बाजार में लंबे समय से जारी उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
खासकर स्मॉलकैप में तेजी आने के बाद कई शेयरों के दोबारा गिरने से निवेशकों को लग रहा है कि बाजार में पैसा बनाना मुश्किल हो गया है। बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि मौजूदा दौर को सिर्फ नकारात्मक नजरिए से देखने के बजाय इसके पीछे के कारणों को समझना जरूरी है। उनके अनुसार युद्ध, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, ब्याज दरें और यील्ड जैसे कारक फिलहाल बाजार पर दबाव बना रहे हैं, लेकिन इन्हें हमेशा बनी रहने वाली स्थिति नहीं माना जा सकता।
विशेषज्ञ के मुताबिक, बाजार में किसी भी साइकिल को समझने के लिए सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि इंडेक्स ने नया हाई बनाया या नहीं। यह देखना ज्यादा जरूरी है कि अर्निंग्स किस दिशा में जा रही हैं और वैल्यूएशन किस स्तर पर हैं। उनका कहना है कि दिसंबर तिमाही से अर्निंग्स में सुधार दिखाई दिया है और निफ्टी की वैल्यूएशन भी पहले के मुकाबले नीचे आई है। इसलिए बाजार के प्रदर्शन को केवल पिछले हाई से तुलना करके देखने के बजाय मौजूदा अर्निंग्स और वैल्यूएशन के आधार पर समझना चाहिए।
स्मॉलकैप में भी यही रणनीति लागू होती है। पिछले साइकिल में जिन कंपनियों को फायदा मिला था, उनमें से कुछ इस समय अलग परिस्थितियों से गुजर रही हैं। हाई क्रूड, गैस की कीमतों, ब्याज दरों और फंडिंग कॉस्ट का असर कुछ कंपनियों की कमाई पर पड़ा है। यही कारण है कि स्मॉलकैप इंडेक्स में तेजी के बावजूद हर शेयर ने प्रदर्शन नहीं किया। विशेषज्ञ के मुताबिक, ऐसे शेयरों में सुधार आने में समय लग सकता है और निवेशकों को यह समझना चाहिए कि समस्या कंपनी के फंडामेंटल में स्थायी बदलाव है या मौजूदा साइकिल का अस्थायी असर।
उन्होंने बाजार में सक्रिय रहने के लिए प्रॉफिट बुकिंग और पोर्टफोलियो रीपोजिशनिंग को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि जब बाजार एक सीमित दायरे में घूम रहा हो, तब निवेशकों को सिर्फ इस शिकायत में नहीं रहना चाहिए कि बाजार चल नहीं रहा है। इसके बजाय जहां कमाई का मौका बन रहा है, वहां पूंजी को लगाने और कमजोर या कम प्रदर्शन करने वाले हिस्सों की समीक्षा करने पर ध्यान देना चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि हर कमजोर शेयर को तुरंत बेच दिया जाए, बल्कि यह देखना जरूरी है कि उस शेयर की मौजूदा कमजोरी का कारण क्या है और उसकी अर्निंग्स साइकिल कब सुधर सकती है।
विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि युद्ध या मौजूदा दबाव वाले कारणों में बदलाव आने पर बाजार की तस्वीर तेजी से बदल सकती है। ऐसे समय में वे शेयर जो अभी दबाव में हैं, अचानक बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। इसलिए बाजार में सही रणनीति केवल तेजी का इंतजार करना नहीं, बल्कि बदलती परिस्थितियों के हिसाब से पोर्टफोलियो को लगातार एडजस्ट करना है। उनके मुताबिक, बाजार जब दोबारा मजबूती से चलेगा तो सही तरीके से तैयार पोर्टफोलियो में अल्फा मिलने की संभावना बन सकती है।
(शेयर मंथन, 21 सितंबर 2026)
(आप किसी भी शेयर, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी आदि के बारे में जानकारों की सलाह पाना चाहते हैं, तो सवाल भेजने का तरीका बहुत आसान है! बस, हमारे व्हाट्सऐप्प नंबर +911147529834 पर अपने नाम और शहर के नाम के साथ अपना सवाल भेज दें।)