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क्या FMCG सेक्टर में अब बड़ी ग्रोथ की उम्मीद रखना सही है?

बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार का कहना है कि FMCG को अब ग्रोथ का प्रमुख पैमाना मानना सही नहीं होगा।

उनका कहना है कि FMCG में ज्यादातर प्रोडक्ट रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े हैं और देश के बड़े हिस्से में इनकी पहुंच पहले ही काफी बढ़ चुकी है। ऐसे में सामान्य प्रोडक्ट्स की मांग में बहुत तेज ग्रोथ की गुंजाइश सीमित होती जा रही है।

बाजार विश्लेषक ने टूथपेस्ट का उदाहरण देते हुए समझाया कि जब किसी प्रोडक्ट की मांग बहुत मजबूत होती है तो कंपनियों को बार-बार नए वेरिएंट और इनोवेशन करने की जरूरत कम पड़ती है। लेकिन जब सामान्य मांग काफी हद तक पूरी हो जाती है, तब कंपनियां प्रीमियम प्रोडक्ट, नए फ्लेवर या अलग पैकेजिंग के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश करती हैं। उनके मुताबिक, FMCG कंपनियों में इस तरह का ट्रेंड दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि FMCG कंपनियों को प्रीमियम वैल्यूएशन मिलने की एक वजह उनका मजबूत ब्रांड और नेगेटिव वर्किंग कैपिटल मॉडल भी है। कंपनियों को कई मामलों में ग्राहक या डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से पैसा पहले मिल जाता है और उसके बाद उत्पादन तथा सप्लाई की प्रक्रिया होती है। इसके अलावा मजबूत ब्रांड की वजह से इन कंपनियों के कारोबार में स्थिरता रहती है, जिसके कारण बाजार उन्हें प्रीमियम वैल्यूएशन देने को तैयार रहता है।

हालांकि, बाजार विश्लेषक ने स्पष्ट किया कि प्रीमियम वैल्यूएशन का मतलब यह नहीं है कि कंपनियां बहुत तेज ग्रोथ देंगी। उनके मुताबिक, FMCG कंपनियों में 2%, 4%, 5% या 7% की ग्रोथ भी अच्छी मानी जा सकती है, क्योंकि इनका मार्केट कैप काफी बड़ा हो चुका है। इसलिए निवेशकों को FMCG कंपनियों से बहुत अधिक ग्रोथ की उम्मीद रखने के बजाय उनके बिजनेस मॉडल, ब्रांड और वैल्यूएशन को समझना चाहिए।


(शेयर मंथन, 22 सितंबर 2026)

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