एक्सपर्ट से जानें क्या स्मॉल कैप शेयरों में आने वाला है सुनहरा दौर?

स्मॉल कैप शेयरों को लेकर बाजार में यह धारणा बन रही है कि आने वाले छह महीने से एक साल के भीतर अच्छा समय आ सकता है।

ट्रेड स्क्रिप्ट ब्रोकिंग के निदेशक संदीप जैन कहते है  कि पिछले कई वर्षों के ट्रेंड को देखें तो अक्सर ढाई–ढाई साल की मंदी के बाद अचानक तेज़ी का दौर आता है और महज कुछ हफ्तों में माहौल बदल जाता है। फिलहाल बाजार असमंजस और उतार-चढ़ाव से भरा है। वैश्विक स्तर पर जियोपॉलिटिकल तनाव और अमेरिका की नीतिगत अनिश्चितता जैसे कारक निवेशकों के मन में डर बनाए रखते हैं। ऐसे माहौल में सबसे जरूरी है कि निवेशक अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार निवेश करें और अनावश्यक लीवरेज से बचें।

वैल्यूएशन के मोर्चे पर दिलचस्प स्थिति है। इंडेक्स स्तर पर देखें तो बाजार अब भी बहुत सस्ता नहीं दिखता, लेकिन गहराई से विश्लेषण करने पर तस्वीर अलग नजर आती है। आज भारत में कई बड़ी कंपनियां 1 लाख करोड़ रुपये से ऊपर के मार्केट कैप के साथ मेगा कैप बन चुकी हैं, जिससे लार्ज, मिड और स्मॉल कैप की पारंपरिक परिभाषाएं धुंधली हो गई हैं। उदाहरण के तौर पर ACC Limited जैसी स्थापित सीमेंट कंपनी भी कभी-कभी स्मॉल कैप श्रेणी में दिखाई देती है। इसलिए केवल कैटेगरी देखकर निष्कर्ष निकालना भ्रामक हो सकता है।

स्मॉल कैप इंडेक्स के भीतर भी भारी असमानता है। कई शेयर 50–70% तक टूट चुके हैं, जबकि कुछ हाई पी/ई मल्टीपल वाले शेयर पूरे इंडेक्स को महंगा दिखाते हैं। यदि समान वेटेज के आधार पर विश्लेषण किया जाए तो गिरावट कहीं अधिक गहरी नजर आती है। इसलिए जरूरी है कि निवेशक इंडेक्स के औसत पी/ई के बजाय हर स्टॉक का अलग-अलग मूल्यांकन करें, कौन सा शेयर 10-15 पी/ई पर है, कौन 15–20 पर, और किसकी कमाई टिकाऊ है। कुल मिलाकर, स्मॉल कैप में अवसर जरूर उभर रहे हैं, लेकिन चयन बॉटम-अप अप्रोच से और सावधानी के साथ करना ही समझदारी होगी।


(शेयर मंथन, 28 फरवरी 2026)

(आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)