एक्सपर्ट से जानें आगे कैसी रहेगी निफ्टी आईटी की चाल, निवेशकों को क्या करना चाहिए?

आईटी सेक्टर में हालिया नतीजों के बाद निफ्टी आईटी इंडेक्स में जो मजबूती दिखी है, उसने बाजार में एक नई उम्मीद जरूर जगाई है। 

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि बड़े आईटी खिलाड़ियों के नतीजे सामने आ चुके हैं और उनसे यह संकेत मिल रहा है कि सेक्टर की दिशा फिलहाल साफ होती जा रही है। टेक्निकल नजरिए से यह मूव एक तरह के “कप एंड हैंडल” जैसे स्ट्रक्चर की तरफ इशारा करता है, लेकिन इसके साथ ही वैल्यूएशन को लेकर हल्का डर भी बना हुआ है।

इस समय रणनीति यही रखनी होगी कि जो कंपनियां अच्छे नतीजे दे रही हैं, जैसे इंफोसिस, एचसीएल टेक, विप्रो और टेक महिंद्रा, उनमें चयनात्मक और टैक्टिकल तरीके से ही दांव लगाया जाए। खासकर मिड और स्मॉल-कैप आईटी शेयरों में वैल्यूएशन ज्यादा खिंचा हुआ है, इसलिए वहां सख्त स्टॉप-लॉस और रिस्क मैनेजमेंट बेहद जरूरी है। चार्ट ऐसे हैं कि कब राउंडिंग बॉटम, डबल टॉप में बदल जाए, यह पहचानना आसान नहीं होता। इसलिए यहां “रिस्क पहले, रिटर्न बाद” का फॉर्मूला ज्यादा सही बैठता है। 

निफ्टी आईटी इंडेक्स के लिए 37,500 का स्तर बेहद अहम माना जा रहा है। जब तक इंडेक्स इस लेवल के नीचे क्लोज नहीं करता, तब तक ऊपर की उम्मीदें जिंदा रहेंगी। ऊपर की तरफ 39,500 एक बड़ा रेजिस्टेंस है, जिसे पार करना आसान नहीं होगा और इसके लिए शायद एक तिमाही और इंतजार करना पड़े। फिलहाल ऐसा लग रहा है कि आने वाले कुछ महीनों में निफ्टी आईटी 37,500 से 39,500 के बीच करीब 2000 अंकों की रेंज में ही घूम सकता है। फरवरी तक अगर बाकी आईटी कंपनियों के नतीजे भी उत्साहजनक रहे और निफ्टी खुद 26,500 के ऊपर ब्रेकआउट देता है, तो आईटी सेक्टर को भी मार्केट टेलविंड मिल सकता है।

आईटी के बाद अगर बाजार के दिग्गज रिलायंस की बात करें, तो इसके नतीजे भी कुल मिलाकर ठीक रहे हैं। रिलायंस पहले ही करेक्शन से गुजर चुका है और मौजूदा स्तरों से बहुत ज्यादा डाउनसाइड की आशंका नहीं दिखती। Jio Platforms के नतीजों में भी करीब 11% की ग्रोथ देखने को मिली है, जो इसके ग्रोथ पाथ को कंफर्म करती है। टेक्निकली 1400 का स्तर Reliance के लिए बेहद क्रूशियल माना जा रहा है। इस लेवल के ऊपर टिके रहने पर शेयर में धीरे-धीरे भरोसा बन सकता है और 1525-1550 की रेंज पार करने के बाद यह साफ होगा कि रिलायंस ने अपना बॉटम बना लिया है।

आईटी सेक्टर में उम्मीद की किरण जरूर दिख रही है, लेकिन यह अभी भी एक टैक्टिकल प्ले बना हुआ है, न कि लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट थीम। वहीं रिलायंस जैसे बड़े स्टॉक में करेक्शन के बाद स्थिरता के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले हफ्तों में नतीजों का फ्लो, इंडेक्स लेवल्स और ग्लोबल संकेत यह तय करेंगे कि बाजार में यह पॉजिटिविटी कितनी दूर तक टिक पाती है।


(शेयर मंथन, 22 जनवरी 2026)

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