन है कि सूचकांक मध्यम अवधि में रचनात्मक रुझान बनाए हुए है। तकनीकी रूप से निफ्टी अपने प्रमुख दीर्घकालिक मूविंग एवरेज के ऊपर कारोबार कर रहा है, जिससे रुझान की मजबूती का पता चलता है। उनके अनुसार, 25,700–25,500 का क्षेत्र अहम समर्थन है और इसके ऊपर रहते हुए निफ्टी पहले चरण में 27,200 तथा जून 2026 तक 27,800 तक जा सकता है।
सुमीत बगड़िया के अनुमान |
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सेंसेक्स लक्ष्य (जून 2026) |
90-92,000 |
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निफ्टी लक्ष्य (जून 2026) |
27,200-27,800 |
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सेंसेक्स लक्ष्य (दिसंबर 2026) |
98,350 |
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निफ्टी लक्ष्य (दिसंबर 2026) |
29,300 |
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2025-26 में निफ्टी ईपीएस (रु.) |
1,250 |
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2026-27 में निफ्टी ईपीएस (रु.) |
1,400 |
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2025-26 की दूसरी छमाही में कॉर्पोरेट आय वृद्धि |
10-20% |
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2025-26 में जीडीपी वृद्धि |
6.8% |
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2026-27 में जीडीपी वृद्धि |
7.1% |
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अगले 6 माह में डॉलर-रुपया विनिमय दर |
91-95 |
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अमेरिका से ट्रेड डील कब तक |
मार्च 2026 |
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सेंसेक्स 1 लाख पर किस वर्ष तक पहुँचेगा |
2027 |
सुमीत बगड़िया का मानना है कि अभी भारतीय बाजार के लिए मजबूत आर्थिक वृद्धि, कॉरपोरेट लाभप्रदता में सुधार, युवा और शहरी होती आबादी से बढ़ती खपत, सरकार की सहायक नीतियाँ और नियंत्रित महँगाई जैसे सकारात्मक कारक मौजूद हैं। ये सब मिलकर बाजार के लिए एक ठोस आधार तैयार करते हैं। वहीं वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कच्चे तेल और जिंसों की कीमतों में संभावित तेजी, भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियों और कुछ क्षेत्रों में कॉरपोरेट ऋण दबाव के जोखिम भी हैं।
उनका आकलन है कि अगले 12 महीनों में भारतीय बाजारों का प्रदर्शन वैश्विक बाजारों के अनुरूप रह सकता है। आने वाले छह महीनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में वे भारत की जीडीपी वृद्धि, तिमाही नतीजे, महँगाई और ब्याज दरें तथा आम बजट 2026-27 को मानते हैं। उनकी राय है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्कों का असर भारतीय बाजार पर हल्का नकारात्मक होगा। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते मार्च 2026 तक हो सकता है।
आगामी आम बजट से उनकी अपेक्षा विकासोन्मुख राजकोषीय कदमों, बुनियादी संरचना पर व्यय में बढ़ोतरी, कर संरचना में स्पष्टता, रणनीतिक क्षेत्रों को समर्थन और निवेशकों के भरोसे को मजबूत करने वाली नीतियों की है। उनके अनुसार बजट का असर बाजार पर हल्का सकारात्मक रह सकता है।
ब्याज दरों को लेकर सुमीत बगड़िया का मानना है कि अगले 6 से 12 महीनों में अमेरिकी फेडरल रिजर्व 25–50 आधार अंकों की क्रमिक कटौती कर सकता है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक 25–75 आधार अंकों की संतुलित नरमी अपना सकता है। निजी पूँजीगत व्यय की बहाली को वे अगले 12–18 महीनों में धीरे-धीरे आकार लेते हुए देखते हैं।
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी मौद्रिक नीति, कच्चे तेल की कीमतें, एफपीआई प्रवाह, डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले महीनों में भारतीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं। विदेशी निवेश प्रवाह को लेकर उनका मानना है कि एफपीआई में धीरे-धीरे सुधार आ सकता है, जबकि एफडीआई प्रवाह भारत की मजबूत बुनियादी स्थिति के चलते स्थिर और समर्थ बना रहेगा।
अगले 1 साल में पसंदीदा क्षेत्र/शेयर
तेजी वाले क्षेत्र : वाहन, सीमेंट, बैंकिंग, रक्षा और धातु
कमजोर क्षेत्र : मीडिया
5 पसंदीदा शेयर : टीवीएस मोटर, अल्ट्राटेक सीमेंट, एसबीआई, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और हिंडाल्को
(शेयर मंथन, 27 जनवरी 2026)