एचडीएफसी लाइफ को लेकर चर्चा में एक ऐसी रणनीति बताई गई जिसमें लंबे समय के निवेश और टैक्टिकल मुनाफावसूली दोनों को साथ रखा गया है।
बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि पोर्टफोलियो स्टॉक का मतलब यह नहीं है कि शेयर को हर परिस्थिति में बिना किसी बदलाव के रखा जाए। यदि किसी शेयर का वजन तेजी के दौरान बहुत बढ़ जाता है, तो कुछ हिस्से की मुनाफावसूली करके पोर्टफोलियो का संतुलन बनाए रखा जा सकता है।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी निवेशक के पास 100 शेयर हैं और शेयर की कीमत में करीब 50% की तेजी आती है, तो पूरे निवेश को बेचने के बजाय कुछ हिस्से को मुनाफे में निकाला जा सकता है और बाकी शेयर पोर्टफोलियो में बनाए रखे जा सकते हैं। इसी तरह, अगर पोर्टफोलियो में किसी शेयर की कीमत करीब 25% बढ़ जाती है, तो कुछ हिस्से की मुनाफावसूली की जा सकती है। इसका उद्देश्य पूरे निवेश से बाहर निकलना नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो में उस स्टॉक के वजन और मुनाफे को मैनेज करना है।
एचडीएफसी लाइफ के मामले में विशेषज्ञ ने अपने पोर्टफोलियो में इंश्योरेंस कंपनियों के लिए लगभग 3% वजन रखने का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि बाजार में कहीं से टैक्टिकल प्रॉफिट मिलता है तो उसका कुछ हिस्सा गिरते हुए पोर्टफोलियो स्टॉक्स में धीरे-धीरे लगाया जा सकता है। इसे SIP जैसी प्रक्रिया के रूप में बताया गया, जिससे अलग-अलग स्तरों पर खरीदारी के जरिए औसत लागत को मैनेज किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि इस रणनीति में जल्दबाजी की जरूरत नहीं है। HDFC Life के लिए करीब 500 रुपये के आसपास का स्तर चर्चा में संभावित सपोर्ट के रूप में सामने आया। हालांकि, यह निश्चित भविष्यवाणी नहीं है और शेयर की वास्तविक चाल बाजार की परिस्थितियों तथा कंपनी के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।
(शेयर मंथन, 30 सितंबर 2026)
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