जोमैटो के नतीजों में दम, मुनाफा 73% उछला, निवेशकों को क्या करना चाहिए?

जोमैटो के ताजा नतीजे पहली नजर में काफी मजबूत दिखाई देते हैं। कंपनी का मुनाफ़ा साल-दर-साल आधार पर करीब 73% बढ़ा है, जबकि रेवेन्यू में लगभग 200% की तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई है। निवेशक जानना चाहते है शेयरों में आगे क्या करना चाहिए? 

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि जोमैटो आंकड़ों ने यह साफ संकेत दिया है कि कंपनी का बिज़नेस मॉडल अब स्केल के साथ मुनाफे की दिशा में बढ़ रहा है और ऑपरेशनल लेवल पर सुधार दिख रहा है। नतीजों के बाद स्टॉक में हलचल भी दिखी, जो यह बताती है कि बाजार ने इन नंबरों को पहले से काफी हद तक प्राइस-इन कर रखा था। इसी बीच एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर यह आई कि जोमैटो के फाउंडर दीपिंदर गोयल अब कंपनी के सीईओ नहीं रहेंगे। 1 फरवरी से उन्होंने इस पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है और उनकी जगह अलविंदर ढिंढसा (या नया नियुक्त नेतृत्व) कमान संभालेगा। आम तौर पर ऐसे मामलों में बाजार में घबराहट दिखती है, लेकिन इस खबर का तत्काल कोई बड़ा नकारात्मक असर शेयर पर देखने को नहीं मिला। इसका एक कारण यह माना जा सकता है कि निवेशक फिलहाल नतीजों की मजबूती और बिज़नेस की निरंतरता पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। 

वैल्यूएशन के नजरिए से देखें तो जोमैटो अभी भी पूरी तरह सस्ता नहीं कहा जा सकता। मौजूदा स्तरों पर इसका मार्केट-कैप-टू-सेल्स रेशियो काफी ऊंचा है, जो यह संकेत देता है कि स्टॉक में आगे की अच्छी खबरें पहले से शामिल हैं। 200-250 रुपये के दायरे में यह शेयर ज्यादा सुरक्षित और आकर्षक वैल्यूएशन ज़ोन में आ सकता है। मौजूदा भावों पर 10-20% तक का डाउनसाइड रिस्क नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

बिज़नेस मॉडल के स्तर पर जोमैटो और दूसरे प्लेटफॉर्म-आधारित कारोबारों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां भारी डिस्काउंट और कूपन के ज़रिए ग्रोथ हासिल की जाती थी, वहीं अब फोकस प्रति ट्रांजैक्शन कमाई पर आ गया है। डिलीवरी चार्ज, प्लेटफॉर्म फीस और अन्य सर्विस चार्ज के ज़रिए कंपनियां अब सीधे मुनाफ़ा निकालने की कोशिश कर रही हैं। बाजार हिस्सेदारी हासिल करने के बाद यह बदलाव स्वाभाविक माना जा रहा है और लंबे समय में इसे ज्यादा सस्टेनेबल मॉडल कहा जा सकता है।

सीईओ के इस्तीफे को लेकर बाजार का शांत रहना यह भी दिखाता है कि निवेशक इसे फिलहाल एक मैनेजमेंट ट्रांजिशन के तौर पर देख रहे हैं, न कि किसी बड़े संकट के रूप में। हालांकि, यह भी समझना ज़रूरी है कि रिजल्ट वाले दिन का रिएक्शन अक्सर इमोशनल होता है। असली तस्वीर आमतौर पर दो-तीन ट्रेडिंग सेशंस के बाद साफ होती है, जब निवेशक ठंडे दिमाग से खबरों और आंकड़ों को पचाते हैं। 

जोमैटो के नतीजे कंपनी के बिजनेस की मजबूती को दिखाते हैं, लेकिन ऊंचे वैल्यूएशन और मैनेजमेंट बदलाव को नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता। शॉर्ट टर्म में स्टॉक में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, जबकि लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए सही एंट्री लेवल और समय देना ही सबसे अहम रणनीति होगी।


(शेयर मंथन, 26 जनवरी 2026)

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