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क्या 500 करोड़ रुपये का आईपीओ बदल सकता है रनवाल एंटरप्राइजेज की ग्रोथ की कहानी?

मुंबई के रियल एस्टेट बाजार में फोकस रखने वाली रनवाल एंटरप्राइजेज IPO के जरिए 500 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी कर रही है।

कंपनी के CMD सुबोध सुभाष रणवाल के मुताबिक कंपनी की शुरुआत 1978 में हुई थी और अब तक मुंबई में करीब 65 प्रोजेक्ट पूरे किए जा चुके हैं, जिनमें 50,000 से ज्यादा घरों की डिलीवरी का दावा किया गया है। कंपनी फिलहाल करीब 88 मिलियन वर्ग फीट के डेवलपमेंट पर काम कर रही है, जिसमें मुख्य फोकस रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स पर है। इसके अलावा कंपनी अब कमर्शियल और रिटेल सेगमेंट में भी विस्तार कर रही है। कंपनी की मौजूदगी साउथ मुंबई, ईस्टर्न और वेस्टर्न सबर्ब्स के साथ अलीबाग में भी है।

कंपनी के मुताबिक IPO का पूरा इश्यू प्राइमरी है और इससे मिलने वाली राशि का इस्तेमाल कंपनी को मजबूत करने, कर्ज घटाने और भविष्य की ग्रोथ के लिए किया जाएगा। पहले कंपनी ने ₹1,000 करोड़ जुटाने की योजना के साथ DRHP दाखिल किया था, लेकिन पिछले 18 महीनों में हुए बदलावों के कारण इक्विटी की जरूरत कम हुई। कंपनी ने Blackstone के साथ शॉपिंग मॉल में साझेदारी की है और एक जापानी कंपनी के साथ Grade-A कमर्शियल ऑफिस प्रोजेक्ट के लिए पार्टनरशिप की है। इसके अलावा कंपनी अब सीधे प्रोजेक्ट लेने के बजाय ज्यादा Joint Venture और Joint Development मॉडल पर भी काम कर रही है। कंपनी के अनुसार इस एसेट-लाइट मॉडल के चलते पूंजी की जरूरत कम हुई और इसी आधार पर IPO का आकार ₹500 करोड़ रखा गया।

प्रोजेक्ट पाइपलाइन की बात करें तो कंपनी के अनुसार फिलहाल 28 प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जबकि 32 प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं। यानी कुल मिलाकर करीब 60 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स कंपनी के कारोबार का हिस्सा हैं। रेजिडेंशियल कारोबार अभी कंपनी का मुख्य आधार है, लेकिन कमर्शियल और रिटेल में भी विस्तार किया जा रहा है। अलीबाग प्रोजेक्ट का फाइनेंशियल क्लोजर पहले ही पूरा होने की बात कंपनी ने कही है। लिस्टिंग के बाद कंपनी के पास अलग-अलग पूंजी स्रोतों तक पहुंच बढ़ने की उम्मीद है, जिसका इस्तेमाल भविष्य की जरूरतों के अनुसार किया जा सकता है।

मुंबई के रियल एस्टेट बाजार में घरों की कीमत और अफोर्डेबिलिटी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कंपनी के CMD के मुताबिक मुंबई में घर खरीदना खासकर मिडिल क्लास के लिए बड़ा लक्ष्य है और खरीदारों को घर लेने के लिए अपनी आय के मुकाबले काफी ज्यादा वित्तीय स्ट्रेच करना पड़ता है। हालांकि कंपनी का कहना है कि आय और मॉर्गेज लोन में बढ़ोतरी के साथ कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता रहने से अफोर्डेबिलिटी के नजरिए से स्थिति में सुधार हुआ है। कंपनी के मौजूदा प्रोजेक्ट्स में लगभग ₹50 लाख से ₹5 करोड़ तक के टिकट साइज की बड़ी हिस्सेदारी है और कंपनी अफोर्डेबल, मिड-मार्केट और लग्जरी तीनों सेगमेंट में मौजूद है।

