शेयर मंथन में खोजें

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बड़ी तेजी की उम्मीद, क्या FY27 निवेशकों के लिए बनेगा सुनहरा साल?

भारतीय शेयर बाजार में पिछले लगभग दो वर्षों से मिडकैप और स्मॉलकैप निवेशकों को अपेक्षित रिटर्न नहीं मिल पाए हैं।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि यह स्थिति बदलने की तैयारी में है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण कॉर्पोरेट नतीजों में लगातार सुधार है। पिछले दो तिमाहियों से मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप कंपनियों के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिल रहा है। चूंकि किसी भी शेयर या इंडेक्स की दिशा अंततः कंपनियों की कमाई और मुनाफे से तय होती है, इसलिए बेहतर नतीजे आने वाले समय में इन सेगमेंट्स को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

यदि कोई बड़ी वैश्विक या घरेलू अनहोनी नहीं होती है तो मौजूदा वित्त वर्ष में मिडकैप इंडेक्स 70,000 के स्तर से नीचे नहीं रहना चाहिए। बाजार में लगभग 20 से 22 महीनों तक सीमित रिटर्न का दौर देखने के बाद अब कंपनियों के लिए बेस इफेक्ट भी अनुकूल हो गया है। इसका मतलब है कि पिछले कमजोर प्रदर्शन की तुलना में अब बेहतर ग्रोथ दिखाना आसान होगा। यही वजह है कि विशेषज्ञ पूरे वित्त वर्ष के लिए मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर सकारात्मक नजरिया बनाए हुए हैं।

तकनीकी संकेत भी इस आशावाद को मजबूती दे रहे हैं। कई प्रमुख इंडेक्स में 50-दिवसीय मूविंग एवरेज और 200-दिवसीय मूविंग एवरेज के बीच गोल्डन क्रॉस बनने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। आमतौर पर गोल्डन क्रॉस को लंबी अवधि की तेजी का संकेत माना जाता है। जब इसे बेहतर कॉर्पोरेट मुनाफे और कमजोर निवेशक भावनाओं के साथ जोड़ा जाता है, तो यह एक संभावित बुलिश सेटअप की ओर इशारा करता है। इतिहास भी बताता है कि जब निवेशकों में अत्यधिक निराशा होती है, तब अक्सर बाजार में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत होती है।

हालांकि कुछ निवेशकों को चार्ट पर दिखाई दे रहे गैप्स को लेकर चिंता बनी हुई है। तकनीकी विश्लेषण में माना जाता है कि कई बार बाजार पुराने गैप्स को भरने के लिए वापस जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर गैप का भरना जरूरी नहीं होता। वर्तमान मिडकैप इंडेक्स संरचना में जो गैप्स दिखाई दे रहे हैं, वे किसी बड़े ब्रेकडाउन या पैटर्न फेल होने का संकेत नहीं दे रहे हैं। जब तक इंडेक्स 60,000 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे लगातार बंद नहीं होता, तब तक गैप फिलिंग की संभावना सीमित मानी जा सकती है।

वैश्विक बाजारों से जुड़े जोखिमों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि अमेरिकी बाजारों में बड़ी बिकवाली आती है या कोई नया भू-राजनीतिक संकट पैदा होता है, तो भारतीय बाजार भी दबाव में आ सकते हैं। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में केवल गैप्स के आधार पर बड़ी गिरावट की उम्मीद करना उचित नहीं माना जा रहा है। घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और कॉर्पोरेट आय में सुधार फिलहाल बाजार को सहारा दे रहे हैं।

माइक्रोकैप शेयरों में भी अच्छे अवसर बन सकते हैं, लेकिन निवेशकों को अनुशासन बनाए रखना होगा। माइक्रोकैप का मतलब केवल पेनी स्टॉक्स नहीं है। लगभग 8,000 करोड़ से 15,000 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली कंपनियां भी इस श्रेणी में आ सकती हैं, जहां पर्याप्त लिक्विडिटी और बेहतर बिजनेस मॉडल देखने को मिलते हैं। निवेशकों को बेहद छोटे, कम लिक्विडिटी वाले और अत्यधिक सट्टेबाजी वाले शेयरों से बचना चाहिए।

इसी संदर्भ में हाल ही में चर्चाओं में रहे Rajesh Exports का उदाहरण भी सामने आता है। किसी कंपनी का अत्यधिक राजस्व दिखाना तभी मायने रखता है जब वह मुनाफे और नकदी प्रवाह में भी दिखाई दे। यदि हजारों करोड़ रुपये का कारोबार होने के बावजूद कंपनी लगातार बेहद कम मार्जिन या घाटा दिखा रही हो, तो निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है। केवल राजस्व के आंकड़ों के आधार पर निवेश का निर्णय लेना जोखिम भरा हो सकता है।

मिडकैप, स्मॉलकैप और चुनिंदा माइक्रोकैप शेयरों के लिए आने वाला समय उम्मीदों से भरा दिखाई दे रहा है। बेहतर कॉर्पोरेट नतीजे, सकारात्मक तकनीकी संकेत और मजबूत आर्थिक आधार इस वर्ग को समर्थन दे रहे हैं। हालांकि निवेशकों को लालच से बचते हुए गुणवत्ता वाली कंपनियों पर फोकस करना चाहिए, क्योंकि लंबी अवधि में वही कंपनियां बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखती हैं।

(शेयर मंथन, 10 जून 2026) (आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)

 

कंपनियों की सुर्खियाँ

निवेश मंथन पत्रिका

  • 2025-26 के सर्वश्रेष्ठ फंड - निवेश मंथन (मई 2026)

    पिछले दो वित्त-वर्ष शेयर बाजार और उसके साथ ही इक्विटी केंद्रित म्यूचुअल फंडों के लिए भी आशा-निराशा के बीच झूलते रहने वाले साबित हुए हैं। इस उठापटक ने शेयर बाजार और म्यूचुअल फंडों के प्रतिफल (रिटर्न) को बुरी तरह चोट पहुँचायी है। इस लिहाज से 2025-26 के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वाले फंडों का चयन करना एक सहज अध्ययन नहीं है। 

  • युद्ध, तेल संकट और महँगाई : सरकार क्यों दिखा रही बचत की राह - निवेश मंथन (अप्रैल 2026)

    प्रधानमंत्री मोदी की मितव्ययिता की अपील ने देश में खतरे की घंटी बजा दी है। सरकार हाल तक “सब ठीक है” का भरोसा दिला रही थी, पर अब प्रधानमंत्री ने पूरे देश को एकजुट होकर संकट का सामना करने का संदेश दे दिया है। 

देश मंथन के आलेख