वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश केंद्रीय बजट 2026-27 के प्रभाव पर दीपक अग्रवाल, सीआईओ-डेब्ट, कोटक महिंद्रा एएमसी ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि यह बजट वित्तीय अनुशासन पर जोर देता है।
अग्रवाल ने कहा, “वित्त-वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट वित्तीय अनुशासन को रेखांकित करता है, जो रूढ़िवादी राजस्व (revenue) अनुमानों और पूँजीगत व्यय (capex) पर निरंतर जोर पर आधारित है। यह दृष्टिकोण मुद्रास्फीति यानी महँगाई दर के जोखिमों को नियंत्रित करने में मदद करता है, साथ ही बाजार के दीर्घकालिक विश्वास को मजबूत करता है। राजकोषीय घाटे (fiscal deficit) का लक्ष्य जीडीपी के 4.3% पर और शुद्ध बाजार उधारी (net market borrowings) ₹11.70 लाख करोड़ पर रहना अपेक्षाओं के अनुरूप हैं।
हालाँकि, डेटेड सिक्योरिटीज के माध्यम से ₹17.20 लाख करोड़ रुपये का सकल उधारी कार्यक्रम (gross market borrowings) अनुमानों से अधिक है। यह निकट अवधि में बॉन्ड बाजार की भावना पर दबाव डाल सकता है। सकारात्मक पक्ष देखें तो सरकार ने कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार को गहरा करने के उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत की है, जिसमें मार्केट-मेकिंग की योजनाएँ, कॉर्पोरेट बॉन्डों के लिए टोटल रिटर्न स्वैप (TRS) की शुरुआत और म्यूनिसिपल बॉन्डों के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं। ये पहलें उत्साहजनक हैं, लेकिन इनका प्रभाव अंतिम नीतिगत ढाँचे और क्रियान्वयन की गति पर निर्भर करेगा।
इसके तत्काल प्रभावों पर विचार करें, तो सरकारी बॉन्डों के यील्ड बढ़ने की संभावना है, जिसमें 10-वर्षीय बेंचमार्क 6.65–6.75% के दायरे में चल सकता है। बाजार सहभागी अब मौद्रिक नीति समिति (MPC) से ब्याज दरों और तरलता स्थितियों पर आगे की दिशा-निर्देशों की प्रतीक्षा करेंगे।”
दीपक अग्रवाल की यह टिप्पणी बजट की घोषणाओं के बाद डेब्ट और कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजारों पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाती है, जिसमें वित्तीय स्थिरता और बाजार गतिशीलता दोनों पर ध्यान दिया गया है। (शेयर मंथन, 1 फरवरी 2026)