भारत में सोने के आयात में मई 2026 के बाद से तेज गिरावट देखने को मिली है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की 23 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, आधिकारिक आंकड़ों में मई 2026 से हर महीने सोने के आयात में कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, इसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। इनमें सोने पर बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी के कारण घरेलू माँग में कमी, इंपोर्ट ड्यूटी में संभावित कटौती के इंतजार में लोगों द्वारा खरीदारी टालना और ऊँची घरेलू कीमतों के कारण सोने के आयात का अनौपचारिक चैनलों की ओर जाना शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर आयात का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक चैनलों की ओर जा रहा है, तो भारत की सोने से जुड़ी टैक्स व्यवस्था पर दोबारा विचार करने की जरूरत हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आधिकारिक आंकड़ों में सोने के आयात में गिरावट भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट यानी CAD और बैलेंस ऑफ पेमेंट के लिहाज से सकारात्मक हो सकती है। हालांकि, इसके कुछ छिपे हुए नकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल ने तीन संभावनाएं सामने रखी हैं। पहली संभावना यह है कि भारतीय परिवारों की सोने की मांग स्थायी रूप से कम हो गई हो। दूसरी यह कि खरीदारी में फिलहाल अस्थायी ठहराव आया हो और आगे चलकर मांग फिर बढ़ सकती है। तीसरी संभावना यह है कि आधिकारिक चैनलों के बजाय अनौपचारिक माध्यमों से सोने की खरीद या आयात बढ़ा हो।
सोने की माँग में स्थायी कमी की एक वजह मई 2026 में बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, 13 मई 2026 से सोने पर कुल इंपोर्ट ड्यूटी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी गई। इसमें बेसिक कस्टम्स ड्यूटी 5 फीसदी से बढ़ाकर 10% और कृषि अवसंरचना और विकास उपकर यानी AIDC को 1% से बढ़ाकर 5% किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, इस बदलाव के बाद घरेलू सोने की कीमत वैश्विक कीमतों की तुलना में करीब 9% बढ़ी। इसके अलावा, सोने की कीमतों में स्थिरता आने से भी परिवारों के लिए सोने में निवेश का आकर्षण कम हो सकता है।
रिपोर्ट ने यह भी बताया कि सोने की कीमतों में तेजी और गिरावट का असर निवेशकों के व्यवहार पर दिखाई देता है। उदाहरण के तौर पर, 2025 की दूसरी छमाही में सोने की कीमतों में तेजी के दौरान गोल्ड ईटीएफ में निवेश का प्रवाह बढ़ा था। इसके विपरीत, फरवरी 2026 के बाद सोने की कीमतों में गिरावट के साथ गोल्ड ईटीएफ में निवेश का प्रवाह भी कम हुआ। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू निवेशकों का सोने के प्रति व्यवहार हाल के रिटर्न से प्रभावित हो सकता है।
दूसरी संभावना यह है कि सोने की खरीदारी में आई गिरावट स्थायी नहीं बल्कि अस्थायी हो। रिपोर्ट के अनुसार, परिवारों को मई में बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी के कारण घरेलू कीमतों में हुई एकमुश्त बढ़ोतरी को पचाने में समय लग सकता है। साथ ही, अगर भविष्य में सरकार सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाती है, तो हाल में ऊँची कीमतों पर सोना खरीदने वाले लोगों को नुकसान हो सकता है। इसी वजह से कुछ खरीदार फिलहाल खरीदारी टाल सकते हैं। रिपोर्ट में पिछले वर्षों के उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा गया है कि इंपोर्ट ड्यूटी में बदलाव के बाद सोने के आयात में पहले गिरावट और बाद में धीरे-धीरे रिकवरी देखने को मिली है।
तीसरी और महत्वपूर्ण संभावना अनौपचारिक आयात की है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ऊँची घरेलू कीमतों और टैक्स के कारण सोने का आयात आधिकारिक चैनलों से हटकर अनौपचारिक चैनलों की ओर चला जाता है, तो आधिकारिक आयात के आंकड़े वास्तविक मांग को कम दिखा सकते हैं। ऐसे में सरकार को कस्टम्स ड्यूटी और GST के जरिए मिलने वाले राजस्व का भी नुकसान हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर बड़ी मात्रा में सोने की खरीदारी संगठित और आधिकारिक चैनलों के बाहर होती है, तो ऊंची इंपोर्ट ड्यूटी का घरेलू मांग पर अपेक्षित असर भी कम हो सकता है।
आँकड़ों की बात करें तो रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 के पहले पाँच महीनों यानी 5MFY27 में भारत का सोने का आयात 17.5 अरब डॉलर रहा, जबकि 5MFY26 की समान अवधि में यह 16.9 अरब डॉलर था। पूरे वित्त वर्ष 2026 में सोने का आयात 72 अरब डॉलर रहा था। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 88 अरब डॉलर के सोने के आयात का अनुमान लगाया है, हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि 5MFY27 के रुझानों को देखते हुए इस अनुमान पर नुकसान का जोखिम मौजूद है। साथ ही, आगामी त्योहारी सीजन में सोने की माँग बढ़ने की उम्मीद भी जताई गई है।
सोने के आयात का असर भारत के बाहरी क्षेत्र पर भी पड़ता है। रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2027 के लिए 85 डॉलर प्रति बैरल के औसत कच्चे तेल की कीमत मानते हुए CAD/GDP को 1.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, सोने के आयात का अनुमान इस स्थिति के लिए एक जोखिम बन सकता है। रिपोर्ट के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत का सोने का आयात 72 अरब डॉलर रहा, जबकि FY2027E के लिए यह 88 अरब डॉलर माना गया है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने सोने पर टैक्स व्यवस्था में एक संभावित बदलाव का भी उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादा GST और कम कस्टम्स ड्यूटी का संयोजन सोने की माँग को प्रभावित कर सकता है, लेकिन इससे सरकारी राजस्व को बेहतर तरीके से सुरक्षित करने में मदद मिल सकती है। रिपोर्ट के एक काल्पनिक स्थिति में सोने पर GST को 3 फीसदी से बढ़ाकर 8 फीसदी और बेसिक कस्टम्स ड्यूटी को 10% से घटाकर 5% मानकर राजस्व का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, ये रिपोर्ट के काल्पनिक स्थिति हैं, न कि सरकार द्वारा घोषित कोई नीति या बदलाव।
(शेयर मंथन, 26 सितंबर 2026)