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सितंबर-अक्टूबर में बाजार में आ सकती है नई रैली? मिडकैप-स्मॉलकैप पर नजर

भारतीय शेयर बाजार में हालिया कंसोलिडेशन के बाद निवेशकों की नजर अब अगले बड़े ट्रिगर पर है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि सितंबर और अक्टूबर के आसपास बाजार में एक नई और तेज रैली देखने को मिल सकती है। खासकर मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप शेयरों में हाल के कॉरपोरेट नतीजों के बाद उम्मीदें बढ़ी हैं। कई मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के नतीजे बाजार की उम्मीदों से बेहतर रहे हैं। कुछ कंपनियों में कमाई और कारोबारी प्रदर्शन उम्मीद से आगे रहा है। इसका असर आने वाली तिमाहियों में भी दिखाई दे सकता है। सितंबर तिमाही के नतीजों में इन कंपनियों को बेहतर प्रदर्शन का फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमत भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर बनी हुई है। अगर आने वाले समय में क्रूड ऑयल करीब 75 से 85 डॉलर के दायरे में स्थिर रहता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट सेक्टर के लिए यह सकारात्मक संकेत हो सकता है। वहीं, अगर तेल की कीमतों में फिर से बड़ी उथल-पुथल आती है तो बाजार की चाल प्रभावित हो सकती है।

अगर अगले दो महीने तक तेल की कीमतों में स्थिरता रहती है तो बाजार को इससे राहत मिल सकती है। इसके साथ ही हालिया नतीजों से मिलने वाला पॉजिटिव ट्रिगर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में एक और रैली को जन्म दे सकता है।

हालांकि निफ्टी की दिशा को लेकर तस्वीर थोड़ी अलग है। यहां विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों के बीच चल रही खरीद-बिक्री भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सितंबर के अंत से अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक बाजार की ट्रेजेक्टरी पर खास नजर रखनी होगी।

बाजार में तत्काल तेजी की गारंटी नहीं है और बीच-बीच में करेक्शन संभव है, लेकिन अगर कॉरपोरेट कमाई, क्रूड ऑयल और ग्लोबल माहौल अनुकूल रहते हैं तो सितंबर-अक्टूबर के दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी का नया दौर देखने को मिल सकता है।


(शेयर मंथन, 10 अगस्त 2026)

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