कंपनी की रणनीति में कमर्शियल रियल एस्टेट की हिस्सेदारी बढ़ाना भी शामिल है। फिलहाल कंपनी के कुल कारोबार में कमर्शियल का योगदान करीब 5% बताया गया, लेकिन आगे इसे 15-20% तक ले जाने का लक्ष्य बताया गया है। इसमें Grade-A ऑफिस और शॉपिंग मॉल दोनों शामिल हैं, जबकि रेजिडेंशियल कारोबार अभी भी करीब 80% के स्तर पर है। कंपनी ने यह भी कहा कि उसका फोकस मार्जिन सुधारने पर रहा है और वह करीब 30% ग्रॉस मार्जिन हासिल करने की उम्मीद रखती है।

कंपनी के वित्तीय आंकड़ों में साल-दर-साल उतार-चढ़ाव को लेकर CMD ने बताया कि इसका एक प्रमुख कारण प्रोजेक्ट-कंप्लीशन आधारित अकाउंटिंग मेथड है। जिस साल बड़े प्रोजेक्ट पूरे होते हैं, उसी साल उनका रेवेन्यू रिकॉग्नाइज किया जाता है। कंपनी के अनुसार 2024 में कुछ बड़े प्रोजेक्ट पूरे होने के कारण रेवेन्यू ज्यादा रहा, जबकि अगले साल इसमें कमी दिखी। इसके बावजूद कंपनी ने प्री-सेल्स में हर साल करीब 20-25% की ग्रोथ का दावा किया है। कंपनी ने यह भी बताया कि प्रॉफिट मार्जिन पर फोकस के कारण कम रेवेन्यू वाले साल में भी प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार देखने को मिला।

IPO से कंपनी के कर्ज में भी कमी आने की बात कही गई है। कंपनी के मुताबिक IPO प्रोसीड्स में से करीब ₹350 करोड़ का इस्तेमाल डेट रिडक्शन के लिए किया जाएगा। इसके अलावा HDFC के करीब ₹200 करोड़ के डेट को इक्विटी में कन्वर्ट किया जा चुका है। कंपनी के अनुसार IPO के बाद कुल मिलाकर करीब ₹550 करोड़ का डेट कम हो सकता है और डेट-इक्विटी रेशियो लगभग 2:1 तक आने की उम्मीद है। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया कि IPO का उद्देश्य केवल कर्ज घटाना नहीं, बल्कि कंपनी को मजबूत करना और लंबी अवधि में ग्रोथ के लिए तैयार करना है।

जोखिमों की बात करें तो कंपनी ने ग्लोबल अनिश्चितता, युद्ध और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को व्यापक जोखिम बताया। हालांकि कंपनी के CMD के मुताबिक मुंबई की अर्थव्यवस्था आईटी सेक्टर पर अन्य कुछ शहरों की तुलना में कम निर्भर है, इसलिए आईटी सेक्टर की कमजोरी का असर मुंबई के रियल एस्टेट पर अपेक्षाकृत कम हो सकता है। वहीं युद्ध और बढ़ती कमोडिटी कीमतों से महंगाई बढ़ने का जोखिम पूरी इंडस्ट्री और अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

आगे की रणनीति को लेकर कंपनी ने कहा कि IPO से पहले वह कोई फॉरवर्ड-लुकिंग स्टेटमेंट नहीं दे सकती। हालांकि कंपनी के अनुसार उसकी मौजूदा पाइपलाइन, एसेट क्लास, पार्टनरशिप, ब्रांड और कारोबार की कहानी उसके भविष्य के विस्तार की नींव हैं। कंपनी पहले मुंबई में अपनी मौजूदगी और मजबूत करने, उसके बाद Mumbai Metropolitan Region (MMR) और फिर महाराष्ट्र में विस्तार की दिशा में आगे बढ़ने की बात कहती है।


(शेयर मंथन, 25 सितंबर 2026)

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