चांदी 3 लाख रुपये के पार, निवेशकों को सतर्क रहने की चेतावनी, क्या हो सकती है गिरावट?

सोना और चांदी के बाजार में इस समय जो हलचल दिख रही है, वह निवेशकों के लिए जितनी आकर्षक है, उतनी ही जोखिम भरी भी है।

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार कहते है कि चांदी की चाल बेहद तेज़ और असामान्य रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी का भाव 90 डॉलर के स्तर को पार कर चुका है और हाल ही में यह लगभग 93 डॉलर तक भी पहुंच गया था। भले ही फिलहाल इसमें थोड़ी ठंडक आई हो, लेकिन रुपये में देखें तो चांदी का भाव लगभग 3 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंच चुका है। कुछ समय पहले तक जिस स्तर को बहुत दूर की बात माना जा रहा था, वह अब अचानक बहुत नजदीक नजर आने लगा है। 

यहीं पर सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जब कोई एसेट सबसे खूबसूरत और सबसे आकर्षक लगने लगता है, तब पूरा बाजार उसी के पीछे भागने लगता है। यही वह समय होता है जब जोखिम सबसे ज़्यादा बढ़ जाता है। चांदी के मामले में भी यही स्थिति बनती दिख रही है। मौजूदा स्तरों पर यह कहना मुश्किल है कि अपसाइड पूरी तरह खत्म हो गया है, लेकिन इतना साफ है कि चांदी बेहद हाई रिस्क जोन में प्रवेश कर चुकी है। इतनी ज्यादा वोलैटिलिटी में न तो ट्रेड करना आसान होता है और न ही समझदारी भरा। 

चांदी को आमतौर पर एक इंडस्ट्रियल कमोडिटी के रूप में भी देखा जाता है। रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, चिप्स और कई तकनीकी उत्पादों में इसका इस्तेमाल होता है। लेकिन हर प्रोडक्ट की एक आर्थिक व्यवहार्यता होती है। एक स्तर के बाद, जब इनपुट कॉस्ट बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो वह प्रोडक्ट अनवायबल होने लगता है और खरीदार विकल्प तलाशने लगते हैं। यही सिद्धांत चांदी और सोने पर भी लागू होता है। किसी भी कमोडिटी की एक अफोर्डेबल वैल्यू होती है, उसके पार जाने पर डिमांड पर असर पड़ता है और करेक्शन की जमीन तैयार होती है। 

इस समय चांदी के तमाम पैरामीटर्स ओवरबॉट जोन में हैं और रिस्क बेहद ऊंचा है। करेक्शन कब आएगा और उसका सटीक ट्रिगर क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि अगर चांदी 90 डॉलर से फिसलकर 75 डॉलर तक भी आती है, तो उसे कमजोरी नहीं बल्कि एक “रनिंग करेक्शन” माना जाएगा। इसके बावजूद ट्रेंड स्ट्रक्चर पूरी तरह से खराब नहीं होगा, लेकिन निवेशकों के लिए जोखिम बना रहेगा। एमसीएक्स पर 3 लाख रुपये का स्तर अब कोई बहुत बड़ी दूरी नहीं रह गई है और यह औपचारिकता भी बन सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आंख बंद करके खरीदारी की जाए। जिन निवेशकों के पास पहले से चांदी है, उनके लिए मुनाफा वसूली से ज्यादा बेहतर रणनीति ट्रेलिंग स्टॉप लॉस की हो सकती है। बुल ट्रेंड में सीधे निकल जाना अक्सर सही नहीं होता, लेकिन बिना सुरक्षा के बैठे रहना भी खतरनाक हो सकता है।


(शेयर मंथन, 20 जनवरी 2026)

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