पीएफसी-आरईसी विलय से बनेगा पावर फाइनेंसिंग का दिग्गज खिलाड़ी, शेयरों पर क्या होगा असर?

सरकारी वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी दो प्रमुख कंपनियों पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) और REC Limited (REC) के संभावित मर्जर को लेकर इन-प्रिंसिपल बोर्ड अप्रूवल की खबर ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है।

सेठी फीनमार्ट के एमडी विकास सेठी का कहना है कि यह विकास बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग सेक्टर में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत हो सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय और वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि मर्जर का शेयर स्वैप रेशियो क्या तय होता है और सरकार किस प्रकार की पुनर्संरचना (रिस्ट्रक्चरिंग) की घोषणा करती है।

फिलहाल दोनों कंपनियां वैल्यूएशन के लिहाज से आकर्षक स्तरों पर मानी जा रही हैं। अपने उच्चतम स्तरों से इनमें करेक्शन देखने को मिला है, जिससे दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अवसर बन सकता है। इसके अलावा, दोनों ही कंपनियां मजबूत डिविडेंड यील्ड देती रही हैं, जो निवेशकों को नियमित आय का सहारा प्रदान करती है। पावर सेक्टर में सरकारी फोकस और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च में संभावित बढ़ोतरी भी इनके लिए सकारात्मक कारक माने जा रहे हैं।

जहां तक निवेश रणनीति का सवाल है, मर्जर रेशियो घोषित होने से पहले दोनों शेयरों में से किसी एक को चुनना समझदारी हो सकती है, लेकिन तुलनात्मक रूप से PFC थोड़ा बेहतर विकल्प माना जा सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह निवेशक की जोखिम क्षमता और निवेश अवधि पर निर्भर करेगा। कुल मिलाकर, यह विकास लंबी अवधि में सकारात्मक साबित हो सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय लेने से पहले आधिकारिक शर्तों और स्वैप रेशियो की घोषणा का इंतजार करना अधिक उचित रहेगा।


(शेयर मंथन, 23 फरवरी 2026)

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